मंकीपॉक्स के फैलाव और ख़तरे की गम्भीरता पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बैठक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने मंकीपॉक्स वायरस के फैलाव से उपजी स्थिति पर विचार-विमर्श के लिये अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामक आपात समिति की बैठक बुलाये जाने की घोषणा की है. मंकीपॉक्स के मामलों की उन 32 देशों में भी पुष्टि हुई है, जहाँ आमतौर पर इसके संक्रमण के मामले सामने नहीं आते हैं.    

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने मंगलवार को बताया कि 23 जून को स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बैठक का उद्देश्य यह तय करना है कि मंकीपॉक्स के कारण अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति उत्पन्न हुई है या फिर नहीं. 

सार्वजनिक स्वास्थ्य के विषय में यह सबसे ऊँचे स्तर का वैश्विक ऐलर्ट है, जोकि फ़िलहाल कोविड-19 महामारी और पोलियो के लिये ही लागू है.

इस वर्ष अभी तक, 39 देशों में मंकीपॉक्स के एक हज़ार 600 से अधिक पुष्ट मामलों और क़रीब डेढ़ हज़ार सन्दिग्ध मामलों का पता चल चुका है.  

इनमें सात देश ऐसे हैं जहाँ वर्षों से मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण मामलों की पुष्टि होती रही है, मगर 32 नए प्रभावित देश भी हैं. 

अतीत में भी प्रभावित होने वाले देशों में अब तक कम से कम 72 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि नए प्रभावित देशों में किसी की मौत होने की ख़बर नहीं है.

हालांकि, यूएन एजेंसी ब्राज़ील में एक संक्रमित की मौत होने के समाचार की पुष्टि करने का प्रयास कर रही है.

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा, “मंकीपॉक्स का वैश्विक प्रकोप, स्पष्ट रूप से असाधारण और चिन्ताजनक है.”

इसके मद्देनज़र, उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूती प्रदान किये जाने और जवाबी कार्रवाई का दायरा व स्तर बढ़ाने का आग्रह किया है.

आपात जवाबी कार्रवाई के लिये यूएन एजेंसी के उपनिदेशक इब्राहिमा सोसे फॉल के अनुसार, योरोप में फैलाव का जोखिम अधिक माना गया है, जबकि शेष दुनिया में यह सामान्य है.

फ़िलहाल इस वायरस के फैलाव के तरीक़ों के सम्बन्ध में पूर्ण रूप से स्पष्ट जानकारी नहीं है. “हम स्थिति के नियंत्रण से बाहर होने तक प्रतीक्षा करना नहीं चाहते हैं.”

संक्रमण की रोकथाम के लिये प्रयास

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स संक्रमण के मामलों का पता लगाने और उन्हें नियंत्रण में करने के इरादे से, देशों की सरकारों के लिये अनुशन्साएँ प्रकाशित की हैं. 

चेचक के लिये यूएन एजेंसी में विशेषज्ञ डॉक्टर रोज़ामण्ड लुईस ने जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि आमजन में मंकीपॉक्स के जोखिम के स्तर और बचाव उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है.

इससे नज़दीकी सम्पर्क में आने वाले लोगों व परिजनों के संक्रमित होने के जोखिम को कम किया जा सकता है.

डॉक्टर लुईस के मुताबिक़, इस बीमारी से कभी-कभी मामूली लक्षण ही सामने आते हैं,

जैसेकि त्वचा पर दाने निकलना जोकि घाव जैसे नज़र आते हैं, मगर यह दो से चार सप्ताह तक संक्रामक हो सकता है. 

“हम जानते हैं कि लोगों के लिये इतने समय तक स्वयं को अलग-थलग रख पाना कठिन है, मगर दूसरों की रक्षा के लिये यह बहुत अहम है.”

“अधिकाँश मामलों में, लोग घर पर एकान्तावस में रह सकते हैं और अस्पताल जाने की कोई आवश्यकता नहीं है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मंकीपॉक्स का संक्रमण, किसी लक्षण वाले व्यक्ति के सम्पर्क में आने के कारण फैलता है, शरीर पर निकलने वाले दाने, द्रव विशेष रूप से संक्रामक होते हैं.

कपड़ों, संक्रमित बिस्तर, तौलिये या संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किये गए खाने के बर्तन से भी यह फैल सकता है. 

मगर, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बिना लक्षणों वाले लोग इसे फैला सकते हैं या फिर नहीं.

मंकीपॉक्स कभी-कभार ही सामने आने वाला, मगर एक ख़तरनाक संक्रमण है.
© CDC/Cynthia S. Goldsmith
मंकीपॉक्स कभी-कभार ही सामने आने वाला, मगर एक ख़तरनाक संक्रमण है.

टीकाकरण दिशानिर्देश

यूएन एजेंसी ने मंगलवार को मंकीपॉक्स बीमारी से बचाव के लिये टीकाकरण के सम्बन्ध में भी नए दिशानिर्देश जारी किये हैं.  

कुछ देशों ने चेचक (smallpox) के लिये पुरानी वैक्सीन की आपूर्ति बनाये रखी है, जिसका 1980 में उन्मूलन किया जा चुका है. 

पहली पीढ़ी की उन वैक्सीन को राष्ट्रीय भण्डारों में रखा जाता है, और फ़िलहाल मंकीपॉक्स के विरुद्ध उनके इस्तेमाल की सिफ़ारिश नहीं की गई है. 

इसकी वजह उनका मौजूदा सुरक्षा व विनिर्माण मानकों पर खरा ना उतर पाना बताई गई है. 

स्मॉलपॉक्स के लिये नई और अपेक्षाकृत सुरक्षित टीके भी उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ का इस्तेमाल मंकीपॉक्स किया जा सकता है. 

ऐसे ही एक टीके (MVA-BN) को बीमारी की रोकथाम के लिये स्वीकृति दी जा चुकी है, मगर इन नए टीकों की आपूर्ति सीमित है और उपलब्धता रणनीतियों पर चर्चा जारी है.

यूएन एजेंसी के दिशानिर्देशों के अनुसार, फ़िलहाल सामूहिक टीकाकरण की अनुशन्सा नहीं की गई है. 

संक्रमित मरीज़ों के सम्पर्क में आने के बाद, बचाव के लिये दूसरी और तीसरी पीढ़ी के टीके दिये जाने की सिफ़ारिश की गई है, जिसे सम्पर्क में आने के चार दिन के भीतर लगाना होगा. 

स्वास्थ्य देखभालकर्मियों, लैब में कार्यरत कर्मचारियों, मंकीपॉक्स के निदान व जाँच में जुटे और संक्रमण का जोखिम झेल रहे लोगों के बचाव के लिये भी इस बचाव उपाय की सिफ़ारिश की गई है. 

भारत में कोविड-19 वैक्सीन को तैयार किया जा रहा है.
© UNICEF/ Dhiraj Singh
भारत में कोविड-19 वैक्सीन को तैयार किया जा रहा है.

कोविड-19 संक्रमण में गिरावट

महानिदेशक घेबरेयेसस ने बताया कि कोविड-19 महामारी के संक्रमण मामले व मृतक संख्या, पिछले वर्ष बेहद ऊँचे स्तर पर पहुँच गए थे, मगर अब उसमें 90 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. 

“यह एक बहुत स्वागतयोग्य रुझान है. फिर भी, पिछले सप्ताह WHO को 30 लाख से अधिक मामलों का पता चला, और चूँकि अनेक देशों ने अपनी निगरानी व परीक्षण में कमी की है, हम जानते हैं कि यह संख्या असल में कम है.”

इसी अवधि में, आठ हज़ार 737 लोगों की मौत हुई, जिसे उन्हें अस्वीकार्य बताया है, चूँकि अब कोविड-19 की रोकथाम करने, पता लगाने और उपचार करने के लिये उपाय उपलब्ध हैं.  

एजेंसी के महानिदेशक ने देशों से, कोविड-19 वैक्सीन, उपचार और निदान परीक्षणों के लिये बौद्धिक सम्पदा अधिकारों में अस्थाई छूट देने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा है कि इस सप्ताह विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान इस विषय में सहमति पर पहुँचना अहम होगा.

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