2021 पर एक नज़र: हिंसा की आग में झुलसते देशों की मदद के लिये प्रयास

लम्बे समय से हिंसक संघर्ष में झुलस रहे सीरिया और यमन में, हिंसा इस वर्ष भी जारी रही. वहीं, म्याँमार, अफ़ग़ानिस्तान, इथियोपिया और सूडान में नए सिरे से पसरी अशान्ति व अस्थिरता के कारण, हालात गम्भीर हो गए. यूएन शान्तिरक्षा मिशनों, विशेष रूप से माली व मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में शान्तिरक्षा अभियानों को जानमाल की हानि हुई. संयुक्त राष्ट्र ने शान्ति व सुरक्षा की मौजूदा चुनौतियों के बीच, हिंसा की चपेट में आए लोगों की सुरक्षा के लिये अपने संकल्प को पुष्ट किया. 

सीरिया: भरोसे की खाई

सीरिया में हिंसक संघर्ष का एक दशक पूरा होने के दुखद पड़ाव पर, यूएन के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने कहा कि देश, संकटो की एक धीमी सूनामी से जूझ रहा है.

सीरिया में शान्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिये, अथक प्रयासों में जुटे गेयर पैडरसन ने देश में कोविड-19, भ्रष्टाचार और कुप्रबन्धन के कारण व्याप्त आर्थिक बदहाली के प्रति आगाह किया.

पूर्वोत्तर सीरिया के अल-होल शिविर में 60 हज़ार से अधिक विस्थापित लोग, कठिन हालात में रहते हैं.
© UNICEF/Delil Souleiman
पूर्वोत्तर सीरिया के अल-होल शिविर में 60 हज़ार से अधिक विस्थापित लोग, कठिन हालात में रहते हैं.

2021 के दौरान अनेक मर्तबा, उन्होंने सीरिया में मानवीय व सुरक्षा हालात की वास्तविक समीक्षा पेश की, जिसे युद्धरत पक्षों के बीच विश्वास की खाई और आम नागरिकों पर अक्सर होने वाले हमलों की नज़र से भी देखा जा सकता है. 

सीरिया में नए संविधान पर सहमति के लिये प्रयास, अक्टूबर में शुरू किये गए, मगर ये प्रयास फ़िलहाल बेनतीजा ही साबित हुए हैं. 

विशेष दूत ने मौजूदा हालात को निराशाजनक माना है, लेकिन संवैधानिक समिति के सदस्यों से अपना काम जारी रखने का आग्रह किया है.

यमन: अकाल की दस्तक

यमन में हताश लोगों ने वर्ष 2015 में हिंसक संघर्ष की शुरुआत से गम्भीर कुपोषण के उच्चतम स्तर का सामना किया.

देश की क़रीब आधी से अधिक आबादी को खाद्य क़िल्लत से जूझना पड़ रहा है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख डेविड बीज़ली ने मार्च महीने में चेतावनी जारी की थी कि लाखों लोग अकाल के कगार पर पहुँच गए हैं. 

वसन्त के मौसम में, देश में हिंसक टकराव बद से बदतर हो गया और अनेक मोर्चों पर लड़ाई के दायरे में नाटकीय ढँग से विस्तार हुआ.

संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि यमन दुनिया में सबसे ख़राब मानवीय संकट बना हुआ है.

यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के नए विशेष दूत हन्स ग्रुण्डबर्ग की नियुक्ति सितम्बर में की गई. उन्होंने माना है कि देश में शान्ति व स्थिरता क़ायम करना एक कठिन चुनौती है.

यमन में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के कारण भीषण तबाही हुई है.
UNDP Yemen
यमन में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के कारण भीषण तबाही हुई है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, लड़ाई शुरू होने के बाद से अब तक 10 हज़ार बच्चे हताहत हो चुके हैं.

क्या देश में लड़ाई के अन्त की वास्तविक उम्मीद है?

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने नवम्बर में एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अगर युद्धरत पक्ष, लड़ाई रोकने पर सहमत हो जाते हैं, तो देश में अत्यधिक निर्धनता का एक पीढ़ी के भीतर उन्मूलन किया जा सकता है. 

अफ़ग़ानिस्तान: तालेबान का वर्चस्व

अगस्त महीने में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान, अफ़ग़ानिस्तान में गहराये संकट पर केंद्रित हो गया. 

जून महीने में अधिकाँश अन्तरराष्ट्रीय सैनिकों की वापसी के बाद, तालेबान ने स्तब्धकारी तेज़ी से काबुल की ओर मार्च करते हुए, देश की सत्ता पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया. 

अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के नियंत्रण से पहले ही, देश में हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी.

मई में काबुल में लड़कियों के एक स्कूल पर बम विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई. 

इनमें अनेक स्कूली लड़कियाँ भी थीं. 

अफ़ग़ानिस्तान के कन्दहार प्रान्त में विस्थापित बच्चे.
UNOCHA/Fariba Housaini
अफ़ग़ानिस्तान के कन्दहार प्रान्त में विस्थापित बच्चे.

इसके बाद के महीने में HALO ट्रस्ट के 10 कर्मचारी, देश के उत्तरी क्षेत्र में किये गए हमले में मारे गए. यूएन सुरक्षा परिषद ने इस हमले को जघन्य व कायरतापूर्ण क़ररा दिया. 

जुलाई में जारी हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के पहले छह महीनों में, अफ़ग़ानिस्तान में मारे जाने वाली महिलाओं और बच्चों की संख्या, 2009 के बाद किसी एक साल में सबसे अधिक है.

अफ़ग़ानिस्तान में शासन व्यवस्था पर तालेबान का नियंत्रण होने के बाद, संयुक्त राष्ट्र देश में मानवीय राहत समर्थन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. 

सर्दी के मौसम के दौरान, लाखों लोगों के सामने भरपेट भोजन ना मिल पाने का संकट था. इसके मद्देनज़र, सितम्बर में राहत सामग्री लेकर आने वाली उड़ानें शुरू की गईं. 

दिसम्बर में यूएन खाद्य कार्यक्रम ने सभी देशों से राजनीति से परहेज़ बरतने और एक सम्भावित आपदा को टालने के लिये समर्थन बढ़ाने की अपील की. 

इथियोपिया में गहरी अनिश्चितता

इथियोपिया का उत्तरी टीगरे क्षेत्र, सरकारी सुरक्षा बलों और क्षेत्रीय गुट टीगरे पीपल्स लिबरेशन फ़्रण्ट के बीच लड़ाई का गढ़ बना हुआ है. 

क्षेत्र में व्याप्त अशान्ति के कारण मानवीय हालात पर चिन्ताएँ बढ़ गई हैं. 

फ़रवरी महीने में हिंसा के कारण विस्थापित होने वाले लोगों को, जीवित रहने के लिये कथित तौर पर पत्तियाँ खाकर गुज़ारा करना पड़ा.

यूएन आपदा राहत कोष (CERF), इथियोपिया के अनेक जल वंचित इलाक़ों में ज़िन्दगियाँ और आजीविकाएँ बचाने के लिये दो करोड़ डॉलर की सहायता मुहैया करा रहा है.
FAO/Michael Tewelde
यूएन आपदा राहत कोष (CERF), इथियोपिया के अनेक जल वंचित इलाक़ों में ज़िन्दगियाँ और आजीविकाएँ बचाने के लिये दो करोड़ डॉलर की सहायता मुहैया करा रहा है.

जून महीने में, यूएन खाद्य एजेंसी का अनुमान था कि क़रीब साढ़े तीन लाख लोग अकाल के कगार पर हैं.  

टीगरे में मानवाधिकार हनन के मामलों की रिपोर्टें भी लगातार सामने आई हैं, जिनमें आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार होने और राहतकर्मियों को निशाना बनाये जाने की बात कही गई. 

जून महीने में ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ नामक संगठन के तीन कर्मचारी मारे गए.

जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने टीगरे तक तत्काल, बेरोकटोक मानवीय रास्ता सुनिश्चित किये जाने और राहतकर्मियों पर घातक हमले रोके जाने की अपील की. 

इसके बावजूद, हिंसा में तेज़ी जारी है और नवम्बर महीने तक देश में आपात स्थिति लागू हो गई. 

यूएन के मानवाधिकार कार्यालय के मुताबिक़ टीगरे मूल के लोगों को राजधानी अदीस अबाबा और अन्य इलाक़ों में हिरासत में लिया गया. 

यूएन में राजनैतिक मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो ने सुरक्षा परिषद को हालात से अवगत करते हुए बताया कि देश का भविष्य अब गहरी अनिश्चितता में घिरा है, जिससे पूरे ‘हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका’ क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो रही है. 

म्याँमार: क्षेत्रीय स्थिरता के लिये एक चुनौती

म्याँमार की सेना ने फ़रवरी में, देश के शीर्ष राजनैतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों को, सैन्य तख़्तापलट के दौरान हिरासत में ले लिया, जिनमें स्टेट काउंसलर आँग सान सू ची और राष्ट्रपति विन म्यिन्त भी थे. 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस घटनाक्रम की पुरज़ोर निन्दा की.

म्याँमार में आपातकाल लागू किये जाने के बाद, विरोध की आवाज़ मुखर करने वाले प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध, व्यापक स्तर पर दमनात्मक कार्रवाई की गई, और विरोध-प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग मारे गए.

यूएन की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि, म्याँमार में हालात, क्षेत्रीय स्थिरता के लिये एक चुनौती है. 

म्याँमार के काचीन प्रान्त में एक विस्थापित बच्चा.
OCHA/P. Peron
म्याँमार के काचीन प्रान्त में एक विस्थापित बच्चा.

इसके बाद के महीनों में प्रदर्शन जारी रहे, प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा में तेज़ी आई, और संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने सैन्य नेतृत्व की कार्रवाई की निन्दा की. 

अप्रैल महीने में यूएन की एक रिपोर्ट ने दर्शाया कि सैन्य तख़्तापलट और कोविड-19 महामारी के दोहरे प्रभाव के कारण, देश में ढाई करोड़ लोगों के वर्ष 2022 में निर्धनता में रहने का जोखिम है.  

यूएन ने संकट के समाधान के लिये तत्काल अन्तरराष्ट्रीय कार्रवाई का आग्रह किया है, ताकि मौजूदा हालात को दक्षिण-पूर्व एशिया में त्रासदी बनने से रोका जा सके. 

मगर, सितम्बर तक, सैन्य नेतृत्व की पकड़ मज़बूत हो चुकी थी.

दिसम्बर में, यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने आगाह किया कि देश में मानवाधिकारों की स्थिति, अभूतपूर्व ढँग से ख़राब होती जा रही है.

माली: शान्तिरक्षा के लिये जोखिम

संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से, वर्ष 2020 में सैन्य तख़्तापलट के बाद, माली में शान्ति के लिये सहमति बनाने में मदद मिली थी.

मगर, 2021 में देश को बद से बदतर हो जाने वाले सुरक्षा संकट में धँसने से नहीं रोका जा सका. 

अफ़्रीका के सहेल क्षेत्र में स्थित माली, संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षकों के लिये, सबसे ख़तरनाक मिशनों के तौर पर देखा जाता है, और सेवाएँ प्रदान करते हुए अनेक शान्तिरक्षकों ने अपना बलिदान दिया है.

यूएन शान्तिरक्षकों पर पहला हमला 14 जनवरी को हुआ, जब चार शान्तिरक्षकों की मौत हुई और पाँच घायल हो गए. 

दो दिन बाद, एक अन्य हमले में एक और शान्तिरक्षक की मौत हो गई.  

माली के बाण्डियागारा इलाक़े में एक यूएन शान्तिरक्षक.
MINUSMA/Gema Cortes
माली के बाण्डियागारा इलाक़े में एक यूएन शान्तिरक्षक.

अगले महीने, मध्य माली के केरेना में यूएन के एकीकृत मिशन के शिविर पर हमला किया गया, जिसमें एक शान्तिरक्षक की मौत हुई और 27 अन्य घायल हो गए. 

अप्रैल महीने में यूएन में शान्तिरक्षा मामलों के प्रमुख ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि माली के सुरक्षा बलों और शान्तिरक्षकों को निरन्तर हमलों का सामना करना पड़ रहा है और जान की हानि हुई है. 

कुछ बड़े शहरों को लगातार हथियारबन्द गुटों के हमलों के ख़तरों के साये में रहना पड़ रहा है.

मृतक संख्या निरन्तर बढ़ती गई है. अक्टूबर और नवम्बर में हमलों में दो शान्तिरक्षकों की मौत हो गई, जबकि दिसम्बर में सात की मौत हुई और तीन गम्भीर रूप से घायल हुए. 

माली में अब तक 200 से अधिक शान्तिरक्षक मारे जा चुके हैं, लेकिन, देश में उनकी उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण है.

हिंसा व टकराव के कारण, क़रीब चार लाख लोगों को अपना घर छोड़कर जाने के लिये मजबूर होना पड़ा है और क़रीब 47 लाख लोग, किसी ना किसी रूप में मानवीय सहायता पर निर्भर हैं.

तनाव के अन्य हॉटस्पॉट

यूएन न्यूज़ की टीम ने इनके अलावा, हिंसा प्रभावित कई अन्य देशों में घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाये रखी.

दिसम्बर महीने में, यूएन मानवाधिकार मामलों की प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने बुर्किना फ़ासो का दौरा करते हुए, मानवाधिकारों के लिये उत्पन्न चुनौती पर क्षोभ व्यक्त किया.

कैमरून में साल भर तनाव व्याप्त रहा, देश के अंग्रेज़ी-भाषी क्षेत्र में अलगाववादी अपने अलग प्रान्त की माँग के लिये लड़ रहे हैं. 

मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में दिसम्बर 2020 के अन्तिम दिनों में राष्ट्रपति चुनाव के बाद हिंसा की एक नई लहर आई, जिसमें यूएन शान्तिरक्षकों व आम नागरिकों को निशाना बनाया गया.

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में भी आम नागरिकों पर हिंसक हमले किये गए, गाँवों, राहतकर्मियों व शान्तिरक्षकों को निशाना बनाया गया और मानवाधिकार हनन के मामले सामने आए. 

हेती में राष्ट्रपति योवानेल मोयेसी की हत्या से पहले से ही, लम्बे समय से राजनैतिक, सुरक्षा व मानवीय संकट बरक़रार है, यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सचेत किया है कि हेती अपने हालिया इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है.

इराक़ में भी घातक बम विस्फोटों की घटनाएँ हुईं और नवम्बर में देश के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-क़दीमी की एक ड्रोन हमले द्वारा हत्या किये जाने की कोशिश की गई, जिसकी यूएन मिशन ने कड़ी निन्दा की.

निजेर में वसन्त के मौसम के दौरान, आतंकी हमलों और हथियारबन्द गुटों की हिंसा में सैकड़ों आम नागरिक मारे गए, जिनमें 30 बच्चे भी थे.  

नाइजीरिया में स्कूली बच्चों को सामूहिक रूप से अगवा किये जाने की घटनाएँ बच्चों के लिये एक ख़तरा बनी रहीं. यूएन प्रमुख ने पश्चिमोत्तर इलाक़े में एक स्कूल से अगवा किये गए 30 छात्रों की बिना शर्त रिहाई की पुकार लगाई. बहुत से बच्चे अतीत में अगवा किये जाने के बाद अब भी लापता हैं. 

फ़लस्तीन और इसराइल के बीच अशान्ति मई महीने में बढ़ गई, और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े, ग़ाज़ा में 10 दिन की अवधि के दौरान 60 युवाओं की मौत हुई और 400 से अधिक घायल हुए. 11 दिनों तक रॉकेट और हवाई महलों के बाद, इसराइल और फ़लस्तीनी चरमपंथी गुट हमास में युद्धविराम पर सहमति बन गई.

सोमालिया में अनेक महीनों से चले आ रहे तनाव और हिंसा के कारण, यूएन ने बैठक का स्वागत किया, जिसके बाद अगस्त में प्रधानमंत्री और संघीय प्रान्तों के प्रमुखों के बीच एक निर्वाचन समझौते पर सहमति बनी. 

यूएन द्वारा नियुक्त एक जाँच दल ने फ़रवरी में बताया कि दक्षिण सूडान के अधिकाँश हिस्सों में लोगों को अत्यधिक हिंसा व हमलो का सामना करना पड़ रहा है. यूनीसेफ़ ने भी चेतावनी जारी की है कि देश में बच्चों को मानवीय राहत की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है.

वर्ष 2019 में पूर्व राष्ट्रपति ओमार अल बशीर के सत्ता से हटने के बाद, सूडान में सेना और राजनैतिक नेताओं के बीच, सत्ता के बँटवारे के लिये हुआ समझौता, अक्टूबर में सैन्य तख़्तापलट के बाद पटरी से उतर गया. यूएन के विशेष दूत ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि भरोसा बहाल कर पाना एक चुनौती बना हुआ है. 

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