भारतीय शान्तिरक्षक प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित

दक्षिण सूडान में, शान्ति एवं स्थिरता लाने के प्रतिबद्ध प्रयासों के लिये, भारत के 836 शान्तिरक्षकों को प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया है. ये भारतीय सैनिक संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियान का हिस्सा हैं.

ऊपरी नील नदी के मलाकल में शान्ति बहाली के लिये प्रतिबद्ध भारतीय शान्तिरक्षकों ने, इलाक़े में उत्पन्न हर चुनौती का डटकर सामना किया है.

यही कारण है कि भारत के 836 शान्तिरक्षकों को हाल ही में दुनिया के इस सबसे नए देश में स्थाई शान्ति लाने के प्रयासों के लिये, संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया. 

UNMISS फ़ोर्स के कमाण्डर, लैफ्टिनेंट जनरल शैलेश तिनाइकर ने अपनी कर्तव्य यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के लिये, भारतीय बटालियन की सराहना की.

उन्होंने इस अवसर पर आयोजित एक समारोह में कहा, "जब आप ऊपरी नील नदी के इलाक़े में आए थे, तो वो बड़े उतार-चढ़ाव का समय था. आपको, अपने ऊपर आसन्न साम्प्रदायिक संघर्षों के ख़तरे के बीच, तुरन्त संचालन की ज़िम्मेदारी सम्भालनी थी. उस समय हिंसा की रोकथाम में आपकी उपस्थिति और गश्त का बड़ा योगदान रहा, जिससे नागरिकों को निडर होकर अपने दैनिक जीवन के कार्य करने की आज़ादी मिली.”

फ़ोर्स कमाण्डर तिनाइकर ने भारतीय शान्तिरक्षकों द्वारा, रेंक इलाक़े में, 32 मानवीय कार्यकर्ताओं को बचाकर आश्रय देने व देश की राजधानी जुबा में उनकी सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की.

दक्षिण सूडान में भारत के राजदूत और इस पदक परेड के मुख्य अतिथि, विष्णु शर्मा ने भी क्षेत्र में शान्ति बहाली के लिये भारतीय शान्तिरक्षकों के प्रयासों की तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, "दक्षिण सूडान में स्थाई शान्ति के लिये आपका साहस, प्रतिबद्धता और बलिदान उन समुदायों के लिये आशा की किरण के समान है, जिनकी सेवा करने के लिये आप यहाँ आए हैं. आपने संयुक्त राष्ट्र को और अपने देश को बहुत गौरवान्वित किया है.”

भारतीय राजदूत ने उन भारतीय पशु चिकित्सकों के योगदान पर विशेष ज़ोर दिया, जिन्होंने हज़ारों जानवरों का इलाज किया और पशु प्रबंधन पर पशुधन मालिकों का कौशल निर्माण किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिला है.

मलाकल में UNMISS फ़ील्ड ऑफिस के कार्यवाहक प्रमुख, क्रिश्चियन मिकाला ने शान्तिरक्षकों के स्थानीय समुदायों के साथ निरन्तर सम्वाद की कोशिशों को रेखांकित करते हुए कहा, "आप अपने क्षेत्र में व्यापक गश्त लगाते हुए अपनी ज़िम्मेदारी निभाते रहे और ऊपरी नील नदी के समुदायों के साथ एक विश्वास का रिश्ता बनाने में कामयाब हुए. इसके लिये, आप सभी को गर्व के साथ अपने पदक धारण करने चाहिये."

भारतीय बटालियन के कमाण्डर, कर्नल नीरज तिवारी का मानना है कि  इस तैनाती का मक़सद ही था कि उन समुदायों के कल्याण के लिये अधिक से अधिक कोशिशें की जा सकें, जिनकी सेवा करने के लिये वो यहाँ आए थे.

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हमें शान्ति बहाली व क्षमता निर्माण की सकारात्मक विरासत छोड़ने के लिये याद किया जाएगा. इस समय, ज़मीनी स्तर से लेकर समाज के उच्चतम स्तर तक, शान्ति व स्थिरता के निर्माण में प्रगति कर रहे दक्षिणी सूडान को हम शुभकामनाएँ देते हैं."

इस पदक समारोह में, दक्षिण सूडानी लोक कलाकारों के साथ शान्तिरक्षकों ने भी, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये.

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