यूएन प्रमुख की अपील, मुसीबत की इस घड़ी में, अफ़ग़ान लोगों की मदद करें

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को कहा है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को, अफ़ग़ानिस्तान में, ऐसे लाखों लोगों को तत्काल जीवन रक्षक सहायता मुहैया करानी होगी, जो अपने जीवन के शायद सबसे मुसीबत वाले दौर का सामना कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में लगभग एक करोड़ 10 लाख लोगों की तत्काल मदद करने के वास्ते, क़रीब 60 करोड़ 60 लाख डॉलर की रक़म जुटाने की एक त्वरित अपील, सोमवार, 13 सितम्बर को, जिनीवा में जारी की गई है.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने इस अपील सम्मेलन का नेतृत्व करते हुए कहा कि अगस्त में, सत्ता पर तालेबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद फैली अनिश्चितता से पहले भी, देश में लाखों लोग एक ऐसे संकट की चपेट में थे, जिसकी गिनती, दुनिया भर में भीषण संकटों में हो रही है.

उन्होंने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को, जीवन रक्षक मदद की आवश्यकता है. दशकों से जारी रहे युद्ध, मुसीबतों और असुरक्षा के हालात के कारण, वो शायद अपनी ज़िन्दगियों का सबसे भीषण दौर देख रहे हैं.”

उन्होंने कहा, “इस समय, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़ा होना होगा.”

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि लोगों की ज़रूरतों में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रहा है, मगर उन्होंने मानवीय सहायता एजेंसियों द्वारा लोगों तक मदद पहुँचाने में आ रही बाधाओं पर चिन्ता भी व्यक्त की.

उन्होंने कहा कि देश के नए शासकों ने अफ़ग़ानिस्तान में ज़रूरतमन्द लोगों तक सहायता पहुँचाने में, सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

“हमारे स्टाफ़ और तमाम सहायता कर्मियों को, उनका महत्वपूर्ण कार्य, सुरक्षा के माहौल में, और किसी डर, परेशानी और उत्पीड़न के बिना, करने का मौक़ा मिलना चाहिये.”

यूएन प्रमुख ने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी को ये नहीं मालूम है कि उन्हें अगले वक़्त की भोजन ख़ुराक मिलेगी या नहीं और मिलेगी तो कहाँ से.

उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों के पास मौजूद खाद्य सामग्री भण्डार, अक्टूबर के अन्त तक ख़त्म हो जाने का अन्देशा है, और सर्दियों का मौसम भी बहुत नज़दीक है.

अधिकारों पर चिन्ता ज़ाहिर

अफ़ग़ानिस्तान की मदद के वास्ते ये त्वरित सहायता अपील, खाद्य सामग्री, जीवन रक्षक कार्यक्रमों और मातृत्व स्वास्थ्य सहित ज़रूरी स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिये रक़म जुटाने की ख़ातिर जारी की गई है. 

ये सहायता अपील जारी करते समय, ऐसी चिन्ताओं की पृष्ठभूमि को भी रेखांकित किया गया है कि अफ़ग़ानिस्तान के नए शासकों से, महिलाधिकारों के लिये गम्भीर ख़तरा पैदा हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने जिनीवा में, सोमवार को मानवाधिकार परिषद में बोलते हुए, अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय और आर्थिक संकटों के दायरे का ख़ाका पेश किया.

उन्होंने कहा, “देश, एक नए और असुरक्षित व ख़तरनाक दौर में प्रवेश कर गया है, जहाँ बहुत से अफ़ग़ान लोगों को अपने मानवाधिकारों के बारे में बहुत चिन्ताएँ हैं. ख़ासतौर से, महिलाओं, नस्लीय और धार्मिक समुदायों को.”

मिशेल बाशेलेट की इन टिप्पणियों से पहले भी, उनके मानवाधिकार कार्यालय ने कहा था कि पिछले सप्ताह शान्तिपूर्ण प्रदर्शनों पर, कौड़ों, डण्डों और जानलेवा बारूदी सामग्री का इस्तेमाल किया गया था.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने बुधवार को आगाह करते हुए कहा था कि पूर्व स्वीकृति लिये बिना सभाएँ करने पर पाबन्दी लगा दी गई है.

और दूर संचार कम्पनियों को राजधानी काबुल के कुछ ख़ास इलाक़ों में, इण्टरनेट व मोबाइल फ़ोन सेवाएँ काट देने के लिये कहा गया है.

तालेबान से मिले आश्वासन

संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत मामलों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ध्यान दिलाते हुए कहा है कि उन्हें यूएन एजेंसियों के सहायता कार्य जारी रखने देने के बारे में, तालेबान नेतृत्व से लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ है.

तालेबन नेतृत्व से ये लिखित आश्वासन, पिछले सप्ताह काबुल में तालेबान नेताओं के साथ हुई उनकी मुलाक़ात के बाद दिये गए हैं. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने तालेबान नेताओं के साथ, उस बैठक में उनसे, मानवाधिकारों का सम्मान करने और सहायता सामग्री, निर्बाध उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करने का आग्रह किया था.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ज़ोर देकर कहा था कि महिलाओं व लड़कियों को शिक्षा हासिल करने का अधिकार दिये जाने के साथ-साथ, अन्य अधिकर व सेवाएँ भी सुनिश्चित की जाएँ, जैसाकि दुनिया के दीगर हिस्सों में होता है.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने, अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद करने का यूएन का संकल्प भी दोहराया और कहा कि पिछले 20 वर्षों के दौरान, लोगों के विकास व बेहतरी के लिये हासिल की गई कामयाबियों को भी सहेजने की भरसक कोशिश की जाएगी.

और ज़्यादा विस्थापन की आशंका

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने राजधानी काबुल से बोलते हुए, देश के लगभग 35 लाख विस्थापित लोगों की ज़रूरतों की तरफ़ ध्यान दिलाया. 

उन्होंने इन लोगों की तकलीफ़ें और ज़्यादा बढ़ने का भी अन्देशा ज़ाहिर किया.

फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा, “अगर मौजूदा संकट के नज़रिये से देखा जाए तो मुझे डर है कि पहले से ही जोखिम का सामना कर रही अर्थव्यवस्था के कारण, बहुत सी सेवाएँ ढह जाने के कगार पर हैं, ये हालात में बढ़ी हुई हिंसा और तनाव के कारण भी और ज़्यादा गम्भीर हो सकते हैं, जिससे देश के भीतर और बाहर के लिये ज़्यादा विस्थापन शुरू हो सकता है, और ऐसा बहुत जल्द होने की आशंका है.”

उन्होंने कहा कि त्वरित अपील के जवाब में अगर धनराशि जल्द ही मिल जाती है तो उससे ऐसे नाज़ुक हालात वाले लोगों के मदद प्रयास बढ़ाए जा सकते हैं जो अफ़ग़ानिस्तान से बाहर रह रहे हैं.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में टीकाकरण व पुनर्वास अभियानों क लिये वित्तीय सहायता मुहैया कराए जाने की ज़रूरत को भी रेखांकित किया.

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