शस्त्र प्रतिबन्धों को सख़्ती से लागू करने के लिये दोगुने प्रयासों का आहवान

निरस्त्रीकरण मामलों के लिये उच्च प्रतिनिधि इज़ूमी नाकामित्सू ने यूएन सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया है कि हथियार प्रतिबन्धों के उल्लंघन का मौजूदा स्तर चिन्ताजनक है. इसके मद्देनज़र, उन्होंने देशों से आग्रह किया है कि ऐसी पाबन्दियों को सख़्ती से लागू किये जाने के लिये देशों को दोगुने प्रयास करने होंगे. 

अवर महासचिव नाकामित्सु ने कहा कि प्रासंगिक उपायों को लागू करने के विषय में, देशों द्वारा सुरक्षा परिषद को जानकारी दी जानी चाहिए और प्रतिबन्ध विशेषज्ञ आयोगों के साथ सहयोग व सूचना को साझा किया जाना चाहिए. 

यूएन की वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को छोटे शस्त्रों और हल्के हथियारों के ग़ैरक़ानूनी आदान-प्रदान से, यूएन शान्तिरक्षा अभियानों के सन्दर्भ में, उपजते ख़तरों से सुरक्षा परिषद को आवगत कराया.

उन्होंने कहा कि ये हथियार शान्ति व सुरक्षा हालात के कमज़ोर होने के पीछे एक बड़ा कारण हैं. 

इनकी वजह से, पहले से ही हिंसक संघर्ष की आँच में झुलस रही निर्बल आबादी के लिये परिस्थितियाँ और भी ज़्यादा गम्भीर हुई हैं. 

शान्तिरक्षा अभियानों पर असर

इज़ूमी नाकामित्सु ने सचेत किया कि जहाँ भी यूएन शान्तिरक्षक मौजूद हैं, वहाँ यह ख़तरा हिंसक संघर्ष को और भी पैना बना सकता है, हथियार प्रतिबन्धों को बेअसर बना सकता है.

साथ ही, इसकी वजह से यूएन शान्तिरक्षकों, मानवीय राहतकर्मियों और स्थानीय आबादियों के लिये जोखिम उत्पन्न होता है और शान्ति समझौतों में जटिलताएँ पेश आती हैं. 

उच्च प्रतिनिधि नाकामित्सु ने उन प्रस्तावों की बढ़ती संख्या की ओर ध्यान आकृष्ट किया, जिनमें हथियारों व युद्धक सामग्री के प्रबन्धन का ख़याल रखा गया है.  

उन्होंने कहा कि शान्ति निर्माण और उसे बनाये रखने के लिये इन हथियारों पर नियंत्रण को समर्थन देने में ये संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को इंगित करते हैं.

यूएन अधिकारी ने ऐसे शस्त्र जखीरों में निहित ख़तरों को रेखांकित किया जिनके भण्डारण की पर्याप्त देखरेख नहीं की जा रही है.

इन्हें मानवीय जोखिम बढ़ाने वाला और हथियारों को दूसरे मक़सदों के लिये इस्तेमाल में लाये जाने का ज्ञात स्रोत क़रार दिया गया है.  

उन्होंने सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे को हिंसक संघर्ष के रोकथाम उपायों के हिस्से के रूप में शामिल किये जाने का आग्रह किया है. 

बच्चे और नई टैक्नॉलॉजी

उच्च प्रतिनिधि नाकामित्सु ने सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को बताया कि बच्चे, सशस्त्र संघर्षों का बड़ा ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं. 

हथियारों की व्यापक उपलब्धता की वजह से इन हिंसक टकरावों को बल मिलता है और वे अक्सर लम्बे समय तक खिंच जाते हैं. 

इस पृष्ठभूमि में, उन्होंने सभी छोटे शस्त्र और हल्के हथियार नियंत्रण पहलों  के तहत बाल अधिकारों पर होने वाले सम्भावित असर का पूर्ण ध्यान रखते हुए आगे बढ़ने पर बल दिया है. 

इसके अलावा, यूएन की शीर्ष अधिकारी ने सुरक्षा परिषद और सदस्य देशों को इससे जुड़े नए मुद्दों से अवगत कराया है. 

उन्होंने बताया कि छोटे शस्त्रों के उत्पादन को सम्भव बनाने वाली उभरती टैक्नॉलॉजी से नियंत्रण उपायों की कारगरता के लिये नवीन चुनौतियाँ व अवसर उत्पन्न हो सकते हैं.

इस क्रम में, उन पर गम्भीरतापूर्वक विचार किये जाने का आग्रह किया गया है. 

इज़ूमी नाकामित्सु ने कहा कि कथित डार्क नेट और ऑनलाइन प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिये शस्त्रों की ख़रीद में बदलाव आ रहा है, विशेष रूप से उनके पुर्ज़ों के सम्बन्ध में. 

इसके परिणामस्वरूप, डाक और कूरियर सेवाओं के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी हुई है, और इस वजह से ऐसे मामलों का पता लगा पाना और आपराधिक जाँच कार्य और कठिन हो गया है. 

रोकथाम उपाय

उच्च प्रतिनिधि ने अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुरू की गई दो पहलों को रेखांकित किया.

पहला, छोटे शस्त्रों पर यूएन समन्वय कार्रवाई (Coordinating Action on Small Arms / CASA) के साझीदार संगठन, जो कि देशीय स्तर पर दिशानिर्देशों को विकसित कर रहे हैं.

दूसरा, जीवन रक्षा के लिये संस्था (SALIENT) जिसने इस चुनौती से निपटने के लिये अनुदानों को आवण्टित करना शुरू कर दिया है. 

यूएन अवर महासचिव ने भरोसा दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र आग्नेयास्त्र प्रोटोकॉल और शस्त्र व्यापार सन्धि (Firearms Protocol and the Arms Trade Treaty) के सार्वभौमीकरण, और छोटे शस्त्रों और अन्तरराष्ट्रीय अनुरेखण औज़ार पर कार्रवाई कार्यक्रम (Programme of Action on Small Arms and the International Tracing Instrument) को पूर्ण रूप से लागू किये जाने के लिये पैरोकारी प्रयास जारी रखेगा.

इसके समानान्तर, अफ़्रीकी संघ कमीशन के उस निर्णय को भी समर्थन दिया जाएगा, जिसमें बन्दूकों को शान्त करने के लिये व्यावहारिक क़दमों के रोडमैप की अवधि को वर्ष 2030 तक के लिये बढ़ा दिया गया है.

इस क्रम में अफ़्रीका, लातिन अमेरिका, कैरीबियाई क्षेत्र और एशिया व प्रशान्त क्षेत्र में क्षेत्रीय पहलों को भी समर्थन प्रदान किया जाएगा.  

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