मानव तस्करी से मुक़ाबले के लिये महासभा ने जताई प्रतिबद्धता, घोषणापत्र पारित

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने मानव तस्करी के ‘जघन्य अपराध’ से एकजुटतापूर्ण ढँग से निपटने के लिये, सोमवार को एक राजनैतिक घोषणापत्र पारित किया है. यूएन महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने इस सिलसिले में एक उच्चस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 ने निर्धनता, बेरोज़गारी और लिंग-आधारित हिंसा समेत उन समस्याओं को और गहरा किया है, जिनसे मानव तस्करी को बढ़ावा मिलता है.

यूएन महासभा ने जुलाई 2010 में मानव तस्करी से मुक़ाबले के लिये, संयुक्त राष्ट्र की एक वैश्विक कार्ययोजना को पारित किया था. 

मानव तस्करी की चुनौती से निपटने पर केंद्रित इस कार्ययोजना को लागू करने में हुई प्रगति की समीक्षा के इरादे से सोमवार को दो-दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक की शुरुआत हुई है.

महासभा अध्यक्ष ने बैठक को सम्बोधित करते हुए, देशों की सरकारों से इस जघन्य अपराध की रोकथाम करने और इससे निपटने के लिये प्रयासों को मज़बूती देने का आग्रह किया है. 

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से, मानव तस्करी के पीड़ितों के लिये समर्थन कम हुआ है, और इस अपराध के दोषियों की शिनाख़्त करने और उनकी जवाबदेही किये जाने की देशों की क्षमता भी प्रभावित हुई है.

“यह अनिवार्य है कि वैश्विक समुदाय इस महामारी से, बेहतर ढँग से उबरने के लिये अपने प्रयासों को दोगुना करे और सुदृढ़ समुदायों का निर्माण करे.”

“इसमें ज़्यादा शोध, डेटा व विश्लेषण को प्राप्त करना भी है कि किस तरह इस अपराध को अंजाम दिया जा रहा है, किस तरह यह बदल रहा है, किसे निशाना बनाया जा रहा है और यह किसे प्रभावित कर रहा है.”

“इससे हमें, रोकथाम उपायों व जवाबी कार्रवाई के सम्बन्ध में बेहतर ढँग से निर्णय लेने में मदद मिलेगी.”

निर्बलताएँ उजागर

सभी उम्र, पृष्ठभूमि व राष्ट्रीयताओं के लोग, मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं, जोकि ग़ैरक़ानूनी धन के लेनदेन, फ़र्जी यात्रा दस्तावेज़ों और साइबर अपराध से जुड़ा है.

मानव तस्करी के अधिकाँश पीड़ित अक्सर हाशिए का शिकार समुदायों से आते हैं, जोकि विकट परिस्थितियों में जीवन गुज़ारते हैं – जैसाकि बिना दस्तावेज़ के रह रहे प्रवासी.

अन्य पीड़ित, रोज़गार या शिक्षा के अवसरों की तलाश में निशाना बनाये जा सकते हैं.

मादक पदार्थों एवं अपराध पर यूएन कार्यालय (UNODC) की कार्यकारी निदेशक ग़ादा वाली ने बताया कि महामारी के दौरान, तालाबन्दी लागू होने से पढ़ाई-लिखाई में व्यवधान उत्पन्न हुआ और आजीविकाओं के साधन ख़त्म हो गए.

उन्होंने पहले से रिकॉर्ड किये गए अपने एक सन्देश में कहा, “कोविड संकट ने अनेक पीड़ितों को अति-आवश्यक सेवाओं की सुलभता से वंचित कर दिया है.”

“ज़्यादा समय ऑनलाइन बिताये जाने की वजह से अधिक शोषण हुआ है और टैक्नॉलॉजी का ग़लत इस्तेमाल भी बढ़ा है.”

महिलाओं व लड़कियों के लिये जोखिम 

यूएन की उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने ध्यान दिलाया कि लड़कियाँ व महिलाएं, मानव तस्करी से विषमतापूर्ण ढँग से प्रभावित होती हैं. 

उन्हें जबरन शादी करने, जबरन मज़दूरी के लिये मजबूर किया जाता है, और घरेलू पराधीनता का शिकार बनाया जाता है.

मानव तस्करों द्वारा बच्चों को शिकार बनाये जाने के मामले भी बढ़ रहे हैं. नए पीड़ितों के लिये सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है और बच्चों के यौन शोषण की सामग्री की माँग के ज़रिये मुनाफ़ा कमाया जा रहा है.

उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने ज़ोर देकर कहा कि मानव तस्करी का अन्त करने के लिये, देशों में मज़बूत क़ानूनी संस्थाओं व फ़्रेमवर्क का निर्माण किया जाना होगा.

उदघाटन कार्यक्रम के बाद, देशों ने यूएन की वैश्विक कार्ययोजना के तहत, अपने संकल्पों को पुष्ट करते हुए एक राजनैतिक घोषणापत्र को पारित किया है. 

इस क्रम में, पीड़ितों व जीवित बच गये लोगों के प्रति एकजुटता दर्शाई गई है, और मानव तस्करी के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में बदलाव के वाहक के तौर पर उनकी भूमिका की शिनाख़्त की गई है. 

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