स्वास्थ्य व देखभाल कार्यों में महिलाएँ अधिक, लेकिन पुरुषों की तुलना में 24% कम वेतन

संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएँ, अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम आय अर्जित करती हैं – जो कि अन्य आर्थिक क्षेत्रों की तुलना में वेतन में एक बड़ा लैंगिक अन्तर है.

‘स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में लैंगिक वेतन अन्तर: कोविड-19 के समय का एक वैश्विक विश्लेषण’ (The gender pay gap in the health and care sector: a global analysis in the time of COVID-19) नामक यह रिपोर्ट, अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रकाशित की है.

इसमें लगभग 20 प्रतिशत अंकों के लैंगिक वेतन अन्तर का आलेखन किया गया है, जिसमें तब 24 प्रतिशत अंक का उछाल आ जाता है, जब उम्र, शिक्षा और कामकाज के समय जैसे कारकों को भी ध्यान में ले लिया जाता है.

भेदभाव एक कारक

हालाँकि इस अन्तर की अधिकांश वजह अस्पष्ट है, एजेंसियों का मानना है कि शायद इसकी वजह महिलाओं के प्रति भेदभाव हो सकता है. ध्यान रहे कि महिलाएँ दुनिया भर में स्वास्थ्य और देखभाल कर्मियों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं.

रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्वास्थ्य और देखभाल में वेतन समग्र रूप से कम है, जो इस निष्कर्ष के अनुरूप है कि अक्सर महिला प्रमुख क्षेत्रों में वेतन कम दिया जाता है.

इसके अलावा, महामारी और संकट के दौरान स्वास्थ्य और देखभाल कर्मियों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद,  2019 और 2020 के बीच वेतन समानता में केवल मामूली सुधार ही हुआ है.

ILO में कामकाज की शर्तों और समानता विभाग की निदेशक मैनुएला टोमेई ने कहा, “स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र ने सामान्य तौर पर कम वेतन, विकराल लैंगिक वेतन अन्तराल और बेहद कठिन कामकाजी परिस्थितियों का सामना किया है."

"कोविड-19 महामारी ने इस स्थिति को स्पष्ट रूप से उजागर करते हुए यह दिखा दिया है कि यह क्षेत्र एवं उसके कार्यकर्ता, परिवारों, समाजों व अर्थव्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिये कितने महत्वपूर्ण हैं.”

कामकाजी माताओं की कठिनाई

रिपोर्ट में विभिन्न देशों में लैंगिक वेतन अन्तर में व्यापक भिन्नता भी पाई गई, जो यह दर्शाता है कि ये अन्तराल अपरिहार्य नहीं हैं और इस अन्तर को पाटने के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है.
 
देशों के भीतर भी, उन उच्च वेतन श्रेणियों में लैंगिक वेतन अन्तर ज़्यादा होता है, जहाँ पुरुषों का प्रतिनिधित्व अधिक होता है, जबकि महिलाओं को अधिकतर निम्न वेतन श्रेणियों में रखा जाता है.
 
स्वास्थ्य और देखभाल के क्षेत्र में काम करने वाली माताओं को भी अतिरिक्त दण्ड भुगतना पड़ता है. एक महिला के प्रजनन वर्षों के दौरान यह लैंगिक वेतन अन्तराल और बढ़ जाता है और फिर शेष कामकाजी जीवन में भी बराबर बना रहता है.

रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं के बीच पारिवारिक कर्तव्यों के समान बँटवारे से, महिलाओं को कामकाज के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं.

यह विश्लेषण उन कारकों की भी जाँच करता है जो स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में लैंगिक वेतन अन्तराल को बढ़ा रहे हैं.

सोमालिया की राजधानी मोगादीशू स्थित एक अस्पताल में एक स्वास्थ्यकर्मी, कोविड-19 वैक्सीन का टीका तैयार करते हुए.
© UNICEF/Ismail Taxta
सोमालिया की राजधानी मोगादीशू स्थित एक अस्पताल में एक स्वास्थ्यकर्मी, कोविड-19 वैक्सीन का टीका तैयार करते हुए.

सम्वाद और कार्रवाई

उम्र, शिक्षा और कामकाज के समय में अन्तर, साथ ही सार्वजनिक या निजी क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी में अन्तर, समस्या का केवल एक हिस्सा ही दिखाते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम बाज़ार में समान भूमिकाओं वाले पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम मेहनताना दिये जाने का कारण, श्रम बाज़ार के कारकों में काफ़ी हद तक स्पष्ट नहीं है.

मैनुएला टोमेई ने आशा व्यक्त की कि यह रिपोर्ट, सम्वाद और नीतिगत कार्रवाई को बढ़ावा देगी क्योंकि महामारी के बाद समावेशी, सहनसक्षम व स्थाई पुनर्बहाली, एक मज़बूत स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र के बिना सम्भव नहीं होगी.

उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य और देखभाल कर्मियों के लिये बेहतर व निष्पक्ष कामकाजी परिस्थितियों के बिना, हमें बेहतर गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य एवं देखभाल सेवाएँ नहीं मिल सकती हैं, जिनमें ज़्यादातर महिलाओं का प्रतिनिधित्व है."

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) के स्वास्थ्य कार्यबल के निदेशक जिम कैम्पबेल ने कहा कि रिपोर्ट में अनेक देशों की सफलता की कहानियाँ शामिल की गई हैं, जिनमें वेतन वृद्धि और बोनस का भुगतान करने के लिये राजनैतिक प्रतिबद्धता शामिल है, जो भविष्य का रास्ता इंगित करती हैं.

उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य और देखभाल के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है, फिर भी बहुत से देशों में प्रणालीगत पूर्वाग्रहों के परिणामस्वरूप, उन्हें हानिकारक वेतन अन्तर का सामना करना पड़ रहा है." 

उन्होंने कहा, "इस अभूतपूर्व रिपोर्ट के साक्ष्य और विश्लेषण से सरकारों, नियोक्ताओं एवं श्रमिकों को प्रभावी कार्रवाई का निर्णय लेने के लिये प्रेरित होना चाहिये."

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