'विश्व घुमन्तू पक्षी दिवस' में प्रकाश प्रदूषण के स्याह पक्ष पर रौशनी

दुनिया भर में अनेक देशों की सरकारें, शहर, कम्पनियाँ और समुदाय, प्रवासी यानि घुमन्तु पक्षियों सहित वन्य जीवन के लिये ‘प्रकाश प्रदूषण’ नामक एक अन्य महत्वपूर्ण और बढ़ते जोखिम का सामना करने के लिये कार्रवाई कर रहे हैं.

शनिवार, 14 मई को मनाए जा रहे विश्व प्रवासी पक्षी दिवस का मुख्य ज़ोर इसी मुद्दे पर है, और इस दिवस की थीम है – “पक्षियों की ख़ातिर, रात में प्रकाश धीमा करें.”

संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरणीय सन्धि – Convention on Migratory Species of Wild Animals (CMS) के सचिवालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन के अनुसार, प्रकाश प्रदूषण बढ़ रहा है और बाहरी इलाक़ों में कृत्रिम प्रकाशमान क्षेत्रों में, वर्ष 2012 से 2016 के बीच 2.2 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है.

इस समय दुनिया भर की अनुमानतः 80 प्रतिशत से भी ज़्यादा आबादी, एक प्रकाशमान आकाश के नीचे रहती है, और ये संख्या योरोप व उत्तर अमेरिका में 99 प्रतिशत है.

प्राकृतिक ‘पैटर्न’ में उलट-फेर

सीएमएस की कार्यकारी सचिव ऐमी फ्राएन्केल का कहना है, “प्राकृतिक अन्धकार का भी उस तरह संरक्षण मूल्य है, जिस तरह से स्वच्छ जल, वायु और मिट्टी का महत्व है. वर्ष 2022 के विश्व प्रवासी पक्षी दिवस का एक प्रमुख लक्ष्य – प्रकाश प्रदूषण के मुद्दे और प्रवासी पक्षियों पर इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में पर जागरूकता बढ़ाना है.”

कृत्रिम प्रकाश, पारिस्थितिकियों के भीतर प्रकाश और अन्धकार के प्राकृतिक प्रतिरूपों में उलटफेर कर देता है, और हर साल, लाखों पक्षियों की मौत में भागीदार बनता है.

प्रकाश प्रदूषण, पक्षियों को उनके प्रवासन रुझानों, भोजन तलाश करने के व्यवहार और ध्वन्यात्मक संचार में बदलाव करने के लिये विवश कर सकता है, जिसके परिणाम भटकाव और टकराव के रूप में होते हैं.

भटकाव और मृत्यु

प्रवासी पक्षी, रात में प्रकाश की तरफ़ आकर्षित होते हैं – विशेष रूप में जब वो बादलों से नीचे के स्तर की परिस्थितियों मे होते हैं – मसलन कोहरा, बारिश और जब वो बहुत निचले स्तर पर उड़ान भरते हैं, जिससे शहरों में ख़तरों की चपेट में आते हैं.

पक्षी भटकाव का शिकार होते हैं और परिणामस्वरूप वो प्रकाशमान इलाक़ों में ही चक्कर लगाते रह सकते हैं. ऐसा करने से चूँकि उनका ऊर्जा भण्डार कम होता है, तो उनमें थकावट होने और उससे भी ज़्यादा बदतर परिस्थितियाँ उत्पन्न होने का जोखिम होता है.

एक अन्य यूएन सन्धि अफ़्रीका-योरोएशियन जलपक्षी समझौते (AEWA) के कार्यकारी सचिव जैक्वेस ट्रॉउविलीज़ का कहना है  कि बत्तख़ें, कलहंस, सैंडपाइपर्स और कुछ अन्य तरह के पक्षी, प्रकाश प्रदूषण से प्रभावित होते हैं जिससे उनमें भटकाव व टकराव उत्पन्न होते हैं जिसके गम्भीर परिणाम होते हैं. 

बहुत से समुद्री पक्षी भी ज़मीन पर मौजूद कृत्रिम प्रकाश की तरफ़ आकर्षित होते हैं जिससे वो चूहों और बिल्लियों के शिकार बन सकते हैं.

सुरक्षित आसमान, कार्रवाई की पुकार

सीएमएस के पक्ष देशों ने दो वर्ष पहले प्रकाश प्रदूषण पर दिशा-निर्देश स्वीकृत किये थे जिनमें समुद्री कछुए, समुद्री पक्षी, और प्रवासी पक्षी भी शामिल थे. 

सिफ़ारिशों में ऐसी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की पुकार लगाई गई है जिनके कारण प्रकाश प्रदूषण उत्पन्न हो सकता हो.

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस, साल में दो बार मनाया जाता है – मई और अक्टूबर में दूसरे शनिवार को. 

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