भारत: प्लास्टिक प्रदूषण को आड़े हाथों लेता एक कार्यकर्ता

सक्रियता से बदलाव सम्भव है. भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में, एक स्काउट और गाइड कार्यकर्ता  ऋतुराज की कोशिशों से प्लास्टिक प्रयोग के बारे में बदलाव लाने और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल रही है. ऋतुराज, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के प्लास्टिक प्रदूषण का मुक़ाबला करने के लिये वैश्विक युवा आन्दोलन, टाइड टर्नर्स चैलेंज के एक सक्रिय प्रचारक हैं.

33 वर्षीय ऋतुराज, वर्ष 2021 के दौरान अभियान के लिये उम्मीद की किरण बनकर उभरे. उन्होंने अकेले ही, अपने आस-पास व पड़ोस के 50 हज़ार युवाओं को, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल बन्द करने के अभियान में शामिल होने के लिये प्रोत्साहित किया. इतना ही नहीं, ऋतुराज अब, 12 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले बिहार प्रदेश के हर स्कूल में प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के कार्यक्रम चलाने के लिये सरकार की भी मदद कर रहे हैं.

ऋतुराज कहते हैं, "मैं दृढ़ता से महसूस करता हूँ कि परिवर्तन तभी आ सकता है जब हम समाधान खोजने में युवाओं और समुदायों की मदद करें. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारा समाज एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों का इस्तेमाल बन्द करे, ताकि हम सुन्दर धरती माता को इस प्लास्टिक के ख़तरे से मुक्त कर सकें."

हालाँकि बिहार राज्य भूमि से घिरा हुआ है, लेकिन  बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा इसकी नदियों को दूषित करता है - मुख्य रूप से गंगा को, जो बिहार में 400 किमी क्षेत्र में बहती है - और समुद्र में विलीन हो जाती है. 

प्लास्टिक प्रदूषण, परेशानी का सबब तो है ही, स्वास्थ्य के लिये बड़ा ख़तरा भी है, जिसमें नियमित रूप से कचरे को जलाने के दौरान निकलने वाले जहरीले धुएँ से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. एकल-उपयोग प्लास्टिक, इस प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है.

हालाँकि, यह समस्या केवल भारत की नहीं है. मानव गतिविधियों से हर साल, 30 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसमें से लगभग 80 लाख टन बहकर समुद्र में गिरता है. पिछले 50 वर्षों में प्लास्टिक का उत्पादन 22 गुना बढ़ा है. फिर भी वर्ष 2015 में,  केवल 9 प्रतिशत प्लास्टिक ही री-सायकिल किया गया.

ऋतुराज ने, सफ़ाई अभियान चलाने के साथ-साथ प्लास्टिक के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल होने के लिये सरकारों से पैरवी की है. 

उन्होंने अप्रैल 2021 में बिहार में शीर्ष सरकारी अधिकारियों के सामने प्लास्टिक के इस्तेमाल पर एक याचिका दायर की और फिर, दो महीने बाद ही, राज्य ने प्लास्टिक कटलरी, पानी के पाउच और झण्डे समेत, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के उत्पादन और वितरण पर प्रतिबन्ध लगा दिया. 

सोशल मीडिया पर इस ख़बर की भरमार थी और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बदलाव लाने में मदद करने के लिये स्काउट्स एण्ड गाइड्स के प्रयासों की सराहना की.
भारत में यूनेप के ‘टाइड टर्नर्स चैलेंज’ अभियान की समन्वयक, गायत्री राघवा कहती हैं, " ऋतुराज इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे स्थानीय युवाओं की सक्रियता से प्रकृति में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं."

ऋतुराज ने भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ के समारोह के दौरान, बिहार में टाइड टर्नर्स के बारे में बात की. बिहार के पर्यावरण मंत्री, भूपेन्द्र यादव ने इस पहल की सराहना की, तो यह सन्देश बिहार राज्य के अधिकारियों तक गया और अक्टूबर में उन्होंने ऋतुराज की उस योजना का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने हर स्कूल में 15 प्लास्टिक विरोधी प्रचारक तैनात करने की सिफ़ारिश की है. (ऋतुराज ने उन्हें "प्लास्टिक योद्धा" का नाम दिया है).

वैशाली के ज़िला शिक्षा अधिकारी, समर बहादुर सिंह ने कहा, "ऋतुराज, अपने एकल-उपयोग प्लास्टिक उन्मूलन अभियान के ज़रिये, लोगों की सोच और व्यवहार में गुणात्मक बदलाव लाने में सफल हुए हैं. स्कूलों में 'प्लास्टिक योद्धा' टीम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये उन्हें बहुत-बहुत बधाई."

गंगा की सफ़ाई

स्काउट लीडर ऋतुराज ने भारत के बिहार राज्य में, एकल-उपयोग प्लास्टिक के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है.
Rituraj
स्काउट लीडर ऋतुराज ने भारत के बिहार राज्य में, एकल-उपयोग प्लास्टिक के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है.

ऋतुराज और उनके स्काउट्स एण्ड गाइड्स, भारत के ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ और यूनेप की 2019 ‘काउण्टरमैज़र पहल’ का समर्थन कर रहे हैं. उनका काम यह पहचानना है कि भूमि-आधारित प्लास्टिक, जलमार्गों में कहाँ और कैसे दाख़िल हो रही है - जैसे कि नदियों और नहरों के रास्ते, जो समुद्र में विलीन हो जाती हैं.

यूनेप की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट, ‘फ्रॉम पॉल्यूशन टू सॉल्यूशन’ के मुताबिक़, वैश्विक स्तर पर एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक, प्लास्टिक री-सायकलिंग और सामुदायिक स्वच्छता पर स्थानीय सक्रियता व सरकारी कार्रवाइयों में वृद्धि हुई है. हालाँकि, इससे यह भी मालूम होता है कि "वर्तमान स्थिति व्यापक रूप से भिन्न व्यावसायिक प्रथाओं, राष्ट्रीय नियामकों और स्वैच्छिक व्यवस्थाओं का मिला-जुला परिणाम है."

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1950 और 2017 के बीच उत्पादित अनुमानित 9 अरब 20 करोड़ टन प्लास्टिक में से लगभग 7 अरब बेकार गया. उसका तीन-चौथाई हिस्सा विशाल कूड़ाघरों में चला गया, अनियंत्रित अपशिष्ट जल धाराओं में बह गया, या समुद्र आदि जगहों में गिरकर पर्यावरण के स्रोतों में मिल गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लास्टिक अन्ततः टूटकर माइक्रो (सूक्ष्म) प्लास्टिक बन जाता है, जो खाद्य श्रृँखला में प्रवेश कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रो प्लास्टिक्स, मानव, मछली और जलीय कृषि स्टॉक के लिये हानिकारक रोगजनक जीवों में वैक्टर के रूप में कार्य करते हैं. शरीर में प्रवेश करने पर, वो जीन और प्रोटीन में परिवर्तन लाकर, सूजन, खाने में व्यवधान, विकास में कमी और मस्तिष्क के विकास में परिवर्तन जैसी परेशानियाँ पैदा कर सकते हैं.

ब्रिटेन द्वारा वित्त पोषित, ‘टाइड टर्नर्स कार्यक्रम’ ने अब तक 32 देशों में 4 लाख 70 हज़ार से अधिक युवाओं को आत्म-ज्ञान व व्यवहार परिवर्तन, और सामुदायिक पहुँच एवं जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर प्रशिक्षण दिया है. चुनौती के हिस्से के रूप में, प्रतिभागियों को यह साबित करना था कि उन्होंने ठोस बदलाव लाने में किस तरह मदद की - उदाहरण के लिये, नीति को प्रभावित करके या साफ़-सफ़ाई के माध्यम से जैव विविधता को बहाल करके.

भारत में इस कार्यक्रम के असर पर आई एक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकला है कि छात्रों और युवा पेशेवरों के बीच, डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों की काफ़ी मांग है. 

वर्ष 2021 में ही, एक लाख 50 हज़ार से अधिक प्रतिभागियों ने ‘टाइड टर्नर चैलेंज’ में नामांकन किया था. विश्लेषण से पता चला कि भारत के दूरदराज़ के क्षेत्रों के नेता, किस प्रकार उचित मार्गदर्शन और संसाधन दिये जाने पर सीखने, सहयोग करने और कुछ नया करने के लिये सदैव तत्पर रहते हैं. 

रिपोर्ट में कहा गया है, "इसमें कमज़ोर वर्ग के लोगों और संसाधनों तक सीमित पहुँच वाले लोगों को शामिल करना भी बहुत महत्वपूर्ण है."

‘टाइड टर्नर चैलेंज’ में भाग लेने वालों में से अनेक स्काउट्स रहे हैं. स्काउट आन्दोलन के विश्व संगठन की विश्व पहल की निदेशक, सिंथिया मार्गुएज़ कहती हैं, "स्काउटिंग का मक़सद ही है, स्थानीय कार्रवाई करने और वैश्विक प्रभाव के लिये स्थानीय मुद्दों पर अपने समुदाय को एकजुट व प्रेरित करना.” 

“ऋतुराज और उनके स्काउट्स एण्ड गाइड्स को सकारात्मक बदलाव का नेतृत्व करने में अनुकरणीय सक्रिय भूमिका निभाने के लिये बधाई, जो हमारे ग्रह को बहाल करने में युवाओं, सामुदायिक नेताओं और स्थानीय सरकारों के साथ समन्वय के प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं."

ऋतुराज का कहना है कि वह टाइड टर्नर्स कार्यक्रम की परिवर्तन लाने की शक्ति से प्रेरित हैं. 

उन्होंने कहा, "मैं हमेशा पर्यावरण और सामाजिक समस्याओं को लेकर चिन्तित रहा हूँ और यही मुख्य कारण है कि मैं स्काउट्स आन्दोलन में शामिल हुआ. ‘टाइड टर्नर्स कार्यक्रम’ ने मुझे एक ऐसी समस्या के ख़िलाफ़ लड़ने की वजह दी, जो मेरे दिल के बहुत क़रीब है."

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.

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