76वाँ सत्र: ईरान ने कहा, प्रतिबन्ध हैं युद्ध लड़ने का अमेरिकी तरीक़ा

ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहिम रईसी ने यूएन महासभा में उच्चस्तरीय जनरल डिबेट के दौरान अपने सम्बोधन में, अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबन्धों को, युद्ध लड़ने का एक तरीक़ा क़रार दिया है. ईरानी नेता ने अमेरिका से इन प्रतिबन्धों का अन्त किये की माँग की है. 

राष्ट्रपति रईसी ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी को ‘तार्किकता का अभाव’ क़रार दिया है. 

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन से सीरिया, यमन और अफ़ग़ानिस्तान में दमित लोगों के साथ-साथ, यह अमेरिका में करदाताओं के लिये भी नुक़सानदेह है. 

राष्ट्रपति के मुताबिक़ ईरान के विरुद्ध लगाए गए प्रतिबन्ध, दुनिया में देशों से लड़ाई लड़ने का नया अमेरिकी तरीक़ा है.

उन्होंने इसे मानवता के विरुद्ध अपराध बताया है, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं पर लगाए गए प्रतिबन्ध. 

उन्होंने कहा कि इन पाबन्दियों के बावजूद, तेहरान रीसर्च रिएक्टर ने ईरान में दस लाख से ज़्यादा कैंसर मरीज़ों के लिये रेडियो औषधियों (radiopharmaceuticals) को तैयार किया है. इन औषधियों में रेडियोएक्टिव आइसोटॉप्स का इस्तेमाल किया जाता है. 

साथ ही, जैव-टैक्नॉलॉजी के क्षेत्र में प्रगति दर्ज किये जाने की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के लिये ईरान अपनी वैक्सीन तैयार कर रहा है.

राष्ट्रपति रईसी ने आगाह किया कि वैश्विक महामारी कोविड-19, दुनिया के लिये नीन्द से जगा देने वाली एक घण्टी है और यह मनुष्यों की एक दूसरे के निर्भरता को भी रेखांकित करती है.

आतंकवाद पर चिन्ता

ईरानी नेता ने आतंकवाद से पनपते ख़तरों पर चिन्ता जताते हुए चेतावनी जारी की है कि इस्लामिक स्टेट (दाएश) चरमपंथ की अन्तिम लहर नहीं है. 

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के बीज, पहचान और अर्थव्यवस्था जैसे संकटों में मौजूद हैं. 

“इस तथ्य ने कि आधुनिक जीवन अर्थ व आध्यात्मिकता से विहीन हो गया है, और साथ ही निर्धनता, भेदभाव व दमन के फैलाव ने आतंकवाद के उभरने में मदद की है.”

राष्ट्रपति रईसी ने ज़ोर देकर कहा कि क़ब्ज़ा करने वाली यहूदीवादी हुक़मत, राज्यसत्ता द्वारा पोषित आतंकवाद का सबसे बड़ा संगठनकर्ता है, जिसका एजेण्डा ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में महिलाओं व बच्चों का संहार करना है.

उन्होंने कहा कि सदी का समझौता, फ़लस्तीनियों पर थोपे गए अन्य समझौतों की तरह ही विफल हो गया. 

“सिर्फ़ एक ही समाधान है: मुसलमान, ईसाई और यहूदियों समेत, सभी धर्मों व जातीय समूहों के फ़लस्तीनियों की भागीदारी के साथ एक जनमत-संग्रह को कराया जाना.”

परमाणु कार्यक्रम

वर्ष 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को साझा व्यापक कार्ययोजना (Joint Comprehensive Plan of Action ) कहा जाता है.   

इस योजना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी किये जाने के लिये नियमों को निर्धारित किया गया है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबन्धों को हटाने का रास्ता सुझाया गया है. 

ईरानी राष्ट्रपति ने अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों को लागू किये जाने की माँग करते हुए, सभी पक्षों से इस समझौते का पालन करने की अपील की है. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान में परमाणु हथियारों का उत्पादन व भण्डारण, धार्मिक आदेश के अनुसार वर्जित है, और परमाणु अस्त्रों का ईरान के प्रतिरक्षा सिद्धान्त में कोई स्थान नहीं है. 

राष्ट्रपति रईसी ने शेष दुनिया के साथ व्यापक स्तर पर राजनैतिक व आर्थिक सहयोग को मज़बूती देने की उत्सुकता ज़ाहिर की है. 

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