वैश्विक चुनौतियों के समाधान से दूर है दुनिया – महासभा अध्यक्ष

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने कहा है कि दुनिया, विशाल वैश्विक चुनौतियों का समाधान ढूँढने और टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने से अभी बहुत पीछे है. 

वोल्कान बोज़किर ने यूएन महासभा के प्रमुख के तौर पर गुरूवार को न्यूयॉर्क में अपनी अन्तिम प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है. 

कोविड-19 की पृष्ठभूमि में जनरल असेम्बली के लिए यह एक असाधारण सत्र रहा है. 

यूएन महासभा के 76वें सत्र के लिये बागडोर, मालदीव के राजनयिक अब्दुल्ला शाहिद के पास होगी.

तुर्की के राजनयिक और राजनीतिज्ञ वोल्कान बोज़किर ने बताया कि वैश्विक महामारी ने अनेक अवास्तविक धारणाएँ उजागर कर दी हैं. 

उदाहरणस्वरूप, यह धारणा की कारगर कूटनीति के लिये व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क व सम्वाद महत्वपूर्ण नहीं है, या फिर यह सोच कि संयुक्त राष्ट्र इतने विशाल संकट का सामना नहीं कर सकता, या फिर यह धारणा कि देशों के भीतर और उनके बीच समानतापूर्ण परिस्थितियों का निर्माण जारी रहेगा. 

“मुझे लगता है कि ये सभी मिथक तोड़ दिये गए हैं और मज़बूती से तोड़े गए हैं. हमने जितना सोचा था, दुनिया उससे कहीं अधिक कुरूप है.”

महासभा अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें शुरुआत में ही एहसास हो गया था कि कूटनीति को वर्चुअल रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. 

“मेरे विचार में हमने काफ़ी सफलता देखी है, और यूँ तो हमें एक लम्बा रास्ता तय करना है, यूएन पिछले 17 महीनों में पहले से कहीं अधिक सजीव है.”

ऐतिहासिक 75वाँ सत्र

वैश्विक महामारी के बावजूद, महासभा ने 75वें सत्र के लिए अपना शासनादेश पूरा किया है. सत्र के दौरान 103 औपचारिक बैठकें आयोजित की गईं और 320 से ज्यादा प्रस्ताव पारित किये गए. 

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि यह एक बेहद व्यस्तता भरा सत्र साबित हुआ है. 

यूएन महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर जनरल डिबेट का समापन करते हुए. (29 सितम्बर 2020)
UN Photo/Loey Felipe
यूएन महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर जनरल डिबेट का समापन करते हुए. (29 सितम्बर 2020)

महासभा में इस दौरान 16 उच्चस्तरीय बैठकें भी हुईं, दो विशेष सत्र आयोजित किये गए और चुनावों का आयोजन हुआ, एंतोनियो गुटेरेश की महासचिव के पद पर दूसरे व अन्तिम कार्यकाल के लिये फिर से नियुक्ति हुई. 

महासभा प्रमुख ने महिलाओं के समक्ष मौजूद चुनौतियों और निर्बल, निर्धन देशों में व्याप्त कमज़ोरियों से निपटने पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया है. 

उन्होंने बताया कि इसके मद्देनज़र, दो परामर्शदाता बोर्ड स्थापित किये गए हैं. 

महासभा अध्यक्ष का मानना है इस नवजात पहल की मदद से उन वास्तविक चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना जारी रखा जाएगा, जो अक्सर यूएन की कूट शब्दावलियों में गुम हो जाती हैं. 

समीक्षा की सलाह

महासभा प्रमुख के मुताबिक़, पिछले वर्ष ने दर्शाया है कि यूएन के पास रोकथाम के जो उपकरण और ढाँचे उपलब्ध हैं उनकी तत्काल समीक्षा किये जाने की जरूरत है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र, संकटों के पीछे नहीं चलता रह सकता, बल्कि इसे रोकथाम करने वाला संगठन बनना होगा. साथ ही संकटों से निपटने के लिये शुरुआत से ही तैयारी व कार्रवाई को पूरा करने की ज़रूरत होगी.

यूएन महासभा ने पिछले वर्ष, ग़ाज़ा में संकट, म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति और सीरिया में मानवीय हालात पर बैठकों का आयोजन किया. 

यूएन महासभा अध्यक्ष ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ को भी याद किया, और कहा कि इस अवसर ने स्पष्ट किया है कि सदस्य देशों का संयुक्त राष्ट्र में विशाल भरोसा और संकल्प है.

उन्होंने कहा कि महासभा के कामकाज में सततता व गहराई लाना आवश्यक है. 

“सफलता को बैठकों की संख्या से नहीं मापा जाता, बल्कि उनकी गुणवत्ता, तौर-तरीक़ों और उनके असर से आँका जाता है.”

उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साल में 25, 30 या 40 उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा सकती हैं, मगर, अगर उनमें कम संख्या में देश शामिल हों तो क्या वो वाक़ई मददगार साबित होंगी?

उन्होंने कहा कि हमें कम संख्या में, मगर गहन बैठकों की आवश्यकता है, जो कि सीधे मुद्दों से सम्बन्धित हों और जिनमें विश्व नेताओं की शिरकत हो. 

Share this story