यूक्रेन: नोबेल पदक की नीलामी से प्राप्त 10.35 करोड़ डॉलर दान करने के लिये यूनीसेफ़ 'उत्कृष्ट' विकल्प

बाल शरणार्थियों की ख़ातिर धन जुटाने के वास्ते, अपना नोबेल पदक नीलाम करने वाले - पत्रकार दिमित्री मुरातोफ़ ने यूएन न्यूज़ से कहा है कि 10 करोड़ 35 लाख डॉलर की रिकॉर्ड बिक्री ने साबित कर दिया है कि "कभी-कभी मानवता एक साथ आ सकती है, और एकजुटता दिखा सकती है".

स्वतंत्र रूसी समाचार सेवा - नोवाया गज़ेटा के प्रधान सम्पादक दिमित्री मुरातोफ़ ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने यह रक़म दान करने के लिये संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - यूनीसेफ़ को इसीलिये चुना, क्योंकि यह एक सर्वश्रेष्ट ग़ैर-सरकारी संगठन है जो यह सुनिश्चित करेगा कि ये धनराशि, सभी यूक्रेनी बच्चों तक पहुँचे.

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद रूस ने मार्च में, पत्रकारों पर लगाए नए प्रतिबन्धों के तहत, इस समाचार सेवा को बन्द कर दिया था.

‘हमें इसकी ही आवश्यकता है’

दिमित्री मुरातोफ़ ने नोबेल पदक की नीलामी के बाद मंगलवार को एक विशेष साक्षात्कार में, यूएन न्यूज़ की रूसी सेवा को बताया, "यूनीसेफ़ बिल्कुल विष मुक्त है”, "उनके पास उत्तम पेशेवर लोग हैं, योजनाएँ हैं और जिस तरह वो बताते हैं कि वे क्या और कैसे करते हैं - यही हमें चाहिये.

“हमने उन्हें एक पत्र लिखा और मेरे पास उनका जवाब आया. मेरे लिये यह अहम था कि यूनीसेफ़ ने ये रेखांकित किया कि ये धनराशि यूक्रेन के सीमावर्ती सभी देशों में जाएगी जहाँ शरणार्थी हैं - बिना किसी अपवाद के.”

उन्होंने कहा कि वो आशा करते हैं कि यूक्रेन के बच्चे जो अब रूस में हैं, उन्हें भी लाभ होगा: "रूस में 15 लाख से अधिक शरणार्थी हैं या सम्भवत: थोड़े कम. इसलिये हमने यूनीसेफ़ को चुना जिसके पास ऐसे मौक़े हैं, और वे अच्छी तरह समझते हैं कि इस क़वायद का कोई राजनैतिक नहीं, बल्कि मानवीय मिशन है.”

उत्पीड़न और मौत की धमकियों के बीच, स्वतंत्र अभिव्यक्ति और निडर रिपोर्टिंग जैसी सेवाओं के लिये रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोफ़ को अक्टूबर 2021 में फिलीपीन्स की पत्रकार मारिया रेसा के साथ नोबेल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था.

उन्होंने कहा कि उन्हें किसी असम्भव सपने में भी ये उम्मीद नहीं की थी कि ये पुरस्कार इतनी बड़ी राशि लाएगा. उन्हें अधिक से अधिक ये उम्मीद थी कि नीलामी राशि 50 लाख डॉलर तक पहुँच सकती है.

रूसी पत्रकार और सम्पादक दिमित्री मुरातोफ़ - 2021 के नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता.
Novaya Gazeta
रूसी पत्रकार और सम्पादक दिमित्री मुरातोफ़ - 2021 के नोबेल शान्ति पुरस्कार विजेता.

'पृष्ठभूमि की जाँच - पड़ताल'

दिमित्री मुरातोफ़ ने कहा कि नीलामी करने वालों ने, यूनीसेफ़ की गुज़ारिश पर, इस नीलामी के लिये सभी बोली लगाने वालों  की पृष्ठभूमि की जाँच की, जिनमें अन्तिम विजेता बोली भी शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धन का स्रोत दमनात्मक तरीक़ों से ना जुड़ा हो, या मानव व ड्रग्स तस्करी जैसे किसी अवैध आपराधिक ऑपरेशन से जुड़ा न हो.

उन्होंने यूएन न्यूज़ को बताया, "उन्होंने बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से जाँच की, और मैं 100 प्रतिशत कह सकता हूँ, इसके बारे में मुझे भी सूचित किया गया, ख़बर दी गई और दिखाया गया कि यह बिल्कुल पारदर्शी है और पारदर्शी धन है"

हालाँकि उन्होंने कहा कि वह विजेता बोली लगाने वाले की पहचान को ज़ाहिर नहीं करेंगे, उन्होंने साथ ही ये संकेत भी दिया कि वो विजेता बोली लगाने वाली हस्ती का नाम नहीं जानते, और इस प्रक्रिया में उनका नाम गुप्त रखने की गारण्टी दी गई है.

"अगर मुझे मालूम भी होता, तो मैं उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं करता, क्योंकि यह हितों का टकराव शामिल है: लोग हमारे सुझाए नियमों के लिये सहमत हुए, और फिर हम ही उनका का उल्लंघन करें, यह अनुचित होगा.”

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से शुरू हुए युद्ध की चपेट में आए अनेक लोगों में से एक परिवार ये भी है जो एक रेलवे स्टेशन पर हुए मिसाइल हमले की चपेट में आ गए.
© UNICEF/Lviv Territorial Medical Union Hospital
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से शुरू हुए युद्ध की चपेट में आए अनेक लोगों में से एक परिवार ये भी है जो एक रेलवे स्टेशन पर हुए मिसाइल हमले की चपेट में आ गए.

‘यह मेरे देश की भूल है'

उन्होंने इस बारे में अनेक कारण गिनाए कि उनका प्रकाशन कल्पना भी नहीं कर सकता था कि नीलामी की बोली लगाने वाले किसी रूसी व्यक्ति को इस दौड़ में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए, या उन्होंने क्यों सोचा कि उनका प्रकाशन सीधे यूक्रेन सरकार को धन नहीं सौंपेगा!

उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए, ऐसा करना समझदारी नहीं होती.

अगर पहले यूक्रेन के लोगों में ग़ुस्सा था, तो अब वो आग- बबूला हो गए हैं - उनका देश पूरी तरह से बिखर रहा है, पृथ्वी की सतह से... जब आप ऐसा हर क्षण देखते हैं, तो आपको लगातार एक घण्टी सुनाई देती है, आप एक अपार्टमेण्ट (घर) और बम आश्रय के दरम्यान रहते हैं... यह मेरे देश की भूल है."

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