प्रवासियों के साथ एकजुटता की अभूतवूर्व ज़रूरत, यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, शनिवार को अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस के मौक़े पर अपने सन्देश में कहा है कि गतिवान प्रवासियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने की जितनी ज़रूरत अब है, शायद उतनी कभी पहले नहीं रही.

आज, अभूतपूर्व संख्या में लोग ऐसे देशों में रहते हैं जो उनके जन्म देश नहीं हैं, यानि उन्हें जन्म व मूल स्थानों वाले देश छोड़कर, कामकाज या अन्य कारणों से किसी अन्य देश में रहना पड़ रहा है.

एक तरफ़ बहुत से ऐसे लोग हैं जो अपनी इच्छा से, अपना जन्म देश या मूल निवास देश छोड़कर किसी अन्य देश में बसते हैं, जबकि अन्य बहुत से लोगों को, अपनी ज़रूरतें पूरी करने की ख़ातिर ये क़दम उठाना पड़ता है. 

वर्ष 2020 में, दुनिया भर में लगभग 28 करोड़ 10 लाख अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी जन थे, जो कुल वैश्विक आबादी का लगभग 3.6 प्रतिशत हिस्सा हैं.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने अपने सन्देश में कहा है कि जिन लोगों को अपनी परिस्थितियों के कारण गतिवान रहना पड़ता है, उन्हें दोषारोपण, कलंकित मानसिकता, विषमता, नफ़रत और नस्लभेद का व्यापक सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, “प्रवासी महिलाओं और लड़कियों को तो लिंग आधारित हिंसा के और ज़्यादा व गम्भीर जोखिम का सामना करना पड़ता है, और उनके पास मदद की पुकार लगाने के भी बहुत कम अवसर होते हैं.”

एंतोनियो गुटेरेश ने याद दिलाते हुए कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण सीमाओं पर लगी पाबन्दियों ने बहुत से प्रवासियों को ऐसे हालात में फँसा हुआ छोड़ दिया, जहाँ उनकी ना तो कोई आमदनी है और ना उन्हें आश्रय उपलब्ध है, वो अपने घरों को भी वापिस नहीं लौट सकते हैं, वो अपने परिवारों से बिछड़े हुए हैं, और एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “महामारी के दौरान इन कठिन हालात के बावजूद, प्रवासी जन ने, हर जगह समाजों को समृद्ध बनाया है और वो अक्सर महामारी का सामना करने के प्रयासों में भी अग्रिम मोर्चों पर पाए गए हैं – वैज्ञानिकों के रूप में, स्वास्थ्य पेशेवरों और अनिवार्य सेवाएँ मुहैया करने वाले कामगारों के रूप में.”

क्षमताओं का लाभ उठाना

वर्ष 2021 के अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस की थीम है – मानव गतिशीलता की क्षमताओं का लाभ उठाना.

यूएन प्रमुख के अनुसार, दुनिया को ये लक्ष्य हासिल करने के लिये, ज़्यादा अन्तरराष्ट्रीय सहयोग और ज़्यादा सहानुभूति व हमदर्दी भरा रुख़ अपनाना होगा. 

उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “इसका मतलब है कि सीमाओं का प्रबन्धन ज़्यादा मानवीय तरीक़े से करना होगा, हर किसी के मानवाधिकारों व मानवीय ज़रूरतों का सम्मान करना होगा, और ये सुनिश्चित करना होगा कि प्रवासियों को भी, कोविड-19 निरोधक वैक्सीन के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियानों में शामिल किया जाए.”

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन व धन प्रेषण - आँकड़ों में.
UN News/Pratishtha
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन व धन प्रेषण - आँकड़ों में.

इसका ये मतलब है कि नियमित प्रवेश के रास्तों को मान्यता दी जाए और प्रवास के लिये ज़िम्मेदार मूल कारणों के समाधान निकाल जाएँ, जिनमें गहरी पैठ जमाए हुए विषमताएँ और मानव तस्करी भी शामिल हैं.

सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवास के लिये ग्लोबल कॉम्पैक्ट को लागू करने के बारे में हो रही प्रगति का जायज़ा लेने के लिये, अगले वर्ष अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा फ़ोरम आयोजित होगा.

यूएन प्रमुख की नज़र में, प्रवासियों का पूर्ण समावेश सुनिश्चित करने के प्रयासों को आगे बढ़ने के लिये, ये एक अच्छा मौक़ा है क्योंकि हमें, ज़्यादा सहनशील, न्यायसंगत और टिकाऊ समाज बनाने हैं.

प्रवासी विरोधी धारणाएँ

इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस, ऐतिहासिक ब्रसेल्स सम्मेलन के बिल्कुल 70 वर्ष पूरे होने के मौक़े पर मनाया जा रहा है. ध्यान रहे कि ब्रसेल्स सम्मेलन में से ही अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) वजूद में आया था.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM के महानिदेशक एंतोनियो वितॉरिनो ने इस दिवस पर अपने सन्देश में, बन्द रखी गई सीमाओं और बिछड़े हुए परिवारों की दिल दहला देने वाली तस्वीरों को याद दिया. उन्होंने कोविड-19 के कारण हुई आर्थिक तबाही को भी याद किया है जो हाल के वर्षों में एक आम घटना बन गई है. 

उनके अनुसार, वैश्विक महामारी ने, प्रवासियों के विरुद्ध धारणाओं व भावनाओं की एक नई लहर को फिर से जन्म दे दिया है. इनमें प्रवासियों को, राजनैतिक मोहरे बनाए जाने का बढ़ता चलन भी शामिल है.

उन्होंने कहा, “दोनों ही अस्वीकार्य हैं.”

उनकी नज़र में, महामारी का सामना करने के उपायों ने, हर किसी को सुरक्षित रखने के प्रयासों में, प्रवासी कामगारों की महत्ता को भी रेखांकित किया है.

उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया, “प्रवासियों के मेज़बान समाजों में सकारात्मक सामाजिक व आर्थिक प्रभाव, और प्रवासियों द्वारा अपने मूल स्थानों में, निम्न व मध्य आय वाले देशों में समुदायों को, गत वर्ष भेजी गई 540 अरब डॉलर की धनराशि, वो औद्योगिक, उद्यमशीलता और सामुदायिक पैमाने हैं जिनसे हम सभी लाभान्वित होते हैं.”

दो आवश्यकताएँ

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के मुखिया ने दलील देते हुए कहा कि मानव गतिशीलता का पूर्ण लाभ उठाने के लिये, दो चीज़ें बहुत ज़रूरी हैं.

पहली, सरकारों को अपनी कथनी को करनी में तब्दील करना होगा और प्रवासियों को, उनकी क़ानूनी हैसियत की परवाह किये बिना, अपनी सामाजिक व आर्थिक पुनर्बहाली की योजनाओं में शामिल करना होगा.

दूसरी, देशों को प्रवासन के लिये, ऐसे क़ानूनी चैनल लागू करने होंगे जो राष्ट्रीय सम्प्रभुताओं और गतिवान लोगों के मानवाधिकारों का सम्मान करें.
नस्लवाद और शिक्षा

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृति संगठन – UNESCO की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले का कहना है कि वायरस के फैलाव को रोकने की ज़रूरतों को, एक बेहतर जीवन की सुलभता को ख़तरे में नहीं डालना चाहिये.

उन्होंने याद करते हुए कहा कि जबरन प्रवासन के लिये ज़िम्मेदार कारक, संघर्षों में बढ़ोत्तरी, बढ़ती खाद्य असुरक्षा और जलवायु आपदा के कारण, और ज़्यादा मज़बूत हो रहे हैं.

ऑड्री अज़ूले ने यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) द्वारा नवम्बर 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया जिसमें दिखाया गया है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान, जबरन विस्थापन का शिकार हुए लोगों की संख्या दो गुना बढ़ गई है.

उनकी नज़र में, ये आँकड़े दिखाते हैं कि कमज़ोर हालात वाली आबादियों की हिफ़ाज़त के लिये, कार्रवाई करने की कितनी तत्काल ज़रूरत है.
प्रवासियों का बन्दीकरण बन्द हो

दुनिया भर में लाखों – करोड़ों प्रवासियों को, उनके इसी दर्जे के कारण बन्दी बनाकर रखा गया है जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी हैं.

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने, शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में सदस्य देशों से, इस चलन को बन्द करने, और बच्चों को बन्दी बनाने पर तुरन्त रोक लगाने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा है, “केवल किसी देश की सीमा पार करने या उनके पास समुचित दस्तावेज़ नहीं होने के कारण, लोगों के साथ, अपराधियों जैसा बर्ताव नहीं किया जाना चाहिये. इन लोगों को व्यापक पैमाने पर बन्दी बनाने के चलन को, आप्रवासन नियंत्रण का केवल अनौपचारिक उपाय नहीं माना जा सकता.”

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 1990 के बाद से, आप्रवासन बन्दीकरण के प्रयोग में ख़ासी बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून में ये प्रतिबन्धित है.

बन्दीकरण का प्रवासियों के स्वास्थ्य और उनकी निजी साख़ पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है, जिसमें उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. इनमें चिन्ता, अवसाद, बहिष्करण और पीटीएसडी, और यहाँ तक कि आत्महत्या करने के जोखिम भी शामिल हैं.

विशेष रैपोर्टेयर और स्वतंत्र मानवाधिकार विशषज्ञ, जिनीवा स्थित, यूएन मानवाधिकार परिषद नियुक्त करती है. उनकी ज़िम्मेदारी, मानवाधिकार सम्बन्धी किसी विषय या मुद्दे, या फिर किसी देश की स्थिति की जाँच-पड़ताल करके रिपोर्ट प्रस्तुत करना है. ये पद मानद है और उन्हें उनके कामकाज के लिये, संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं दिया जाता है.

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