श्रीलंका में गम्भीर हालात, मानवीय संकट टालने के लिये 'तुरन्त उपाय ज़रूरी'

श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर हैना सिन्गर-हामदी ने श्रीलंका में मौजूदा घटनाक्रम व नाज़ुक परिस्थितियों पर चिन्ता जताते हुए कहा है कि मानवीय संकट की रोकथाम के लिये तुरन्त कारगर प्रयास किये जाने होंगे. देश में यूएन की शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकता ना केवल स्थानीय आबादी की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करना है, बल्कि सकंट को और अधिक गहराने से रोकना भी है.

श्रीलंका एक बेहद गम्भीर आर्थिक व राजनैतिक संकट का सामना कर रहा है और ईंधन की क़िल्लत व खाद्य क़ीमतों में आए उछाल के विरोध में, आम लोगों ने हाल के दिनों में देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किये हैं, जिन्होंने हिंसक रूप भी धारण किया. 

इस सप्ताह, देश में सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प और फिर हिंसक प्रदर्शनों में सत्तारूढ़ पार्टी के एक सांसद सहित 8 लोगों की मौत के बाद कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया और सेना तैनात कर दी गई है. 

श्रीलंका में यूएन रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर हैना सिन्गर-हामदी ने शुक्रवार को यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में देश के वर्तमान हालात पर जानकारी दी...

यह इण्टरव्यू प्रकाशन ज़रूरतों के लिये सम्पादित किया गया है. 

यूएन न्यूज़: श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों में राजनैतिक और आर्थिक संकट गहरा हुआ है, और झड़पों व हिंसक विरोध प्रदर्शनों के समाचार मिले हैं. अभी वहाँ ज़मीनी स्थिति क्या है?

हैना सिन्गर-हामदी: गम्भीर आर्थिक संकट ने श्रीलंका में रोज़मर्रा के जीवन को संघर्षपूर्ण बना दिया है. संकट की शुरुआत से, संयुक्त राष्ट्र की प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली द्वारा, एक हज़ार से अधिक विरोध-प्रदर्शन दर्ज किये गए हैं. 

शुरू में  ये प्रदर्शन शान्तिपूर्ण थे और आम नागरिक इसका हिस्सा थे, जो सरकार बदलने का आहवान कर रहे थे. बाद में, इनमें राजनैतिक दल, ट्रेड यूनियन, छात्र संघ, पादरीगण व अन्य हितधारक समूह जुड़ गए.

फिर जैसे-जैसे गैस और ईंधन की कमी बढ़ती गई, वितरण स्थलों के आसपास विरोध और संघर्ष का एक नया रूप दिखाई देना शुरू हो गया. 

श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर, सुश्री हैना सिन्गर-हामदी.
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श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की रैज़ीडेण्ट कोऑर्डिनेटर, सुश्री हैना सिन्गर-हामदी.

और फिर, विरोध को दबाने की कोशिशों और एक हिंसक प्रदर्शन के प्रयासों ने उस हिंसा को जन्म दिया, जो आपने मीडिया में देखी है और जिसके कारण आपातकाल की घोषणा की गई.

सोमवार, स्थानीय समयानुसार दोपहर 2.30 बजे से यहाँ कर्फ़्यू लगा है, जिसे समय-समय पर हटाया भी जा रहा है, और पिछले 48 घण्टों में हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई हैं. 

हालाँकि पहले सभी ने हिंसक घटनाओं और 60 से अधिक घरों में आगज़नी को देखा है, लेकिन फ़िलहाल मामला शान्त होता दिख रहा है.

हिंसा में लगभग 8 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं. इस समय वे बहुत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं और हमारी पूरी सहानुभूति उनके और उनके परिवारों के साथ है.

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने श्रीलंका के अधिकारियों से हिंसा रोकने की अपील और संयम बरतने का आग्रह किया है. क्या आपको स्थिति बेहतर होती लग रही है? आपके अनुसार इस संकट का समाधान कब तक होने की सम्भावना  है?

हैना सिन्गर-हामदी: संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अधिकारियों से स्वतंत्र व पारदर्शी तरीक़े से उन सभी हमलों की जाँच करने का आहवान किया है जो विशेष रूप से शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुए हैं.

आगे का रास्ता खोजने और लोगों के सामने आने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने के लिये समाज के सभी दलों के साथ एक सार्थक और समावेशी सम्वाद की आवश्यकता है.

अभी उम्मीद जगी है कि एक राजनैतिक प्रक्रिया की शुरुआत हुई है ,क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ बातचीत के लिये एक सक्षम वातावरण बनाने के लिये राजनैतिक स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे आर्थिक सुधारों के लिये आगे का रास्ता तय हो सकता है.

हमें उम्मीद है कि जल्दी ही श्रीलंका, मौजूदा संकट का शान्तिपूर्ण समाधान ढूंढ लेगा, ताकि लोगों की पीड़ा कम हो सके और लोकतंत्र और मानवाधिकारों को मज़बूत करके, हिंसा की रोकथाम की जा सके. 

यूएन न्यूज़: संयुक्त राष्ट्र की इस गम्भीर स्थिति में क्या भूमिका है? श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां किस तरह निर्बल आबादी की मदद करने की दिशा में काम कर रही हैं?

हैना सिन्गर-हामदी: श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र अच्छी तरह से स्थापित है और हम श्रीलंका को आर्थिक संकट से निपटने और उससे उबरने में मदद करने के लिये कई महीनों से लगातार काम कर रहे हैं.

हमने सबसे कमज़ोर समुदायों पर इसके असर को कम करने में सहयोग देने का पूरा प्रयास किया है. स्थायी सुधार में मदद के लिये, हमारे पास अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों उपाय हैं.

हम विश्व बैंक, आईएमएफ़, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) जैसे अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि संयुक्त राष्ट्र के दृष्टिकोण को समन्वित करके, उनका समर्थन सुनिश्चित किया जा सके.

मुझे लगता है कि यह बहुत ज़रूरी है कि हम मौजूदा परिस्थितियों को मानवीय संकट में तब्दील होने से रोकें, इसलिये हमें तुरन्त कार्रवाई करनी होगी. यह एक मध्यम आय वाला देश है और हमें इसके संस्थानों को मानवीय संकट में घिरने से बचाना होगा.

संयुक्त राष्ट्र ने फ़िलहाल अपना ध्यान चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केन्द्रित किया है – सबसे पहले स्वास्थ्य. 

हम स्वास्थ्य मंत्रालय को उपलब्ध चिकित्सा आपूर्ति की बारीक़ी से निगरानी करने और दान आदि के ज़रिये, विकास भागीदारों की मदद से तत्काल आवश्यक दवा एवं चिकित्सा आपूर्ति के समन्वय में सहयोग कर रहे हैं, जिससे क़िल्लत को दूर करके, स्टॉक ख़त्म होने की स्थिति से बचा जा सके, क्योंकि देश विदेशी मुद्रा की कमी के कारण, दवा ख़रीदने में असमर्थ है.

दूसरा, खाद्य सुरक्षा. हम अच्छी कृषि पद्धतियों, नक़दी हस्तान्तरण और महत्वपूर्ण सब्ज़ियों के उत्पादन द्वारा, लक्षित आबादी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की ओर काम कर रहे हैं.

तीसरा, सामाजिक सुरक्षा. हम, साथ मिलकर, छोटी और लम्बी अवधि के लिये सामाजिक सुरक्षा उपायों पर नीतिगत समर्थन के सन्दर्भ में सरकार को प्रस्ताव पेश कर रहे हैं, जिसमें मूल रूप से यह सलाह दी गई है कि सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों, डिजिटल और मूल आमदनी के लिये किन सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये.

हम अतिरिक्त या समानान्तर प्रणाली नहीं बनाना चाहते, बल्कि पहले से मौजूद सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को उत्कृष्ट बनाने पर काम कर रहे हैं. इसमें 16 हज़ार से अधिक परिवारों के लिये अवसर, विशेष रूप से, महिलाओं के लिये रोज़गार, और तीन हज़ार 200 लोगों के लिये पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हस्तक्षेप हैं.

श्रीलंका एक शानदार पर्यटन स्थल है और हमें इस पहलू को प्रोत्साहन देने की ज़रूरत है.

चौथा, व्यापक आर्थिक नीति सलाह. संयुक्त राष्ट्र ने आईएमएफ़ और अन्य अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ अपनी चर्चा में, सरकार की मदद के लिये, व्यापक आर्थिक स्थिरीकरण एवं ऋण स्थिरता हेतु कई उपायों का एक नीति ज्ञापन पेश किया है.

श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में सुपरमार्केट में ज़रूरी खाद्य सामग्री की क़िल्लत.
© ADB/M.A. Pushpa Kumara
श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में सुपरमार्केट में ज़रूरी खाद्य सामग्री की क़िल्लत.

यूएन न्यूज़: इस समय सरकार और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के बीच समन्वय कैसा है? कमज़ोर तबके तक पहुँच और राहत कार्य के लिये तालमेल कितना मुश्किल हो रहा है?

हैना सिन्गर-हामदी: सरकार का तकनीकी खण्ड अब भी काम कर रहा है और पिछले हफ़्ते ही, कैबिनेट भंग होने से ठीक पहले, मैंने वित्त मंत्री से मुलाकात करके, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और व्यापक आर्थिक नीति सलाह जैसे मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के समर्थन पर चर्चा की थी.

साथ ही, यूएन एजेंसियों के मेरे अन्य सहयोगी अभी भी, मंत्रालय के तकनीकी ‘फ़ोकल प्वाइंट’ के साथ काम कर रहे हैं. तो काम तो जारी है.

इसके अलावा, हम सरकार के टिकाऊ विकास परिषद के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, और कर्फ़्यू से ठीक पहले, टिकाऊ विकास लक्ष्यों को शामिल करने पर चर्चा करने के लिये, यूएन मिशन यहाँ आया था.

मिशन के साथ, श्रीलंका को मौजूदा संकट से उबरने व अधिक टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनाने में मदद के उपायों पर चर्चा हुई.

मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्दी हमारे पास एक कैबिनेट होगा और हमारा काम जारी रहेगा, लेकिन तकनीकी स्तर पर, हम सभी अभी भी मिलकर काम कर रहे हैं.

यूएन न्यूज़: संकट ख़त्म होने के बाद, पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की क्या भूमिका होगी?

हैना सिन्गर-हामदी: हमारा काम न केवल आबादी की तात्कालिक ज़रूरतों को पूरा करना है बल्कि संकट गहरा होने से रोकने का भी है.

इसलिये, हमें उन प्रमुख सामाजिक संकेतकों पर हुई प्रगति की दिशा उलटने से बचाने में मदद करनी चाहिये, जिनमें श्रीलंका आगे रहा है. उदाहरण के लिये, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुँच. इसमें श्रीलंका, दक्षिण पूर्व एशिया के लिये एक आदर्श बन चुका है.

इसलिये, हमें जो कुछ भी लाभ हुआ है, उसे बचाकर रखने की आवश्यकता है. ध्यान रहे कि संकट के समय, न केवल पारम्परिक रूप से कमज़ोर वर्ग, बल्कि मध्यम या निम्न मध्यम वर्ग भी कमज़ोर समूहों के स्तर पर पहुँच जाते हैं.

इसके लिये हम सरकार के साथ भी काम कर रहे हैं. उदाहरण के लिये, खाद्य सुरक्षा क्षेत्र में, खाद्य एवं कृषि संगठन के मेरे सहयोगी, उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों का बोझ कम हो सके.

साथ ही, हम उत्कृष्ट कृषि पद्धतियों के ज़रिये उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, लक्षित आबादी तक पहुँच बनाने के लिये द्विपक्षीय दानदाताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

हम भविष्य में, श्रीलंका में एक मज़बूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली देखना चाहते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी लोग आर्थिक रूप से सहनसक्षम हों, व्यापक सामाजिक सुरक्षा दायरा व लचीलापन हो, व  सशक्तिकरण एवं लैंगिक ज़रूरतों का ख़याल रखा जाए. 

इसके साथ ही, शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने और सामाजिक एकता बनाने के लिये, युवाओं और महिला नेतृत्व पर ध्यान केन्द्रित करना भी ज़रूरी होगा.

हम सभी श्रीलंका के इतिहास के बारे में जानते हैं, इसलिये इसके मद्देनज़र हमें यह दृष्टिकोण भी बनाए रखना होगा कि हम सामाजिक एकता निर्माण को कैसे सुरक्षित ऱखें, ताकि इन सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरियों के बीच सामुदायिक स्तर पर सहन-क्षमता मज़बूत हो सके.

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र, वित्त मंत्रालय को एक समर्पित नीति और अनुसंधान की स्थापना के लिये समर्थन  देगा, जिसके तहत, जनगणना और सांख्यिकी विभाग के साथ मिलकर, मध्यम समय के नीतिगत उपायों पर ध्यान केन्द्रित करने और मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण व ऋण स्थिरता के साथ-साथ, सामाजिक आर्थिक प्रभाव मूल्याँकन एवं सर्वेक्षणों का समर्थन करने की योजना बनाई जा रही है. 

अन्तत: हम यह भी मानते हैं कि कुछ व्यापक राजनैतिक और व्यवस्थित मूल कारणों से भेदभाव को बढ़ावा मिला है एवं मानवाधिकारों को ठेस पहुँची है. इस मुद्दे पर लगातार ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है.

इसलिये हम संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास ढाँचे को तैयार करने में लगे हैं, जिसमें 2023 से 2027 के बीच, श्रीलंका को अधिक टिकाऊ व समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करने के लिये, ऐसी कई रणनीतियाँ और कार्यक्रम शामिल हैं, जिससे लोगों और पृथ्वी को लाभ पहुँचेगा.

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