वर्ष 2020 में, यूएन व्यवस्था के ग्रीनहाउस उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी

संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था ने वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये लागू की गईं यात्रा पाबन्दियों और ज़्यादातर स्टाफ़ द्वारा अपने घरों से ही काम करने की बदौलत, वर्ष 2019 की तुलना में, लगभग 25 प्रतिशत कम, ग्रीनहाउस उत्सर्जन किया.

ये प्रमुख बिन्दु, उस रिपोर्ट में उभरकर सामने आया है जो संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरणीय पद चिन्हों पर कोविड-19 महामारी के प्रभावों के बारे में पहली बार तैयार की गई है. इस रिपोर्ट का नाम है - Greening the Blue Report 2021.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस रिपोर्ट के सन्दर्भ में कहा कि दुनिया अब भी तिहरे संकट का सामना कर रही है – जलवायु संकट, प्रकृति संकट और प्रदूषण संकट – जिनका सामना करने के लिये, हर जगह, हर किसी से, तत्काल और मज़बूत कार्रवाई की ज़रूरत है.

यूएन प्रमुख ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र, दुनिया भर में अपने अभियानों में, अपने कार्बन व पर्यावरणीय पद चिन्ह कम करने के वास्ते, उदाहरण के ज़रिये नेतृत्व करने के लिये प्रतिबद्ध है. आइये, हम एकजुट होकर, सभी के लिये, एक टिकाऊ, नैट शून्य और सहनसक्षम दुनिया प्राप्ति की ओर बढ़ें.”

कम अपशिष्ट और कार्बन

इस रिपोर्ट में, संयुक्त राष्ट्र के लगभग तीन लाख 15 हज़ार कर्मचारियों की पर्यावरणीय छाप का जायज़ा लिया गया है जो दुनिया भर में, मुख्यालयों, मैदानी क्षेत्रों व ज़मीनी अभियानों में काम करते हैं. इस रिपोर्ट में, संयुक्त राष्ट्र व्यवस्थआ की 56 इकाइयों के आँकड़े शामिल किये गए हैं.

यूएन व्यवस्था ने वर्ष 2020 में, लगभग 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन किया जिसे CO2eq कहा जाता है. यह विभिन्न ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से तापमान वृद्धि होने की सम्भावना को मापने की एक इकाई है. 

कार्बन उत्सर्जन के मुख्य कारण - कार्यालयों की इमारतें थीं जो कुल उत्सर्जन के 55 प्रतिशत हिस्से के लिये ज़िम्मेदार रहीं. उनके बाद वायु यात्राएँ 32 प्रतिशत, और 12 प्रतिशत उत्सर्जन, यात्रा के अन्य माध्यमों के ज़रिये हुआ.

यूएन व्यवस्था द्वारा किये गए कार्बन उत्सर्जन के 99 प्रतिशत हिस्से की भरपाई कर ली गई, यानि अन्य स्थानों पर उतनी ही मात्रा में, कार्बन डॉई ऑक्साइड का उत्सर्जन होने से बचाने वाले कार्यक्रमों में धन लगाया गया.

रुझान

इस रिपोर्ट में, पहली बार, वर्ष 2016 और 2020 के बीच, कार्बन रुझानों के बारे में भी जानकारी शामिल की गई है.

कुल मिलाकर, यूएन व्यवस्था में, कोविड-19 महामारी के कारण लागू किये गए बदलावों से पहले ही, कार्बन उत्सर्जन में कमी हो रही थी.

अपशिष्ट या कूड़े-कचरे के बारे में बात करें तो वर्ष 2020 में औसतन प्रति व्यक्ति 396 किलोग्राम उत्पन्न हुआ, जिसमें शान्तिरक्षा और विशेष राजनैतिक मिशन भी शामिल हैं, जहाँ स्टाफ़ पूर्णकालिक रूप में तैनात है. अगर उन्हें इस अध्ययन से निकाल दिया जाए तो ये आँकड़ा प्रति व्यक्ति 184 किलोग्राम था.

ताज़ा आँकड़े, वर्ष 2019 की तुलना में क्रमशः 61 किलोग्राम और 43 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की कमी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

वर्ष 2020 में, औसत जल खपत, संयुक्त राष्ट्र के प्रति कर्मचारी – 38 क्यूबिक मीटर (m3) थी, जोकि उससे पहले के वर्ष यानि 2019 की तुलना में, 11 क्यूबिक मीटर की कमी दर्ज की गई.

कोविड-19 का प्रभाव

कुल मिलाकर रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि यूएन स्टाफ़ को, कार्यालयों से दूरस्थ स्थानों या अपने घरों से ही काम करने के अलावा, काफ़ी कुछ काम ऐसा था जो कामकाज के स्थलों पर लोगों की मौजूदगी के ज़रिये ही अंजाम दिया जा सकता था, जिसमें टैक्नॉलॉजी और अन्य सुविधाओं की ज़मीनी ज़रूरतें पूरी करना शामिल रहा.

रिपोर्ट के अनुसार, महामारी ने संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था के पास अपने कामकाज व यात्रा करने के तरीक़ों में बदलाव करने के अवसर रेखांकित किये हैं. इनके ज़रिये, कार्बन उत्सर्जन कम करने के उन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के और ज़्यादा नज़दीक आने के अवसर भी नज़र आए हैं जो इस संगठन ने वर्ष 2030 तक हासिल करने के लिये निर्धारित किये हैं.

ये वार्षिक रिपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में, “2020 और 2030 के दशक में टिकाऊ प्रबन्धन के लिये रणनीति, चरण 1: प्रबन्धन क्षेत्र में पर्यावरणीय सततता” – (Strategy for Sustainability Management in the United Nations System 2020-2030, Phase I: Environmental Sustainability in the Area of Management) में चिन्हित किये गए प्रबन्धकीय कार्यकलापों और पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में आँकड़े उपलब्ध कराती है. 

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