रोहिंज्या शरणार्थियों की सुरक्षित व स्वैच्छिक वापसी के लिये कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थियों की सुरक्षित, इच्छानुसार और गरिमामय ढँग से म्याँमार वापसी के लिये अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण व तत्काल कार्रवाई का आहवान किया है. 

25 अगस्त 2021 को रोहिंज्या शरणार्थी संकट के चार वर्ष पूरे हो गए हैं. 

इसके मद्देनज़र, महासचिव गुटेरेश ने एक बयान जारी करके सचेत किया है कि म्याँमार में व्यवस्थागत भेदभाव, अधिकारों को छीने जाने और सामुदायिक हिंसा के बुनियादी कारणों से निपटा जाना बेहद अहम है.

“मैं तत्काल कार्रवाई की पुकार लगाता हूँ ताकि शरणार्थियों की म्याँमार में सुरक्षित, इच्छानुसार, गरिमामय और स्थाई वापसी के लिये परिस्थितियों को सृजित किया जा सके.”

ये संकट अगस्त 2017 में उस समय शुरू हुआ जब म्याँमार के उत्तरी हिस्से में कुछ सशस्त्र गुटों ने कुछ पुलिस चौकियों पर हमले किये थे.

इन सशस्त्र गुटों का सम्बन्ध कथित तौर पर रोहिंज्या समुदाय से था. उसके बाद रोहिंज्या समुदाय के ख़िलाफ़ व्यवस्थित और सुनियोजित तरीक़े से हमले किये गए.

अगले कुछ सप्ताहों के दौरान, लगभग सात लाख रोहिंज्या मुसलमान व अन्य समुदायों के लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षा की तलाश में बांग्लादेश पहुँच गए.

इतने बड़े पैमाने पर रोहिंज्या लोगों के म्याँमार से भागकर बांग्लादेश पहुँचने से पहले भी वहाँ लगभग दो लाख रोहिंज्या शरणार्थी रह रहे थे जो म्याँमार से विस्थापित हुए थे.

कठिनाई भरा जीवन

यूएन प्रमुख ने बुधवार को जारी अपने वक्तव्य में क्षोभ जताया कि आज भी लगभग 10 लाख रोहिंज्या शरणार्थी विकट हालात में रहने के लिये मजबूर हैं.    

इन शरणार्थी शिविरों में रोज़मर्रा का जीवन कठिन है और अक्सर यहाँ के निवासियों को भारी बारिश के कारण जलभराव, भूस्खलन के अलावा आग लगने की घटनाओं का सामना भी करना पड़ता है.

उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से रोहिंज्या समुदाय, बांग्लादेश सरकार व मेज़बान आबादी के साथ एकजुटता जारी रखने का आहवान किया है, जो कि उदारता का भाव दर्शाते हुए रोहिंज्या शरणार्थियों की मेज़बानी कर रहे हैं.

यूएन महासचिव ने भरोसा दिलाया है कि संयकुत राष्ट्र सक्रिय रूप से समर्थन जारी रखने के लिये प्रतिबद्ध है. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि रोहिंज्या की व्यथा को एक भुला दिया गया संकट नहीं बनने दिया जाएगा.

बताया गया है कि कॉक्सेस बाज़ार ज़िले के कुटुपलाँग महाशिविर में, लगभग 26 छोटे शिविर हैं, जहाँ सात लाख से ज़्यादा शरणार्थी शरण लिये हुए हैं.

फ़रवरी 2021 के आँकड़ों के अनुसार, कॉक्सेस बाज़ार में,कुल 8 लाख 80 हज़ार रोहिंज्या शरणार्थी ठहरे हुए हैं. 

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