मानसिक स्वास्थ्य को चौतरफ़ा प्राथमिकता बनाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को कहा है कि इस पूरे विश्व संगठन में, तमाम मानवीय सहायता, शान्तिनिर्माण और विकास कार्यक्रमों में, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता की उपलब्धता को, अभिन्न अंग के रूप में देखा जाना होगा.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, संघर्षों व मानवीय सहायता परिस्थितियों में, शान्तिनिर्माण के लिये चलाए जाने वाले मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में ये बात कही है.

उन्होंने कहा, “नाज़ुक मानवीय हालात व मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, हमारे सामूहिक मानव अनुभव का हिस्सा हैं और उन्हें भी, शारीरिक स्वास्थ्य मुद्दों की ही तरह, गम्भीर समझा जाना होगा, महामारी के दौरान भी.”

सम्बन्ध

महासचिव की नज़र में, शान्तिनिर्माण, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता, आपस में जुड़े हुए हैं. 

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि जिन परिवारों को नुक़सान उठाने पड़े हैं, हमलों का सामना करना पड़ा है, जिनके परिजन बिछड़े हैं और जिन्हें लिंग आधारित हिंसा झेलनी पड़ी है, वो बड़े सदमों और परेशानियों में जीवन जीते हैं, उनके ज़ख़्म व सदमे फिर से ताज़ा हो जाने का डर है, और हिंसा का चक्र भी दोहराया जा सकता है.

इस उच्च स्तरीय बैठक का मक़सद, मैदानी अभियानों में मिली कामयाबियों, आदर्श कार्रवाइयों और क़दमों पर चर्चा करने के साथ-साथ, आगे का रास्ता तैयार करने के बारे में बातचीत करना था, ऐसा रास्ता जो संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के सभी क्षेत्रों में अपनाया जा सके.

मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक बेहतरी को समर्थन व सहायता देने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के उदाहरणों में, नाइजीरिया के पूर्वोत्तर हिस्से, फ़िलिपीन्स, दक्षिण सूडान और इथियोपिया में चलाए गए कार्यक्रम शामिल हैं.

यूएन महासचिव ने अन्तर एजेंसी स्थाई समिति के, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक सहायता सन्दर्भ समूह के कामकाज की सराहना भी की जिसने महामारी के दौरान व्यापक दायरे वाले संसाधन तैयार किये हैं. उनमें से कुछ का अनुवाद तो 140 भाषाओं में हुआ है.

अति महत्वपूर्ण कारक

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने दानदाताओं, सरकारों और मानवीय सहायता एजेंसियों को भी, मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक सहायता के कार्यक्रमों में संसाधन निवेश का जायज़ा लेने के लिये प्रोत्साहित किया है. 

“शान्तिपूर्ण, सहनशील और समावेशी समुदायों और समाजों को समर्थन व सहायता देने में, ये एक महत्वपूर्ण कारक है.”

इस उच्चस्तरीय बैठक में, बेल्जियम की महारानी मैथिल्डे ने भी अपने विचार रखे. 

साथ ही, यूएन उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने भी इस बैठक को सम्बोधित किया.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि उम्मीद है कि जल्द ही, एक दिन, कोविड-19 महामारी ख़त्म हो जाएगी, मगर जिन लोगों को इस महामारी के कारण बहुत तकलीफ़ें उठानी पड़ी हैं, उनके घाव जल्द और आसानी से नहीं भरेंगे. 

उनकी नज़र में, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की ख़ातिर, संसाधन निवेश और ठोस कार्रवाई की तत्काल ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखने वाले मानवीय सहायता और शान्तिनिर्माण कार्यक्रम, इस बात के स्पष्ट और सफल उदारहण हैं कि क्या सम्भव है.” 

“जैसाकि नाइजीरिया, इथियोपिया, दक्षिण सूडान, फ़िलिपीन्स और अन्य देशों के उदाहरण दिये गए हैं.”

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