76वाँ सत्र: वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये, अमेरिकी राष्ट्रपति का नए कूटनैतिक युग का संकल्प

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वैश्विक महामारी कोविड-19, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती असुरक्षा सरीखे संकटों से निपटने के लिये, वैश्विक एकता के एक नए युग की शुरुआत का आहवान किया है. यह पहली बार है जब जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र को सम्बोधित किया है.

उन्होंने कहा कि फ़िलहाल दुनिया इतिहास के एक बेहद अहम पड़ाव पर खड़ी है, और अतीत की तुलना में कहीं ज़्यादा साथ मिलकर काम किया जाना होगा.

राष्ट्रपति बाइडेन ने यूएन महासभा में शिरकत कर रहे विश्व नेताओं को भरोसा दिलाया कि अमेरिका, अपने मित्र राष्ट्रों के साथ साझीदारी की मंशा रखता है, ताकि दुनिया को सर्वजन के लिये एक ज़्यादा शान्तिपूर्ण, समृद्ध भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके.

उन्होंने कहा कि सरकारों को एक साथ मिलकर अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर निर्माण करना होगा ताकि हर किसी के लिये न्यायोचित समृद्धि, शान्ति व सुरक्षा के वादे को पूरा किया जा सके. 

राष्ट्रपति बाइडेन ने बताया कि यह उद्यम, आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना यह 76 वर्ष पहले था. 

अफ़ग़ानिस्तान से वापसी

राष्ट्रपति ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाये जाने के अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि इससे गहन अमेरिकी कूटनैतिक प्रयासों में एक नया अध्याय खुल गया है. 

उन्होंने कहा, “बल का इस्तेमाल, हमारे अन्तिम उपाय के औज़ार के रूप में होना चाहिए, हमारे पहले नहीं.”

राष्ट्रपति बाइडेन ने स्पष्ट किया कि पिछले दो दशकों के युद्धों पर केंद्रित प्राथमिकताओं में फेरबदल करते हुए, नए उभरते हुए ख़तरों से निपटने पर ध्यान देने की बात कही है.

उन्होंने कहा कि दुनिया को लोकतंत्र व तानाशाही में से एक को चुनना होगा. अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता पर तालेबान का नियंत्रण स्थापित हो जाने के बाद, पिछले दो दशक में लोकतंत्र की दिशा में हुई प्रगति के लिये जोखिम पैदा हो गया है.

आशा की ख़ुराक

राष्ट्रपति बाइडेन ने वैश्विक महामारी कोविड-19 से अब तक हुई 45 लाख मौतों पर गहरा दुख जताया है. 

उन्होंने जल्द से जल्द लोगों का टीकाकरण किये जाने और विश्व भर में ऑक्सीजन, परीक्षणों, उपचारों की सुलभता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है ताकि ज़िन्दगियों की रक्षा की जा सके. 

राष्ट्रपति ने बताया कि अमेरिकी विमानों के ज़रिये कोरोनावायरस टीकों को 100 से अधिक देशो में पहुँचाया गया है, जोकि उम्मीद की ख़ुराक का प्रतीक है. 

उन्होंने कहा है कि जल्द ही अतिरिक्त वैक्सीन ख़ुराकों को उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में घोषणा की जाएगी. 

साथ ही एक नए वैश्विक स्वास्थ्य ढाँचागत प्रणाली की पुकार लगाई गई है ताकि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये वित्तीय प्रबन्ध किया जा सके.

भविष्य में वैश्विक महामारियों के उभरने की आशंका के मद्देनज़र, एक वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम परिषद के गठन की बात कही गई है. 

बहुपक्षवाद पर ज़ोर

राष्ट्रपति बाइडेन ने ज़ोर देकर कहा कि उनका प्रशासन, ‘पहले अमेरिका’ के बजाय, बहुपक्षवाद पर आधारित कूटनीति की ओर आगे बढ़ रहा है.

“हम अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से मेज़ पर उपस्थित हैं,” विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में, ताकि साझा चुनौतियों पर वैश्विक कार्रवाई को स्फूर्ति प्रदान की जा सके. 

उन्होंने कहा कि अमेरिका, फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ है, न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये कोवैक्स पहल में भागीदार है,

पैरिस जलवायु परिवर्तन समझौते का फिर से हिस्सा बन रहा है, और अगले वर्ष मानवाधिकार परिषद में सीट के लिये दौड़ की तैयारी कर रहा है.

राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का संकट सीमाओं से परे है और इस वर्ष नवम्बर में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) में सभी देशों को अधिकतम महत्वाकाँक्षा के साथ आना होगा.

उन्होंने बताया कि अमेरिका का एक नया लक्ष्य, वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में, 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 50 फ़ीसदी की कटौती लाना है.

इसके अलावा, अमेरिकी काँग्रेस में हरित बुनियादी ढाँचे और बिजली चालित वाहनों के लिये निवेश के विषय पर चर्चा चल रही है. 

अनवरत कूटनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया, पश्चिम द्वारा समर्थित लोकतांत्रिक मूल्यों और तानाशाह सरकारों द्वारा उनके लिये बेपरवाही के बीच चुनाव को देख रही है.

उन्होंने बताया कि उभरते टैक्नॉलॉजी जोखिमों व निरंकुश देशों के विस्तार से निपटने के लिये, अमेरिका अनवरत कूटनीति के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है. 

राष्ट्रपति बाइडेन के मुताबिक़, एक नए शीत युद्ध के रास्ते पर नहीं चला जाएगा, और ना ही दुनिया को अलग-अलग खण्डों में विभाजित किया जाएगा. 

मगर, ताक़तवर देशों द्वारा कमज़ोर देशों पर दबदबा बनाये जाने के प्रयासों का अमेरिका पुरज़ोर विरोध करेगा. 

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने मूल्यों व शक्ति के साथ नेतृत्व करेगा, ताकि साथी राष्ट्रों व मित्रों के लिये मज़बूती से खड़ा हुआ जा सके. 

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