वैश्विक विदेशी निवेश 2021 में पहुँचा, महामारी के पूर्व स्तर पर, मगर अनिश्चितता बरक़रार  

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment) का प्रवाह, वर्ष 2021 में वैश्विक महामारी से पूर्व के स्तर पर लौटा आया, और इसने एक हज़ार 580 अरब डॉलर के आँकड़े को छुआ है, जोकि 2020 की तुलना में 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. मगर, विश्व निवेश रिपोर्ट में 2022 के लिये सम्भावनाओं को निराशाजनक बताया गया है.

व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्ट, "International tax reforms and sustainable investment, दर्शाती है कि अनिश्चितता व जोखिम से बचने के मौजूदा माहौल में, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा विकासशील देशों को ठोस सहायता दी जानी होगी.

यूएन एजेंसी की महासचिव रेबेका ग्रीनस्पैन ने ध्यान दिलाया कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती, जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ विकास लक्ष्यों में निवेश की विशाल आवश्यकता है.

इन क्षेत्रों में मौजूदा निवेश रुझान पूरी तरह से सकारात्मक नहीं हैं.

यह महत्वपूर्ण है कि हम अभी कार्रवाई करें. वैसे तो देशों को गुज़र-बसर की क़ीमतों के संकट से उपजी चिन्ताजनक तात्कालिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, यह अहम है कि हम दीर्घकाल में निवेश कर पाने में सक्षम हों.

वर्ष 2020 के अपने निचले स्तर से शुरुआत करते हुए, पिछले साल वैश्विक एफ़डीआई में उछाल आया, जिसकी प्रमुख वजह विलयन एवं अधिग्रहण (merger and acquisition) गतिविधियों और अन्तरराष्ट्रीय परियोजना वित्त पोषण में तेज़ वृद्धि बताई गई है, चूँकि बुनियादी ढाँचों को प्रोत्साहन देने के इरादे से पैकेज पेश किये गए.

इस पुनर्बहाली का लाभ सभी क्षेत्रों को हुआ है, लेकिन प्रगति का तीन-चौथाई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था पर केन्द्रित रहा है, जहाँ एफ़डीआई प्रवाह में 134 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

विकासशील देशों की ओर विदेशी निवेश के प्रवाह में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 837 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जोकि अब तक का उच्चतम स्तर है.

इसकी एक बड़ी वजह, एशिया में मज़बूत आर्थिक प्रगति, लातिन अमेरिका व कैरीबियाई क्षेत्र में आंशिक सुधार और अफ़्रीका में हालात में बेहतरी है.

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के वैश्विक प्रवाह में विकासशील देशो का हिस्सा 50 फ़ीसदी से कुछ ही ऊपर है.

एफ़डीआई प्रवाह की दृष्टि से, वर्ष 2021 के लिये शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाएँ निम्न प्रकार से हैं: अमेरिका, चीन, हांगकांग (चीन), सिन्गापुर, कैनेडा, ब्राज़ील, भारत, दक्षिण अफ़्रीका, रूस और मैक्सिको.

क्षेत्रवार भिन्नताएँ

एशिया क्षेत्र को वैश्विक एफ़डीआई का 40 फ़ीसदी हिस्सा प्राप्त होता है, और 2021 में लगातार तीसरे साल इसमें बढ़ोत्तरी दर्ज की गई और यह अपने उच्चतम स्तर, 619 अरब डॉलर पर पहुँच गया.  

चीन में विदेशी निवेश 21 फ़ीसदी और दक्षिणपूर्व एशिया में 44 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ा, लेकिन दक्षिण एशिया में परिस्थितियाँ उलट रहीं, और इसमें 26 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 45 अरब डॉलर तक सिकुड़ गया.

अफ़्रीका में एफ़डीआई ने पिछले साल 83 अरब डॉलर के रिकॉर्ड आँकड़े को छुआ, और दक्षिणी अफ़्रीका, पूर्वी अफ़्रीका और पश्चिमी अफ़्रीका में प्रवाह में वृद्धि हुई है, मध्य अफ़्रीका में यह उसी स्तर पर रहा है, जबकि उत्तर अफ़्रीका में गिरावट दर्ज की गई.

2022 के लिये अनुमान

इस वर्ष, यूक्रेन में युद्ध की वजह से व्यवसाय और निवेश के लिये परिस्थितियों में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, और भोजन, ईंधन की ऊँची क़ीमतों व वित्त पोषण के लिये सीमित उपलब्धता के कारण, एक तिहरा संकट उत्पन्न हुआ है.

एफ़डीआई के प्रवाह के लिये जिन अन्य वजहों से कठिनाई पैदा हो रही है, उनमें नए सिरे से वैश्विक महामारी का असर, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज़ दरों में वृद्धि की सम्भावनाएँ, वित्तीय बाज़ारों में नकारात्मक माहौल, और मन्दी की आशंका है.

ऊँचे मुनाफ़ों के बावजूद, विदेशों में नई परियोजनाओं के लिये बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा निवेश, पिछले साल महामारी से पहले के स्तर की तुलना में 20 फ़ीसदी कम रहा.

रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि वर्ष 2021 में दर्ज की गई प्रगति के इस रुझान को बरक़रार रख पाना सम्भव नहीं है और 2022 में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में या तो गिरावट आने की सम्भावना है, या फिर यह पहले के स्तर तक सीमित रह सकता है.

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