सर्वजन के लिये स्वच्छ व किफ़ायती ऊर्जा - संगठित प्रयासों की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने स्वच्छ व हरित ऊर्जा भविष्य में निवेश की अहमियत पर बल देते हुए, देशों की सरकारों से अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूती प्रदान करने और समावेशी व न्यायोचित ऊर्जा सुलभता की दिशा में आगे बढ़ने के लिये समर्थन का आहवान किया है. 

विश्व में 76 करोड़ लोगों की बिजली तक पहुँच नहीं है, और ढाई अरब से अधिक लोगों के पास खाना पकाने के लिये स्वच्छ ऊर्जा समाधान नहीं है. 

यूएन प्रमुख ने शुक्रवार को ऊर्जा के मुद्दे पर आयोजित उच्चस्तरीय सम्वाद को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि इस अहम मुद्दे पर उच्चतम स्तर पर चर्चा 40 वर्ष पहले हुई थी. 

महासचिव गुटेरेश ने कि ऊर्जा उत्पादन और उसके इस्तेमाल के तौर-तरीक़े, जलवायु संकट का एक प्रमुख कारण है. 

“ऊर्जा से होने वाला उत्सर्जन, कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों का लगभग 75 फ़ीसदी है. इसलिये हमारे लिये दोहरी अनिवार्यता है – ऊर्जा निर्धनता का अन्त करना और जलवायु परिवर्तन को सीमित रखना.”

यूएन प्रमुख ने इसके समाधान के रूप में सर्वजन के लिये किफ़ायती, नवीकरणीय और टिकाऊ ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया है, जो कि 2030 एजेण्डा में सातवाँ टिकाऊ विकास लक्ष्य भी है. 

महासचिव ने कहा कि स्वच्छ व किफ़ायती ऊर्जा में निवेश से ना सिर्फ़ अरबों लोगो का जीवन-कल्याण होगा, बल्कि हरित रोज़गारों का भी सृजना होगा जिनकी कोविड-19 पुनर्बहाली में आवश्यकता है. 

उन्होंने इसे जलवायु विनाश को टालने के लिये सबसे महत्वपूर्ण समाधान क़रार दिया है.

टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिये चार प्राथमिकताएँ

पहला, वर्ष 2030 तक ऊर्जा सुलभता में व्याप्त खाई को दूर करना.

इसके लिये, बिजली आपूर्ति से वंचित लोगों की संख्या, वर्ष 2025 तक घटाकर आधी करनी होगी. साथ ही, एक अरब लोगों तक, 2025 तक खाना पकाने के लिये स्वच्छ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराना होगा. 

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुलभता में पसरी खाई को पाटने की कोई विशाल क़ीमत नहीं है. 

बिजली सुलभता के लिये वार्षिक 35 अरब डॉलर और खाना पकाने के स्वच्छ समाधानों के लिये प्रतिवर्ष 25 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी.

दूसरा, हमें कार्बन पर निर्भरता घटाने वाली ऊर्जा प्रणालियों (decarbonized energy systems) की ओर बढ़ना होगा. 

इस क्रम में, वर्ष 2030 तक सौर व पवन ऊर्जा की मौजूदा क्षमता को चार गुना बढ़ाकर क्रमश: 630 गीगावॉट और 390 गीगावॉट प्रतिवर्ष जोड़ना होगा. 

वर्ष 2021 के बाद किसी भी नए कोयला संयंत्र के निर्माण को रोकना होगा और ऊर्जा दक्षता को बेहतर बनाना होगा. 

आर्थिक सहयोग एवम् विकास संगठन (OECD) के देशों ने वर्ष 2030 तक चरणबद्ध ढँग से कोयला ऊर्जा क्षमता को इस्तेमाल से हटाने का संकल्प लिया है, जबकि उन्य देश 2040 तक यह हासिल करने का प्रयास करेंगे. 

तीसरा, वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक ऊर्जा सुलभता और 2050 तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुँचना होगा.

इसके लिये वित्तीय संसाधनों का प्रबन्ध करना और विकासशील देशों तक टैक्नॉलॉजी हस्ताण्तरण को बढ़ावा देना होगा. 

नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता में निवेश को तीन गुना बढ़ाकर पाँच हज़ार अरब डॉलर तक पहुँचाने की आवश्यकता है. 

जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल पर दी जाने वाली सब्सिडी को हटाकर नवीकरणीय ऊर्जा पर लाने, और कार्बन की क़ीमत तय करने की दरकार होगी. 

उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विकास बैन्कों द्वारा, देशों को सहायता प्रदान की जानी होगी, ताकि अर्थव्यवस्थाओं को हरित दिशा में बढ़ाया जा सके.  

चौथा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नैट शून्य उत्सर्जन भविष्य में कोई भी पीछे ना छूटने पाए और हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया न्यायसंगत और समावेशी हो.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के ज़रिये लाखों रोज़गारों का सृजन किया जा सकता है और सबसे निर्बलों के सशक्तिकरण को सुनिश्चित किया जा सकता है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि एक टिकाऊ और न्यायसंगत ऊर्जा भविष्य के निर्माण में हर देश, शहर, वित्तीय संस्था, कम्पनी और नागरिक समाज संगठन की भूमिका है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि भविष्य के लिये एक ‘ऊर्जा कॉम्पैक्ट‘ के लिये संकल्प को दर्शाया जाना होगा, जिससे अगले दशक में लक्ष्यों को हासिल करने के रोडमैप पर आगे बढ़ा जा सकता है.

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