सौर ऊर्जा में भारत का अनुभव – अन्य देशों के लिये प्रेरणा स्रोत

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा से उपजी सम्भावनाओं को साकार करने के पथ पर अब तक हुई प्रगति, ना केवल देश की जनता के जीवन में बदलाव की वाहक है, बल्कि इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को मज़बूती प्रदान करने और अन्य देशों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. 

कोविड-19 महामारी ने सभी देशों को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत जैसे देशों में, इसने भरोसेमन्द स्वास्थ्य देखभाल और बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित किया है ताकि ठण्डे तापमान में रखे गए जीवनरक्षक टीके वितरित किये जा सकें.

एक ऐसे समय जब देश मौसमी ताप लहर और बिजली की क़िल्लत से जूझ रहा है, इन चुनौतियों से निपटने में नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, की भूमिका पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.  

भारत के ग्रामीण समुदायों में महामारी क़हर ढा रही है, और वहाँ भरोसेमन्द बिजली आपूर्ति के ज़रिये अस्पतालों व दवाओं की सुलभता सम्भव बनाई जा सकती है. 

अक्सर यह स्थिति जीवन और मौत के बीच के अन्तर को तय करती है.

कोविड-19 महामारी से पहले ही, भारत ने सौर ऊर्जा से मिलने वाले फ़ायदों को साकार करने का संकल्प प्रदर्शित किया है. 

सौर ऊर्जा प्रयोग में वृद्धि

देश ने वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का महत्वाकाँक्षी लक्ष्य रखा है, जिससे वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकेगा. 

देश में स्थापित ऊर्जा क्षमता का 74 फ़ीसदी इस्तेमाल यही उपभोक्ता करते हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में संगठनों और नागरिक उपभोक्ता की खपत, स्थापित क्षमता की 13 प्रतिशत है. 

दिसम्बर 2020 तक, देश में 38.8 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें ज़मीन व छतों पर लगाए गए उपकरण शामिल हैं. 

सौर ऊर्जा के ज़रिये अन्य बुनियादी ढाँचों को भी बिजली प्रदान की जा रही है, जिनमें परिवहन क्षेत्र भी है. 

भारत का एक महत्वपूर्ण सौर परियोजना ‘रीवा सौर पार्क’ है जिसके ज़रिये नई दिल्ली की मेट्रो रेल प्रणाली संचालित की जाताी है. प्रतिदिन 26 लाख यात्री दिल्ली मैट्रो नैटवर्क का लाभ उठाते हैं. 

सरकार के नेतृत्व में चौबीसों घण्टे – सभी के लिये बिजली जैसे अहम कार्यक्रम भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य हर घर में हर समय बिजली उपलब्ध कराना है. इससे समुदायों को सशक्त और उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है. 

मगर अब भी 25 करोड़ भारतीय लोगों को बिजली उपलब्ध नहीं है. यही वजह है कि नवीकरणीय ऊर्जा, मौजूदा हालात को सुधारने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. 

इससे नागरिकों के साथ-साथ, जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में मदद मिलेगी और अन्य देशों के लिये सौर ऊर्जा में निवेश का मार्ग स्पष्ट होगा.  

भारत की एक अग्रणी सौर ऊर्जा परियोजना रीवा सौर पार्क है, जिसकी मदद से नई दिल्ली की मेट्रो रेल प्रणाली को ऊर्जा प्रदान की जा रही है.
Climate Investment Funds
भारत की एक अग्रणी सौर ऊर्जा परियोजना रीवा सौर पार्क है, जिसकी मदद से नई दिल्ली की मेट्रो रेल प्रणाली को ऊर्जा प्रदान की जा रही है.

सौर ऊर्जा परियोजनाओं को मूर्त रूप दे पाना आसान काम नहीं है. इसके लिये, सही नीतियाँ व नियामक फ़्रेमवर्क लागू करने, नई टैक्नॉलॉजी अपनाने में हिचकिचाहट को दूर करने, और निजी पूँजी को बढ़ावा देने के लिये छूट या जोखिम कम करने वाले प्रावधानों की ज़रूरत होती है. 

मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा पार्क स्थापित करने के लिये वित्त पोषण में छूट से लेकर सामर्थ्यकारी नीतियों को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने तक, भारत में हुई प्रगति अन्य देशों के लिये स्वच्छ ऊर्जा निवेशों को मज़बूती प्रदान करने के लिये सबक़ छिपे हुए हैं. 

छतों पर सौर ऊर्जा की सम्भावना 

छतों पर सौर ऊर्जा व सौर फ़ार्म स्थापित करने में भारत का अनुभव, नाइजीरिया के लिये अनेक सम्भावनाएँ प्रदर्शित करता है. 

नाइजीरिया एक सघन आबादी वाला अफ़्रीकी देश है, जहाँ फ़सल की पैदावार के बाद, 45 फ़ीसदी उत्पाद बर्बाद हो जाते हैं, चूँकि उसे ठण्डा रख पाना सम्भव नहीं है. 

इस वजह से नौ करोड़ से ज़्यादा लघु किसानों को 25 फ़ीसदी की आय का नुक़सान होता है. नाइजीरिया के सोकोतो में खाद्य बाज़ार में एक परियोजना का उद्देश्य, छतों पर सौर यूनिट के ज़रिये शीतलन (refrigeration) की व्यवस्था करने के विकल्प की तलाश करना है.  

अगर यह परियोजना सफल होती है तो इससे, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिये इस टैक्नॉलॉजी के इस्तेमाल का रास्ता खुल जाएगा. 

छतों पर सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित किये जाने का यह सबसे बड़ा बाज़ार है जिससे लाखों किसानों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है.  

सौर ऊर्जा के लिये बाज़ार का सृजन जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी योजना को गम्भीरता से आगे बढ़ाया है. 

लचीली स्वच्छ ऊर्जा नीलामी को बढ़ावा दिया जा रहा है, बेहद कम क़ीमत वाली सौर लागत को आकर्षित किया जा रहा है और यह स्वच्छ ऊर्जा के लिये देश के संकल्प का द्योतक है. 

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर बैठक के दौरान कहा था कि भारत, नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने के मार्ग पर है, और वर्ष 2022 से पहले 175 गीगावाट क्षमता हासिल कर ली जाएगी. 

सौर ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिये, विश्व बैंक का सौर ऊर्जा कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसकी मदद से ज़ाम्बिया जैसे देशों में ऐसी ही नीलामी प्रक्रियाओं को समर्थन प्रदान किया जाता है. इसके ज़रिये व्यावहारिक सौर ऊर्जा बाज़ारों को पनपने का अवसर दिया जाता है.

बांग्लादेश में सौर पैनलों के ज़रिये किसानों के लिये सौर ऊर्जा से सिंचाई सम्भव हुई और सौर प्रणाली के ज़रिये घरों तक बिजली पहुँचाई गई.
Photo: Dominic Chavez/World Bank
बांग्लादेश में सौर पैनलों के ज़रिये किसानों के लिये सौर ऊर्जा से सिंचाई सम्भव हुई और सौर प्रणाली के ज़रिये घरों तक बिजली पहुँचाई गई.

लुसाका के बान्गवेउलु सौर संयंत्र से 30 हज़ार घरों और व्यवसायों को बिजली की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है.

इससे जलविद्युत स्रोत से होने वाले बिजली आपूर्ति के समानान्तर क्षमता बढ़ाने और सरकार के लिये बिजली ख़रीद की क़ीमतों में कमी ला पाने में मदद मिलेगी.

मई 2021 में, सेनेगल ने इस कार्यक्रम के ज़रिये दो नए सौर संयंत्र स्थापित किये जाने की घोषणा की है, जिसकी मदद से पाँच लाख से अधिक लोगों को सब-सहारा अफ़्रीका में बेहद कम क़ीमत पर बिजली आपूर्ति की जाएगी. 

देश के पश्चिमी क्षेत्र में, काएल और काहोने में नए सौर संयंत्रों की मदद से प्रतिवर्ष 89 हज़ार टन कार्बन डाइऑक्साइड में कटौती ला पाना सम्भव होगा. 

सौर ऊर्जा सम्बन्धी ज्ञान का आदान-प्रदान

भारत के नेतृत्व वाले अन्तरराष्ट्रीय सौर सहबन्धन (International Solar Alliance) के साथ साझीदारी में, विश्व बैंक का ‘Lighthouse Initiative’ भारतीय एजेंसियों और बांग्लादेश, मालदीव व अफ़्रीका में उनके समकक्ष विभागों में सौर ऊर्जा सम्बन्धी ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है. 

उदाहरणस्वरूप, यह पहल सबसे ज़्यादा मालदीव में सक्रिय है, जोकि अरब सागर में स्थित 11 हज़ार द्वीपों वाला एक देश है. 

समुद्री तटों पर अपने बेहतरीन आरामगाहों के लिये प्रसिद्ध, मालदीव के पास जीवाश्म ईंधन के भण्डार नहीं है, मगर कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह देश कामकाज के लिये खुला है. 

इसकी एक आंशिक वजह नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में देश का आगे बढ़ना है. दिसम्बर 2020 में, विश्व बैंक ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये 10 करोड़ 70 लाख डॉलर की एक परियोजना को स्वीकृति दी है.

भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से विविधतापूर्ण होने के बावजूद, विकासशील देशों में ऊर्जा सम्बन्धी चुनौतियाँ दर्शाती है कि शुरुआती बिन्दुओं से, हर देश की विशिष्ट ज़रूरतों के हिसाब से समाधान आगे बढ़ाया जा सकता है. 

लघु द्वीपीय देशों से लेकर अफ़्रीका में उभरती अर्थव्यवस्थाओं तक, भारत के अनुभवों से मिले सबक़, महात्मा गाँधी के उस उद्धरण को प्रासंगिक बनाते हैं जिसे भारत ने 2015 के जलवायु लक्ष्यों में शामिल किया था: हमें उस दुनिया की भी परवाह करनी होगी, जो हमें नज़र नहीं आती है. 

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ. 

Share this story