यूनीसेफ़: पश्चिम व मध्य अफ्रीका में बच्चों पर हमले व उनका अपरहरण रोके जाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ की अध्यक्षा हैनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि पश्चिम और मध्य अफ्रीका क्षेत्र के कुछ इलाक़ों में बच्चों पर होने वाले हमलों और छात्रों सहित बच्चों का अपहरण किये जाने जैसी चिन्ताजनक गतिविधियाँ रोकने के लिये तत्काल कार्रवाई करने की ज़रूरत है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हैनरिएटा फ़ोर ने बुधवार को एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि ऐसा नज़र आ रहा है कि इन घटनाओं की दर बढ़ रही है जिनके कारण उस क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा और बेहतरी के लिये डर बढ़ गया है.

यूनीसेफ़ अध्यक्षा का ये वक्तव्य, नाईजीरिया के कडूना प्रान्त में, सोमवार को एक रिहायशी स्कूल के 140 बच्चों का अपहरण किये जाने की ख़बरों के बाद आया है.

और ज़्यादा हिंसा का भय

हैनरिएटा फ़ोर ने कहा है, “हम इस बात पर चिन्तित हैं और जैसा अतीत में होता देखा गया है कि बुर्किना फ़ासो, कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, निजेर और नाईजीरिया में संघर्षों में सक्रिय ग़ैर-सरकारी सशस्त्र समूह व दल, आगामी कुछ सप्ताहों के बाद बारिश का मौसम शुरू होने से पहले, इस तरह की अपनी हिंसक गतिविधियाँ बढ़ाएंगे, क्योंकि बारिश के दौरान बाढ़ के कारण उनका आवागमन सीमित हो जाता है.”

“बच्चों की सुरक्षा के लिये घातक इस संकट को ख़त्म करने के लिये सभी सम्भव प्रयास किये जाने होंगे क्योंकि ये क्षेत्र तबाही के कगार पर खड़ा है.”

उन्होंने बताया कि बुर्किना फ़ासो में हाल के सप्ताहों के दौरान आम आबादी पर हमलों के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत अन्य तरह के उल्लंघन के मामलों में उल्लेखनीय तेज़ी आई है.

यघा प्रान्त में सोमवार को हुए एक हमले में कम से कम 130 लोग मारे गए जोकि देश में वर्ष 2015 में हिंसा भड़कने के बाद से अपने आप में अकेला इतना घातक हमला था. 

इसके अतिरिक्त जुलाई महीने में अभी तक 178 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें बच्चे भी हैं, जबकि हिंसा ने लगभग 12 लाख लोग विस्थापित कर दिये हैं. विस्थापितों की संख्या में, पिछले तीन वर्षों के दौरान दस गुना वृद्धि हुई है.

केवल निन्दा करना पर्याप्त नहीं

यूनीसेफ़ प्रमुख ने हाल के महीनों के दौरान क्षेत्र में हुए हमलों, अपहरण और मानवाधिकार हनन के अन्य मामलों के उदाहरण भी पेश किये हैं जिनमें बच्चे प्रभावित हुए हैं.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन अपराधों की निन्दा कर देना भर पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई किये जाने की ज़रूरत है ताकि बच्चे सुरक्षा के साथ जीवन जी सकें.

हैनरिएटा फ़ोर ने कहा, “ये उन ग़ैर-सरकारी सशस्त्र गुटों और दलों के साथ शुरू होता है जो बच्चों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं – उनकी ये नैतिक और क़ानूनी ज़िम्मेदारी है कि वो आम लोगों के ख़िलाफ़ हमले तत्काल बन्द करें, और किसी भी तरह के सैन्य अभियानों के दौरान आम आबादी और नागरिक ठिकानों व चीज़ों की संरक्षा के साथ-साथ उनका सम्मान किया जाए.”

“साथ ही इन गुटों को, क्षेत्र में ज़मीनी स्तर पर कमज़ोर हालात वाले बच्चों तक सहायता पहुँचाने के लिये काम कर रहे यूनीसेफ़ और मानवीय सहायता संगठनों के रास्ते में बाधाएँ खड़ी करने के बजाय, उनके काम को आसान बनाने में मदद करनी चाहिये.”

यूनीसेफ़ प्रमुख ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है जिसमें मानवीय सहायता संगठनों के लिये धन सहायता बढ़ाना शामिल है ताकि ये सहायता संगठन अपना कार्य दायरा बढ़ा सकें और कमज़ोर हालात वाले बच्चों को ज़्यादा सुरक्षित रखा जा सके.

इन सहायता अभियानों में उन इलाक़ो में ऐसा सुरक्षित अस्थाई शिक्षा वातावरण तैयार करना शामिल है जहाँ असुरक्षा के कारण स्कूल बन्द हो गए हैं. हिंसा से प्रभावित बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहायता मुहैया कराने के साथ-साथ, बारूदी सुरंगों के ख़तरों के बारे में मददगार जानकारी भी मुहैया कराई जाए.

Share this story