युवा जलवायु 'लीडर्स' को, यूएन प्रमख की पुकार - अपनी आवाज़ें बुलन्द करते रहें

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ऐसे में जबकि जलवायु संकट के कारण पहले ही बहुत से लोगों की ज़िन्दगियाँ और रोज़गार व आजीविकाएँ तबाह हो रही हैं, तो वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में, युवजन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. 

यूएन महासचिव ने इटली के मिलान शहर में, गुरूवार को, यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन - कॉप26 की पूर्व तैयारी के लिये आयोजित एक कार्यक्रम के प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए ये बात कही है.

दुनिया भर से सैकड़ों प्रतिनिधि इस बैठक में शिरकत कर रहे हैं जो स्कॉलैण्ड के ग्लासगो शहर में नवम्बर में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन – कॉप26 की एक बानगी के रूप में आयोजित हुई है.

मानवता के लिये ‘कोड रैड’

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपने वीडियो सन्देश में कहा, “युवजन, सकारात्मक समाधान आगे बढ़ाने में, अग्रिम मोर्चे पर रहे हैं.

इन समाधानों में जलवायु न्याय और नेतागण को जवाबदेह ठहराने की हिमायत की गई है.”

“हम चाहते हैं कि युवजन, हर जगह अपनी आवाजें बुलन्द करते रहें.”

यूएन महासचिव ने जलवायु आपदा को, “मानवता के लिये एक लाल कोड” क़रार देते हुए कहा कि निर्धनतम व बहुत कमज़ोर हालात वाले लोग, पहले ही इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.

उन्होंने कहा, “जलवायु आपदा के भीषण प्रभावों की रोकथाम के लिये, अवसर, बहुत तेज़ी से हाथों से निकलते जा रहे हैं. हम ये समझते है कि क्या किये जाने की ज़रूरत है, और हमारे पास ठोस कार्रवाई करने के औज़ार व संसाधन भी मौजूद हैं.”

वादे पूरे किये जाएँ

एंतोनियो गुटेरेश ने युवा जलवायु नेतृत्व कर्ताओं से सहनक्षमता का निर्माण करने में शुरुआती कामयाबी के लिये अपनी आवाज़ बुलन्द करते रहने का आग्रह किया. 

उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि, जलवायु समर्थन के लिये निर्धारित संसाधनों का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा, लोगों की ज़िन्दगियों व आजीविकाओं की हिफ़ाज़त करने के लिये, अनुकूलन पर ख़र्च किये जाने पर भी ज़ोर देते रहें.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि युवजन की आवाज़ें बुलन्द होने की अब क्यों ख़ास ज़रूरत है! इसमें विकसित देशों की तरफ़ से, विकासशील देशों को जलवायु वित्त के रूप में हर साल, 100 अरब डॉलर मुहैया कराने के, दशकों पहले किये गए उनके वादे पूरे करने के लिये, आवाज़ बुलन्द करना शामिल है.

इस बीच, देशों की सरकारों, कारोबारी संगठनों और निवेशकों को, 1.5 डिग्री सेल्सियस के अनुरूप, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना अभी बाक़ी है, जैसाकि पेरिस जलवायु सम्मेलन में प्रावधान किया गया है. यह एक अन्य ऐसा क्षेत्र है जिसके लिये युवजन की बुलन्द आवाज़ों की ज़रूरत है.

इस लक्ष्य का मतलब है कि देशों को इस सदी के मध्य तक यानि वर्ष 2050 तक, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में नैट शून्य प्राप्ति के लिये प्रतिबद्धता जतानी है, और इस प्राप्ति के लिये स्पष्ट योजनाओं की दरकार है.

‘एक शक्तिशाली उदाहरण’

यूएन महासचिव ने नीति निर्माताओं के साथ सीधे सम्पर्क साधने में युवाओं को यह वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के लिये, इटली सरकार की सराहना भी की. 

ध्यान रहे कि इटली, ग्लासगो में नवम्बर में आयोजित होने वाले कॉप26 सम्मेलन का सहअध्यक्ष है.

उन्होंने यूएन जलवायु सम्मेलन कॉप26 के आयोजन से पहले, विचारों और समाधानों का आदान प्रदान करने के लिये युवजन का धन्यवाद किया.

उन्होंने कहा, “आपकी एकजुटता और कार्रवाई की मांग, एक ताक़तवर उदाहरण पेश करती है. हम चाहते हैं कि देशों के राष्ट्रीय नेतागण, आपके उदाहरण का अनुसरण करें और कॉप26 व उससे भी आगे के समय के लिये, महत्वाकांक्षा व परिणाम सुनिश्चित करें.”

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