यमन: जर्जर तेल टैंकर के जोखिम से निपटने के लिये, 3.3 करोड़ डॉलर रक़म के संकल्प

अनेक देशों ने यमन के पश्चिमी तट के नज़दीक स्थित एक उम्र दराज़ और ख़स्ता हाल तेल टैंकर जहाज़ से पर्यावरणीय और मानवीय आपदा उत्पन्न होने से रोकने की ख़ातिर, संयुक्त राष्ट्र द्वारा संयोजित एक कार्यक्रम के लिये, बुधवार को क़रीब तीन करोड़ 30 लाख डॉलर की रक़म एकत्र करने के संकल्प व्यक्त किये हैं.

इस जर्जर जहाज़ का नाम एफ़एसओ सेफ़र (FSO Safer) है और इस पर दस लाख बैरल से भी ज़्यादा तेल लदा हुआ है. 

इस जहाज़ को “टाइम बम” तक कहा गया है क्योंकि इस पर से बड़ी मात्रा में तेल के रिसाव, इस जहाज़ के टूट जाने या फिर इसमें विस्फोट हो जाने के कारण, एक बड़ा जोखिम उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की गई है.

ये रक़म एकत्र करने के संकल्प, नैदरलैण्ड्स की राजधानी द हेग में हुए एक सम्मेलन में लिये गए, जिसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र और नैदरलैण्ड्स ने मिलकर किया था. 

इस तेल टैंकर को बचाने के इस कार्यक्रम के लिये, कुल क़रीब 14 करोड़ 40 लाख डॉलर की रक़म की ज़रूरत होगी.

यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडैण्ट और मानवीय संयोजक डेविड ग्रेस्सली ने इस अवसर पर कहा, “हम, बहुत कम नोटिस पर आज के सम्मेलन में संकल्प व्यक्त करने वाले दानदाताओं के आभारी हैं और उन देशों से भी दान के संकल्प व्यक्त किये जाने के लिये आशान्वित हैं जिन्होंने अभी ऐसा नहीं किया है. रक़म उपलब्ध होने पर, मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा.”

आसन्न ख़तरा

एफ़एसओ सेफ़र का निर्माण 1976 में, एक तेल टैंकर के रूप में हुआ था और एक दशक बाद इसे, एक तैरती हुई भण्डार व बिकवाली सुविधा (FSO) के रूप में तब्दील कर दिया गया.

ये तेल टैंकर 376 मीटर लम्बा है और ये दुनिया में सबसे विशाल तेल टैंकरों में से एक है. 

इस तेल टैंकर जहाज़ में, अमेरिका में इतिहास में सबसे भीषण पर्यावरण संकट उत्पन्न करने वाले तेल टैंकर जहाज़ ऐक्सॉन वैल्डेज़ (Exxon Valdez) से निकले क्रूड तेल से, चार गुना ज़्यादा क्रूड तेल भण्डार मौजूद है.

ये जहाज़ पिछले 30 से भी ज़्यादा वर्षों से, यमन के लाल सागर तट के पास खड़ा हुआ है.

सऊदी अरब द्वारा समर्थित सरकारी गठबन्धन और हूथी विद्रोहियों के बीच, 2015 में युद्ध भड़कने के बाद, इस तेल टैंकर जहाज़ में तेल भरे जाने, उतारे जाने और इसकी मरम्मत का काम थम गया था.

अब इस जहाज़ की मरम्मत नहीं की जा सकती, और इसमें से तेल रिसाव का गम्भीर ख़तरा उत्पन्न हो गया है जिसके बहुत गम्भीर और दूरगामी परिणाम होंगे.

समय नहीं बचा है

अगर इस तेल टैंकर से तेल रिसाव होता है तो लाल सागर के तटवर्ती इलाक़ों में मछली पालन पर निर्भर समुदाय तबाह हो जाएंगे और निकट के हुदायदाह व सलीफ़ बन्दरगाहों को बन्द करना पड़ेगा. 

ये दोनों बन्दरगाह, यमन में भोजन सामग्री, ईंधन व अन्य जीवनरक्षक सामग्री के आयात के लिये बहुत अहम हैं. 

ध्यान रहे कि यमन में लगभग एक करोड़ 70 लाख लोग, मानवीय सहायता पर निर्भर हैं.

किसी भी तरह के तेल रिसाव से, बाब अल मन्दाब जल मार्ग से सुएज़ नहर के लिये जहाज़ों का रास्ता बाधित हो जाएगा. तेल रिसाव को साफ़ करने में ही लगभग दो करोड़ डॉलर की रक़म ख़र्च होगी.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस दानदाता सम्मेलन को अपने वीडियो सन्देश में, तत्काल कार्रवाई किये जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा, “आज का ये सम्मेलन एक ऐसी आपदा की रोकथाम करने की दिशा में अहम क़दम है जिससे यमन, पूरा क्षेत्र और पूरी दुनिया प्रभावित होंगे. एक लम्हा भी नहीं गँवाया जा सकता.”

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