यूएन महासभा का 76वाँ सत्र, पाँच प्रमुख बातें जो चर्चा में रहेंगी

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 76वाँ सत्र, 14 सितम्बर को शुरू हो गया है, और यह 2020 के पूर्ण वर्चुअल सत्र से बहुत अलग होगा. यूएन महासभा के 76वें सत्र पर भी कोविड-19 की परछाई तो रहेगी, लेकिन यह देशों के नेताओं को (कुछ को व्यक्तिगत रूप से) सामने नज़र आ रही वैश्विक चुनौतियों को सम्बोधित करने से नहीं रोक पाएगी. यहाँ प्रस्तुत हैं ऐसे पाँच तथ्य, जो आपको 2021 की "हाइब्रिड" महासभा के बारे में जानकारी के लिये महत्वपूर्ण होंगे.

1) महासभा में व्यक्तिगत उपस्थिति 

इस साल के संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र (यूएनजीए 76) का प्रारूप दुनिया की वर्तमान स्थिति का ही प्रतिबिम्ब है: जहाँ कुछ लोग व्यक्तिगत बैठकों में धीरे-धीरे वापस शामिल होने लगे हैं, तो कुछ अन्य लोग अभी भी ऑनलाइन बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं. इससे कुछ हद तक सामान्य हालात में लौटने की इच्छा तो नज़र आती ही है,  लेकिन यह भी स्पष्ट होता है कि कोविड-19 महामारी अभी ख़त्म नहीं हुई है.

पिछले साल की वर्चुअल महासभा के बाद, इस साल के ‘जनरल डिबेट’ में भाग लेने के लिये कई राष्ट्राध्यक्ष न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय आएंगे, जबकि अधिकतर प्रतिनिधि वीडियो के माध्यम से, अपने देशों से ही सन्देश प्रसारित करेंगे.

राष्ट्राध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के लिये महासभा के सबसे मूल्यवान पहलुओं में से एक है - अपने समकक्षों के साथ अनौपचारिक, रूबरू बैठकें और मुलाक़ातें करने का अवसर.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे विकासशील देशों के लिये कोविड-19 टीकों की आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है.
© UNICEF/Zoe Mangwinda
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे विकासशील देशों के लिये कोविड-19 टीकों की आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है.

इस अवसर से वो पिछले साल वंचित रह गए थे, इसलिये इस बार "द्विपक्षीय बातचीत के लिये निजी बूथ" स्थापित किये गए हैं.

हालाँकि यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि कौन से सरकारी नेता व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे, लेकिन आप यूएन न्यूज़ की वेबसाइट पर ‘जनरल डिबेट’ पर हमारी कवरेज देख सकते हैं. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र वेब टीवी पर भी महासभा की कार्यवाही लाइव देखी जा सकती है.

2) एक के-पॉप क्षण, और एक वैक्सीन बूस्टर

पिछली बार, के-पॉप बैण्ड, बीटीएस ने यूनीसेफ़ अभियान शुरू करने के लिये, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का दौरा किया था.

कोविड-19 टीकाकरण पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मंत्र है "कोई भी सुरक्षित नहीं है, जब तक कि सभी सुरक्षित न हों":

दूसरे शब्दों में, जहाँ धनी देश अपने अधिकांश नागरिकों को टीका लगाने में काफ़ी प्रगति कर रहे हैं, वहीं उन्हें यह भी  सुनिश्चित करना होगा कि निर्धन देशों के लोगों को भी यह सुरक्षा टीका उपलब्ध हो. 

हालाँकि, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख, डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस के अनुसार, ऐसा हो नहीं रहा है.

डॉक्टर टैड्रॉस, 20 सितम्बर को, दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों के लिये स्थाई समाधान खोजने हेतु संयुक्त राष्ट्र की पहल – ‘कार्रवाई दशक’ के "एसडीजी मोमेंट" के हिस्से के रूप में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के प्रमुख, एख़िम श्टाइनर और अफ़्रीका के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (ईसीए) की वेरा सोंगवे के साथ, दुनिया भर में, टीकाकरण की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करेंगे. 

क्या बीटीएस इण्टरनेट पर फिर से छा जाएगा? 

पूरे दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में कोरियाई सुपरस्टार और यूएन के मित्र, बीटीएस भी अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे.
सात लोगों का ‘के-पॉप समूह’, बदमाशी (bullying) को समाप्त करने और आत्म-सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिये, 2017 से ‘लव माईसेल्फ़’ अभियान पर यूनीसेफ़ के साथ साझेदारी कर रहा है.

20 सितम्बर का दिन क़रीब आने से संयुक्त राष्ट्र की आईटी टीम के भी निस्सन्देह बहुत व्यस्त होने की उम्मीद है. पिछली बार 2018 में महासभा में शिरकत के दौरान, बीटीएस ने विशाल इण्टरनेट व्यस्तता आकर्षित की थी, और जब उनका वीडियो सन्देश पिछले साल की वर्चुअल महासभा में जारी किया गया, तो उसकी लोकप्रियता ने तो इण्टरनेट, मानो जाम ही कर दिया था. 
 
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे विकासशील देशों के लिये कोविड-19 टीकों की आपूर्ति बढ़ाने की आवश्यकता है.

3) बदलाव की चाहत: नई खाद्य प्रणाली की तैयारी 

वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र में खाद्य प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता पर एक नया उत्साह देखा गया, जिसमें हम तक भोजन पहुँचने की प्रक्रिया में, फ़सलों से लेकर माँस तक, सभी कुछ परिभाषित किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश के, 23 सितम्बर को पहला संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन आयोजित करने के फ़ैसले से, इस नए प्रयास को बल मिला है. 

अनेक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान वैश्विक खाद्य प्रणाली हमारे ग्रह और वैश्विक आबादी को सक्रिय रूप से हानि पहुँचा रही है. महासचिव ने शिखर सम्मेलन की घोषणा करते हुए कहा कि खाद्य प्रणालियाँ उन "मुख्य कारणों में से एक हैं, जिनकी वजह से हम अपने ग्रह की पारिस्थितिक सीमाओं का पालन करने में विफल रहे हैं."

खाद्य प्रणालियाँ वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों का लगभग एक तिहाई उत्सर्जन करती हैं; वनों की कटाई का कारण बनती हैं और लगभग 80 प्रतिशत जैव विविधता के नुक़सान की वजह हैं.

हैरानी की बात तो यह है कि पर्यावरणीय विनाश के अलावा, प्रत्येक वर्ष उत्पादित सभी खाद्य पदार्थों का लगभग एक तिहाई हिस्सा या तो खो जाता है, या बर्बाद हो जाता है.

ऐसे में, शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है, भूख, जलवायु परिवर्तन, निर्धनता और असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये, रणनीति विकसित करना; और नई खाद्य प्रणालियाँ बनाना जो सभी लोगों को लाभ पहुँचाएँ, व ग्रह की रक्षा करने में सक्षम हो.

4) 'ख़तरा बढ़ाने वाले' तूफ़ान का सामना: जलवायु और सुरक्षा

सेशेल्स में, तूफ़ान के कारण आने वाली बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय सुरक्षा में सुधार के प्रयास किए जाते हैं.

सेशेल्स में, तूफ़ान के कारण आने वाली बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय सुरक्षा में सुधार के प्रयास किए जाते हैं.
NOOR/Kadir van Lohuizen
सेशेल्स में, तूफ़ान के कारण आने वाली बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय सुरक्षा में सुधार के प्रयास किए जाते हैं.

जलवायु संकट को अब एक ऐसे मुद्दे के रूप में पहचाना जाने लगा है जो न केवल एक पर्यावरणीय समस्या है, बल्कि एक ऐसा अस्तित्वगत संकट है जो हम सभी को प्रभावित करता है: संयुक्त राष्ट्र ने जलवायु परिवर्तन को "ख़तरे के गुणक" के रूप में वर्णित किया है, जो आर्थिक, सामाजिक और हर देश की राजनैतिक व्यवस्था पर तनाव बढ़ा रहा है.

उदाहरण के लिये, उत्तरी अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सूखा संघर्ष में जलवायु परिवर्तन एक अहम कारक है, जिसके कारण, भूख और सीमित आजीविका अवसरों का सामना कर रही आबादी को विस्थापित होने पर मजबूर होना पड़ा है. अध्ययनों ने जलवायु परिवर्तन को सूडान गृहयुद्ध और हाल की कुछ अन्य घटनाओं से भी जोड़ा है,जिनमें प्रमुख हैं - इथियोपिया के उत्तरी क्षेत्र टीगरे में युद्ध और लेक चाड बेसिन में सशस्त्र संघर्ष की वृद्धि, जो कई देशों का साझा जल स्रोत है, व 1960 के बाद से लगभग 90 प्रतिशत सिकुड़ गया है.

5) नैट-ज़ीरो का खेल: स्वच्छ, विश्वसनीय ऊर्जा

वैसे तो, ऊर्जा सम्बन्धित प्रश्न जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों के केन्द्र में हैं, इसलिये यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के तत्वावधान में, ऊर्जा पर अन्तिम वैश्विक सभा 40 साल पहले हुई थी. इसलिये, अब समय आ गया है कि इस पर नई बैठक हो. 

24 सितम्बर को ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता, एक ऐसी दुनिया के बीच हो रही है, जिसका नज़रिया, 1980 के दशक की तुलना में, जीवाश्म ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग पर बहुत अलग है.

सभी के लिये सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच, टिकाऊ विकास लक्ष्यों में से एक है, जो सतत विकास के स्वच्छ, बेहतर भविष्य के 2030 एजेण्डा हेतु संयुक्त राष्ट्र का ख़ाका पेश करते हैं.

इस चर्चा में एक और चुनौती यह होगी कि 2050 तक जलवायु परिवर्तन के संचालक, हानिकारक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नैट ज़ीरो तक कैसे लाया जाए.

यह एक बड़ा कार्य है, जिसके लिये अभी से महत्वाकांक्षी कार्रवाई शुरू करने की आवश्यकता है. यही कारण है कि राष्ट्रों, क्षेत्रों, व्यवसायों, गैर सरकारी संगठनों वर अन्य लोगों को "एनर्जी कॉम्पेक्ट्स" प्रस्तुत करने के लिये कहा जाएगा, जिसमें उन्हें स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं और अपनी ठोस योजनाओं की जानकारी देते हुए यह बताना होगा कि वे इसे कैसे कार्यान्वित करेंगे.

कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के योगदान की जानकारी के लिये यूएन न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगातार आते रहें.

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