वैश्विक टीकाकरण योजना व जलवायु वित्त पोषण के लिये समर्थन की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से वैश्विक टीकाकरण योजना की अगुवाई करने, और कोविड-19 से पीड़ित विकासशील देशों को कर्ज़ राहत के दायरे में लाने का आग्रह किया है. 

महासचिव गुटेरेश ने शुक्रवार को जलवायु कार्रवाई के लिये वित्तीय संसाधनों का पुख़्ता इन्तज़ाम किये जाने की भी पुकार लगाई है.

यूएन प्रमुख ने इटली के वेनिस शहर में जी-20 समूह के वित्त मंत्रियों की बैठक को एक वीडियो सन्देश के ज़रिये सम्बोधित किया. 

उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद में भरोसा बहाल करने के लिये, हमें वैक्सीनों, आर्थिक पुनर्बहाली और जलवायु वित्त पोषण के वादे को पूरा करने की ज़रूरत है.

“आपके नेतृत्व और राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ, हम यह कर सकते हैं.”

महासचिव गुटेरेश ने सचेत किया कि कोरोनावायरस अपना रूप व प्रकार बदल रहा है और वैश्विक स्तर पर टीकाकरण में पनपी खाई से एक बड़ा ख़तरा है. 

“ख़ुराकों और कोष के संकल्प स्वागतयोग्त हैं – मगर ये पर्याप्त नहीं हैं.”

“हमें इस महामारी का अन्त करने और विश्व की 70 फ़ीसदी आबादी के टीकाकरण के लिये कम से कम 11 अरब ख़ुराकों की आवश्यकता है.”

महासचिव गुटेरेश ने इस क्रम में एक वैश्विक वैक्सीन योजना की अपील को दोहराया है जिससे टीकों के उत्पादन को दो गुना करने और ‘कोवैक्स’ पहल के ज़रिये उनके न्यायसंगत वितरण में मदद मिलेगी. 

बैठक में शामिल मंत्रियों और केन्द्रीय बैन्कों के प्रमुखों से 50 अरब डॉलर के एक नए निवेश रोडमैप को समर्थन प्रदान करने का आग्रह किया गया.

इस रोडमैप की घोषणा पिछले महीने की गई थी – अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नेतृत्व में संचालित होने वाले इस रोडमैप का उद्देश्य महामारी का अन्त करना और तेज़ पुनर्बहाली को सुनिश्चित करना है.
यूएन प्रमुख के मुताबिक बड़ी संख्या में विकासशील देशों को कर्ज़ चुकाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने इन देशों के लिये योजनाओं के तहत, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ‘स्पेशल ड्राइन्ग राइट्स’ (Special Drawing Rights) का उपयोग किये जाने का आहवान किया है. यह एक प्रकार से विदेशी सम्पत्ति का रिज़र्व भण्डार है, जोकि सदस्य देशों के आधिकारिक भण्डार से अलग है. 

जलवायु कार्रवाई का आहवान

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि दुनिया वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रख पाने में संघर्ष कर रही है.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक सम्मेलन (COP26) से पहले कार्बन उत्सर्जन में कटौती लाने के लिये पुख़्ता कार्रवाई पर बल दिया है.

महासचिव ने ग्लासगो में कॉप26 सम्मेलन से पहले जी20 देशों से सदी के मध्य तक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने, और राष्ट्रीय जलवायु कार्रवाई योजनाओं में वर्ष 2010 के स्तर की तुलना में, वर्ष 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन में 45 फ़ीसदी की कटौती करने का लक्ष्य रखा है. 

साथ ही उन्होंने धनी देशों को ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक दशक पहले, जलवायु कार्रवाई के लिये 100 अरब डॉलर का इन्तज़ाम किये जाने के वादे को साकार किया जाना होगा.

इसका लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन में कटौती लाना और विकासशील देशों में अनुकूलन को बढ़ावा देना है. 

इसके समानान्तर, विकासशील देशों से जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल) के इस्तेमाल पर निर्भरता को घटाना, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है. 

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