शिक्षा स्थलों को हमलों से बचाने के लिये, सुरक्षा परिषद का पहला व अनोखा प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने, शुक्रवार को एक मत से, एक अनोखा प्रस्ताव पारित किया है जिसमें स्कूलों, बच्चों और शिक्षकों के ख़िलाफ़ होने वाले हमलों की तीखी निन्दा की गई है, साथ ही संघर्ष से सम्बद्ध सभी पक्षों से, शिक्षा के अधिकार की तत्काल हिफ़ाज़त किये जाने का आग्रह भी किया है.

15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद ने इससे पहले भी, स्कूलों पर हमलों की निन्दा करने वाले वक्तव्य तो जारी किये हैं, मगर शिक्षा और शान्ति व सुरक्षा के बीच सम्बन्ध पर स्पष्ट ध्यान केन्द्रित करने वाला ये, अपनी तरह का पहला प्रस्ताव है.

शिक्षा की बहुमूल्य भूमिका

सुरक्षा परिषद के सदस्य राजदूतों ने इस प्रस्ताव - 2601 (2021) में, व्यक्तियों व समाज के लिये, शिक्षा की बहुमूल्य भूमिका पर ख़ास ज़ोर दिया है. साथ ही शिक्षा स्थलों को जीवन की रक्षा करने वाले सुरक्षित स्थान भी क़रार दिया गया है.

राजदूतों ने कहा है कि सशस्त्र संघर्षों में, शिक्षा मुहैया कराना, उसकी हिफ़ाज़त करना और उसके लिये अनुकूल हालात बनाते रहना, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिये एक प्रमुख प्राथमिकता रहनी चाहिये.

सुरक्षा परिषद ने देशों से ये आग्रह भी किया है कि वो अपनी सम्बन्धित अन्तरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिये, अपने यहाँ ज़रूरी क़ानूनी ढाँचे तैयार करें. इनमें स्कूलों, बच्चों, शिक्षकों व अन्य नागरिकों के ख़िलाफ़ होने वाले हमलों को रोकने के लिये, व्यापक उपाय किया जाना भी शामिल है.

बढ़ते हमले

संघर्षों वाली परिस्थितियों में शिक्षा के मुद्दे ने, हाल के वर्षों में, सुरक्षा परिषद व वृहद संयुक्त राष्ट्र में काफ़ी ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि दुनिया भर में, स्कूलों और उनसे सम्बन्धित नागरिकों पर विनाशकारी हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों के दौरान, सशस्त्र संघर्षों में या असुरक्षा के कारण, दुनिया भर में शिक्षा सम्बन्धित ठिकानों पर हुए हमलों में, 22 हज़ार से ज़्यादा छात्र, शिक्षा और शिक्षाविद हताहत हुए हैं, या उन्हें नुक़सान पहुँचा.

सशस्त्र संघर्षों में बच्चों की स्थिति पर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव की, वर्ष 2020 और 2021 की वार्षिक रिपोर्टों में भी, स्कूलों के ख़िलाफ़ हमलों में बढ़ोत्तरी की तरफ़ ध्यान दिलाया गया है.

10 सितम्बर 2020 को, निजेर के प्रतिनिधिमण्डल ने, स्कूलों के ख़िलाफ़ हमलों के मुद्दे पर, सुरक्षा परिषद की एक खुली चर्चा का आयोजन किया था. उसमें, सदस्य देशों ने, शिक्षा के अधिकार व शान्ति और सुरक्षा में इसके योगदान की मज़बूत पुष्टि करते हुए, एक अध्यक्षीय वक्तव्य पारित किया था.

इसमें देशों से स्कूलों के विरुद्ध हमले और हमलों की धमकियाँ रोकने के लिये क़दम उठाए जाने की पुकार भी लगाई गई थी.

अपनी तरह का पहला प्रस्ताव

सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने शुक्रवार को मतदान के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए इस प्रस्ताव के पारित होने का स्वागत किया, जोकि कक्षाओं, शिक्षा प्राप्ति स्थलों और स्कूलों की हिफ़ाज़त के लिये समर्पित, अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रस्ताव है.

इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में नॉर्वे और निजेर एक प्रमुख देश थे. इन दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रस्ताव का मसौदा, सुरक्षा परिषद को, संघर्षों की स्थितियों में शिक्षा प्राप्ति में बाधा पहुँचाए जाने के बढ़ते चलन के ख़िलाफ़, अपनी आवाज़ बुलन्द करने में मदद करेगा.

नॉर्वे की प्रतिनिधि ने कहा कि वर्ष 2014 से 2019 के बीच, 93 देशों में स्कूलों, शिक्षकों या छात्रों पर हमले हुए.

निजेर के प्रतिनिधि ने कहा कि दुनिया भर में लगभग साढ़े सात करोड़ बच्चों को, संघर्षों व लड़ाई झगड़ों के कारण, अपनी शिक्षा में बाधाओं का सामना करना पड़ा है क्योंकि स्कूलों और शिक्षा प्राप्ति स्थलों पर हमलों में चिन्ताजनक रूप से बढ़ोत्तरी हुई है.

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