वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये, विकास वित्त पोषण अहम

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने ‘विकास के लिये वित्त पोषण फ़ोरम’ को सम्बोधित करते हुए कहा है कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव है, और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ते रहने के लिये तत्काल प्रयास किये जाने होंगे.

यूएन की उप प्रमुख ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश की ओर से फ़ोरम को सम्बोधित किया.

“विकास के लिये वित्त पोषण, इन समाधानों का एक अहम हिस्सा है,” मगर इस क्रम में वैश्विक प्रयास फ़िलहाल अपर्याप्त साबित हुए हैं.

उन्होंने बताया कि खाद्य, ऊर्जा और वित्त पोषण के मुद्दे पर ‘वैश्विक संकट प्रतिक्रिया समूह’ की स्थापना, उच्च स्तरीय राजनैतिक नेतृत्व सुनिश्चित करने; खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा व वित्त पोषण चुनौतियों पर पार पाने; और एक समन्वित वैश्विक जवाबी कार्रवाई को लागू करने के लिये की गई थी.  

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के प्रमुख कॉलेन विक्सेन केलापिल ने बताया कि आपस में गुंथे एक वैश्विक संकटों के कारण उपजे व्यवधानों से कोई भी देश, धनी या निर्धन, अछूता नहीं रह पाया है. 

उन्होंने सचेत किया कि 2030 एजेण्डा को अपनाये जाने के बाद, शायद पहली बार टिकाऊ विकास लक्ष्यों को विशालतम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. 

कोविड-19 ने इन रुझानों को और अधिक पैना किया है, जिससे विकास प्रयासों पर एक बड़ा असर हुआ है, और निर्धनतम व निर्बलतम सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं.

“दुनिया भर में लाखों-करोड़ों लोग निर्धनता के गर्त में गहराई तक धँस गए हैं. विषमता बढ़ रही है और विकसित व विकासशील देसों के बीच की दूरी बढ़ रही है.”

वैश्विक चिन्ताएँ

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के अध्यक्ष ने वैश्विक जलवायु पर कार्बन उत्सर्जन के प्रभावों, भूराजनैतिक संकटों के कारण शरणार्थियों के बढ़ते प्रवाह, और अति-आवश्यक सामानों के लिये वैश्विक सप्लाई चेन में गम्भीर व्यवधान बड़ी चिन्ताएँ हैं.

दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य असुरक्षा बढ़ रही है.

अर्थव्यवस्था रुझान दर्शाते हैं कि मौजूदा हालात में सबसे कम विकसित और निम्न-आय वाले देशों पर सबसे अधिक असर हुआ है.

जहाँ विकसित देशों के लिये कम क़ीमत पर उधार लेकर वैश्विक महामारी से उबर पाना सम्भव हुआ है, वहीं विकासशील देशों को ऋण अदायगी क़िस्त के अवरोध का सामना करना पड़ा है.

इस वजह से, उनके लिये बुनियादी ढाँचे, आवास, सामाजिक सेवाओं समेत अन्य क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता प्रभावित हुई है. 

बताया गया है कि बड़ी संख्या में देशों को कर्ज़ के सिलसिले में नाज़ुक हालात का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य में आर्थिक पुनर्बहाली की रफ़्तार धीमी है. 

एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2023 के अन्त तक हर पाँच में से एक देश में आर्थिक प्रगति के महामारी के पूर्व के स्तर की तुलना में कम रहने की सम्भावना है. 

इन देशों को वैक्सीन की ख़ुराक, रोग निदान व उपचार उपायों की सुलभता में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जोकि महामारी पर पूरी तरह विराम लगाने के लिये बेहद अहम हैं. 

फ़ोरम की महत्वपूर्ण भूमिका

इन जटिल चुनौतियों की पृष्ठभूमि में, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक एकजुटता और बहुपक्षवाद की अहमियत को फिर से रेखांकित किया गया है. 

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि इस फ़ोरम में लगभग हर किसी की भागीदारी है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिये इस वैश्विक प्लैटफ़ॉर्म की आवश्यकता है. 

उन्होंने कहा कि यह फ़ोरम एकजुट करती है, और इसके ज़रिये आम सहमति बनाने में मदद मिली है.

इस कठिन समय में एक महत्वाकाँक्षी परिणाम को सुनिश्चित करने का आहवान किया गया है, जिससे सदस्य देशों की एकजुटता को दर्शाया जा सके.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि तात्कालिक व समन्वित कार्रवाई के ज़रिये ही संसाधनों को संगठित या जा सकता है, जिससे लोगों को अत्यधिक निर्धनता से उबारने, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों की रोकथाम करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करना सम्भव होगा.

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