ब्रिटेन-रवाण्डा शरणार्थी क़रार ग़लत है, यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने ब्रिटेन में पनाह चाहने वाले शरणार्थियों की अर्ज़ियों पर विचार किये जाने की प्रक्रिया को रवाण्डा स्थानान्तरित करने के प्रस्ताव को रद्द करते हुए, इस सम्बन्ध में दोनों देशों के बीच गत अप्रैल में हुए समझौते को एक त्रुटि क़रार दिया है.

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त की ये आलोचना, ऐसे मौक़े पर आई है जब ब्रिटेन में कुछ वरिष्ठ जजों ने, पनाह चाहने वाले कुछ लोगों को 14 जून को रवाण्डा ले जाने वाले विमान की उड़ान के लिये, सरकार की योजना को स्वीकृति दे दी है.

ब्रिटेन के एक हाई कोर्ड जज ने इस पहली उड़ान पर अस्थाई रोक लगाने वाली याचिका को शुक्रवार को अस्वीकृत कर दिया था. और ख़बरों के अनुसार, सोमवार को एक अपीलीय अदालत ने भी इस निर्णय को बरक़रार रखा है.

इस विवादास्पद नीति पर पूर्ण क़ानूनी सुनवाई जुलाई में होनी है.

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैण्डी ने सोमवार को जिनीवा में कहा, “रवाण्डा मुद्दे पर, मेरा ख़याल है कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान हम बहुत स्पष्ट रहे हैं कि हमारा मानना है कि ये सब बिल्कुल ग़लत है, अनेक कारणों से.”

अन्तरराष्ट्रीय हस्तक्षेप

फ़िलिपो ग्रैण्डी ने ध्यान दिलाया कि ब्रिटेन शरणार्थियों पर अन्तरराष्ट्रीय कन्वेन्शन का एक हस्ताक्षर कर्ता देश है, ऐसे में अपनी ज़िम्मेदारियों को “निर्यात” कर देने के प्रयास, ज़िम्मेदारी की अवधारणा और अन्तरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी उठाने के सिद्धान्त के उलट हैं.

उन्होंने कहा कि वैसे तो रवाण्डा का इतिहास, काँगो व बुरूण्डी के हज़ारों शरणार्थियों का स्वागत करने और उनके काग़ज़ात की जाँच-पड़ताल करके आगे बढ़ाने का रहा है, मगर उस देश के पास, शरणार्थियों के दर्जे का आकलन करने के लिये क्षमता या ढाँचा उपलब्ध नहीं है, जो हर एक मामले की अलग जाँच-पड़ताल व आकलन करने के लिये चाहिये.

ग़ैर-ज़िम्मेदार

यूएन शरणार्थी उच्चायुक्त ने कहा, “अगर स्थिति इसके उलट होती तो हम कोई बातचीत कर सकते थे, मगर यहाँ तो हम एक ऐसे देश (ब्रिटेन) की बात कर रहे हैं जिसके पास ढाँचा मौजूद है फिर भी वो अपनी ज़िम्मेदारियाँ एक अन्य देश रवाण्डा को निर्यात कर रहा है.”

फ़िलिपो ग्रैण्डी ने ब्रिटेन सरकार की इस दलील को भी रद्द कर दिया कि इस नीति का उद्देश्य, लोगों को इंगलिश चैनल की ख़तरनाक नाव यात्राओं से बचाना है, जो उन्हें योरोप की मुख्य भूमि से ब्रिटेन में दाख़िल होने के लिये करनी पड़ती हैं.

उन्होंने कहा, “मेरा कहना है कि लोगों को ख़तरनाक यात्राओं से बचाना तो वाक़ई बहुत अच्छी बात है, मगर क्या ऐसा करने के लिये, ये सही तरीक़ा है? क्या वाक़ई इस समझौते के पीछे यही मंशा है? मुझे तो ऐसा नहीं लगता.”

शरणार्थी उच्चायुक्त ने इस मुद्दे पर, ब्रिटेन और फ्रेंच सरकारों के बीच और ज़्यादा सम्वाद संयोजन का आग्रह किया क्योंकि इस योजना से प्रभावित होने वाले ज़्यादातर शरणार्थी फ्रांस के ज़रिये ही ब्रिटेन में दाख़िल होने के लिये पहुँचते हैं. 

उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि फ्रांस के पास भी, शरणार्थियों की मदद करने के लिये समुचित ढाँचा मौजूद है.

जब ये योजना घोषित की गई थी तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था कि 16 करोड़ डॉलर की लागत वाली इस योजना से, अनगिनत प्रवासियों की ज़न्दगियाँ बचेंगी, जो अक्सर इनसानों के ग़ैर-क़ानूनी तस्करों के हत्थे चढ़ जाते हैं.

क़ानूनी विकल्प

फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा कि वैसे तो स्थिति जटिल है, मगर इसके बावजूद ऐसे शरणार्थियों और पनाह चाहने वालों के लिये बहुत से विकल्प मौजूद हैं जिनके माध्यम से वो ब्रिटेन व योरोपीय देशों में पहले ही रहने वाले अपने परिजन के पास जा सकते हैं.

उन्हेंने कहा, “इन सब मुद्दों पर, ब्रिटेन व सम्बन्धित योरोपीय देशों के बीच द्विपक्षीय स्तर पर बात होने की ज़रूरत है; हमने इस बारे में परामर्श मुहैया कराने के लिये ख़ुद को अनेक बार उपलब्ध कराया है, इस मामले पर आगे बढ़ने का यही रास्ता है.”

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