हिंसक टकराव में विस्फोटक हथियारों से आम लोगों की रक्षा: पाँच अहम बातें

हिंसक संघर्ष के दौरान विस्फोटक हथियारों के प्रयोग के कारण हताहत होने वालों में औसतन 90 फ़ीसदी, रिहायशी इलाक़ों में रहने वाले आम नागरिक होते हैं. इन हथियारों के इस्तेमाल से शहरों, क़स्बों और गाँवों में मानव कल्याण को होने वाली क्षति से बचाव के इरादे से जताई गई राजनैतिक प्रतिबद्धता, लड़ाई में फँसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा क़दम हो सकता है.

आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों से होने वाले भयावह विनाश को सीरिया से लेकर इथियोपिया, म्याँमार और इराक़ तक, बार-बार देखा गया है. यूक्रेन से सामने आ रही तस्वीरों की बाढ़ ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. 

ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से व्यापक जनहानि के अलावा दीर्घकालिक नुक़सान भी होते हैं, आजीविकाएँ बर्बाद हो जाती हैं और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों समेत महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों को क्षति पहुँचती है.
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आबादी वाले इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बचने के लिये, देशों द्वारा संकल्प लिये जाने की अहमियत को निरन्तर रेखांकित किया है. 

इन हथियारों के प्रयोग से आम नागरिकों पर होने वाले असर और विश्व भर में देशों, संयुक्त राष्ट्र और साझीदारों द्वारा मानवीय दंश को कम करने के लक्ष्य से जारी प्रयासों की एक पड़ताल...

1. विस्फोटक हथियार क्या हैं?

विस्फोटक हथियार ऐसी प्रणालियाँ हैं  जिनमें उन आयुधों या उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका प्राथमिक विनाशकारी प्रभाव, शक्तिशाली विस्फोटन के कारण होता है.

इससे एक धमाका प्रभावित, विखण्डन क्षेत्र आकार ले लेता है. सैन्य बलों और अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा अलग-अलग प्रकार के विस्फोटक हथियार इस्तेमाल किये जाते हैं. 

यूक्रेन के बूचा में, विस्फोटक हथियारों से हुआ विध्वंस.
© UNDP/Yevhenii Zavhorodnii
यूक्रेन के बूचा में, विस्फोटक हथियारों से हुआ विध्वंस.

उदाहरणस्वरूप, परोक्ष आग्नेयास्त्र, जैसेकि तोपख़ाना, रॉकेट और मोर्टार; ताबड़तोड़ दागे जाने वाले विस्फोटक, जैसेकि मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम; ऊपर से गिराए जाने वाले और समुद्र से प्रक्षेपित किये जाने वाले बड़े बम; सतह से सतह पर वार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें; और अन्य संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी).

“विस्तृत क्षेत्र प्रभाव" वाले विस्फोटक हथियार, विस्फोटक हथियारों का ही एक प्रमुख उपवर्ग हैं. इनमें वे हथियार भी शामिल हैं जोकि एक बड़े विध्वंसकारी दायरे के लिए आयुध का इस्तेमाल करते हैं, ताबड़तोड़ दागे जाते हैं या फिर जो एक विस्तृत क्षेत्र को अपनी चपेट में लेते हैं. 

आबादी वाले केन्द्र निरन्तर सशस्त्र संघर्ष की ज़द में आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है. यह अक्सर पारम्परिक खुले रणक्षेत्रों के लिये तैयार की गई हथियार प्रणालियों को शहरी इलाक़ों में इस्तेमाल किये जाने की वजह से होता है. 

इनका दूरगामी असर होता है, जिसकी वजह से अधिक जनहानि होती है और विनाशकारी मानवीय प्रभाव नज़र आते हैं. 

2. इन हथियारों के आबादी वाले इलाक़ों में इस्तेमाल के मानवीय प्रभाव और दुष्परिणाम क्या हैं?

जब गाँवों, क़स्बों, शहरों या अन्य आबादी वाले क्षेत्रों में इन विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है तो नागरिकों को तात्कालिक और दीर्घकालीन क्षति पहुँचती है और उनके जीवन, आजीविका और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचो के लिये जोखिम पनपता है. 

तत्काल प्रभाव के अलावा, अनेक नागरिकों पर हथियारों के अप्रत्यक्ष और अक्सर दीर्घकालीन असर भी नज़र आते हैं, जोकि उन्हें लम्बे समय तक प्रभावित कर सकते हैं. बच्चे, विशेष रूप से, मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक सदमे के विभिन्न रूपों के प्रति सम्वेदनशील होते हैं.

यमन के अदन में ध्वस्त हो चुके शहर के मुख्य इलाक़े से गुज़रते बच्चे.
OCHA/Giles Clarke
यमन के अदन में ध्वस्त हो चुके शहर के मुख्य इलाक़े से गुज़रते बच्चे.

स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर बहुत असर पड़ता हैं, जिसके कारण चिकित्सा देखभाल में भी रुकावट पेश आती है. आवास और आवश्यक बुनियादी ढाँचों, जैसेकि पीने का पानी और अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र और बिजली आपूर्ति प्रणाली के भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की आशंका होती है, जिससे बीमारी फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है और स्वास्थ्य प्रणाली के लिये बोझ पैदा होता है.

स्कूलों को भीषण नुक़सान पहुँचता है, शिक्षा सुलभता बाधित होती है, जिससे बच्चों पर असर पड़ता है और अक्सर लैंगिक असमानताएँ सामने आती हैं.

आबादी वाले क्षेत्रों में इन हथियारों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विस्थापन की भी वजह बनता है, और अक्सर अनिश्चित परिस्थितियों में लोगों को लम्बी अवधि के लिये अपने घर छोड़ने को मजबूर करता है. 

असल में इन हथियारों का इस्तेमाल, युद्ध के विस्फोटक अवशेष हमेशा के लिये छोड़ जाता है जो शत्रुता समाप्त होने के लम्बे समय के बाद भी आम नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों के हताहत होने की वजह बन सकता है. 

3. संयुक्त राष्ट्र व उसके साझीदार संगठन हताहतों की संख्या को कम करने के लिये क्या क़दम उठा रहे हैं?

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश और उनके पूर्ववर्ती अधिकारियों ने वर्ष 2009 से ही, युद्धरत पक्षों से इन हथियारों के इस्तेमाल से बचने का आहवान किया है, विशेष रूप से अपने निरस्त्रीकरण एजेण्डा के माध्यम से.

इस एजेण्डा के तहत, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को एक राजनैतिक घोषणा विकसित करने में समर्थन प्रदान करने के लिये प्रतिबद्धता जताई गई है, ताकि आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों की चुनौती से निपटा जा सके. 

2019 में, अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस समिति के अध्यक्ष के साथ, यूएन प्रमुख ने युद्धरत पक्षों से ऐसी रणनीतियाँ और तौर-तरीक़े अपनाए जाने की अपील की थी, जिससे रणभूमि को आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर ले जाया जा सके और शहरी इलाक़ों में लड़ाई को कम करने के प्रयास किये जा सकें. 

सीरिया में वर्षों से जारी हिंसक संघर्ष के कारण जानमाल की भीषण हानि हुई है.
© UNICEF/Amer Al-Mohibany
सीरिया में वर्षों से जारी हिंसक संघर्ष के कारण जानमाल की भीषण हानि हुई है.

आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल के अल्पकालिक और दीर्घकालिक मानवीय प्रभाव का पूरी तरह से आलेखन करना और जनहानि विवरण एकत्र करना, उपयुक्त कार्रवाई के लिये महत्वपूर्ण है.

संयुक्त राष्ट्र, अन्तरराष्ट्रीय रैड क्रॉस समिति और दुनिया भर में ग़ैर-सरकारी संगठनों ने इस विषय में चर्चा को आगे बढ़ाने के लिये और सैन्य नीतियों व तौर-तरीक़ों में सुधार के लिये अनेक अध्ययन प्रकाशित किये हैं.

सैन्य बलों ने कुछ निश्चित प्रकार के विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बचने या उसे सीमित करने के इरादे से नीतियाँ  अपनाई हैं, ताकि आम नागरिकों की बेहतर ढंग से रक्षा की जा सके.

अफ़ग़ानिस्तान में अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल और सोमालिया में अफ़्रीकी संघ मिशन द्वारा उपयोग में लाई जा रही नीतियाँ इसका एक उदाहरण हैं. 

4. वैश्विक स्तर पर और क्या प्रयास किये जा रहे हैं?

पिछले कुछ दशकों में, सरकारों और नागरिक समाज के गठबन्धनों ने सफलतापूर्वक कई अभियान संचालित किये हैं, ताकि ऐसे नए उपायों पर सहमति बनाई जा सके, जिनके ज़रिये मानवीय क्षति को कम किया जा सके.

इनमें व्यक्तियों को हानि पहुँचाने वाली बारूदी सुरंगों पर पाबन्दी के लिये सन्धि, क्लस्टर आयुध के इस्तेमाल पर सन्धि, और स्कूलों की सुरक्षा के लिये घोषणा है. 

वर्ष 2010 से, नागरिक समाज समेत मानव कल्याण संगठनों ने आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के अन्धाधुन्ध इस्तेमाल और उसके गम्भीर मानवीय प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का नेतृत्व किया है.

लीबिया के बेनग़ाज़ी में ध्वस्त हो चुकी इमारतों के पास कुछ बच्चे.
© UNOCHA/Giles Clarke
लीबिया के बेनग़ाज़ी में ध्वस्त हो चुकी इमारतों के पास कुछ बच्चे.

आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से होने वाली मानवीय हानि से निपटने पर केन्द्रित, एक अन्तरराष्ट्रीय राजनैतिक घोषणा-पत्र विकसित करने के लिये, आयरलैण्ड के नेतृत्व में परामर्श प्रक्रिया वर्ष 2019 से जारी है.

वैश्विक महामारी के कारण आए एक अन्तराल के बाद, सभी देश अप्रैल महीने में राजनैतिक घोषणा पर वार्ता के लिये फिर से एकत्र हुए, जिसके जून में समाप्त होने की आशा है.

यूएन महासचिव ने इस प्रक्रिया के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है, और उन्होंने राजनैतिक घोषणापत्र के लिये अपने पैरोकारी प्रयास जारी रखे हैं. इस घोषणा में आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बचने के लिये एक स्पष्ट संकल्प भी सम्मिलित होगा.

5. एक राजनैतिक घोषणा से हालात में क्या बदलाव आ सकता है?

आबादी वाले इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल पर राजनैतिक घोषणा-पत्र का पारित होना, उसकी वजह से मानव कल्याण को होने वाली हानि को कम करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है.

इस घोषणा के ज़रिये यह रेखांकित किया जाएगा कि आबादी वाले क्षेत्रों में युद्ध उसी तरह से नहीं लड़ा जा सकता है जिस तरह से वह खुले रणक्षेत्रों में लड़ा जाता है.

यमन के सआदा शहर में बमबारी के कारण तबाह हुआ एक स्कूल.
© UNOCHA/Giles Clarke
यमन के सआदा शहर में बमबारी के कारण तबाह हुआ एक स्कूल.

राज्यसत्ताओं को अभियान संचालन सम्बन्धी ऐसी नीतियों के लिये प्रतिबद्धता जतानी होगी, जोकि आबादी वाले इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल ना किये जाने की प्रकल्पना (presumption) पर आधारित हों.

इससे व्यवहार में बदलाव लाना, आम लोगों की रक्षा के लिये ठोस क़दमों को बढ़ावा देना, और अन्तरराष्ट्रीय मानव कल्याण के अनुपालन को मज़बूती दे पाना सम्भव होगा.

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