पहाड़ों पर कूड़े का ढेर - पर्यटन से ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी के बीच पहाड़ी पर्यटन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ, प्लास्टिक प्रदूषण में भी वृद्धि हुई है जिससे, पर्वतीय पारीस्थितिकी तंत्र पर ख़तरा मण्डराने लगा है. स्रोत से समुद्र तक प्रदूषण से निपटने के उद्देश्य से, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने, एलेन मैकआर्थर फाउण्डेशन के सहयोग से ‘वन प्लैनेट नैटवर्क’ के टिकाऊ पर्यटन कार्यक्रम के तहत, ‘वैश्विक पर्यटन प्लास्टिक पहल’ विकसित की. इस पहल के ज़रिये, पर्वतीय प्रदूषण से निपटने के लिये कई अभियान चलाए जा रहे हैं.

नेपाली पर्वतारोही, निर्मल पुरजा ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटियों को फ़तह करने में अनेक वर्ष लगाए हैं. उन्होंने वर्ष 2019 में सात महीने की अवधि में, दुनिया के 8000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले सभी 14 पहाड़ों पर चढ़ाई पूरी की. इतने कम समय में ऐसा करने वाले वो पहले पर्वतारोही हैं.

लेकिन निर्मल पुरजा हाल ही में, दुनिया के आठवें सबसे ऊँचे पर्वत, नेपाल के माउण्ट मनासलू की यात्रा पर गए तो मगर, केवल शिखर पर विजय हासिल करने के लिये नहीं.  इस बार वो वहाँ गए, एक अनोखे उद्देश्य से - अन्य पर्वतारोहियों द्वारा छोड़ी गई रस्सियों और ऑक्सीजन कनस्तरों जैसे कचरे के ढेर को साफ़ करने के लिये.

निर्मल पुरजा पर नेटफ़्लिक्स की डॉक्यूमेण्ट्री -14 Peaks बन रही है. इसकी शूटिंग के दौरान, उनकी टीम 500 किलोग्राम कचरा उठाएगी. वो अब कचरे के लिये बदनाम हो चुके, माउण्ट एवरेस्ट पर चढ़कर सफ़ाई करने की योजना बना रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के लिये हाल ही में माउण्टेन एडवोकेट नामित हुए निर्मल पुरजा ने कहा, "मैंने हिमालय में जलवायु परिवर्तन और कचरे का असर अपनी आँखों से देखा है. हम इन पवित्र पहाड़ों को बहाल करना और उन्हें अपना घर कहने वाले सभी लोगों की रक्षा करना चाहते हैं."

हाल के वर्षों में, और विशेष रूप से, कोविड-19 महामारी के दौरान, लाखों पर्यटकों ने पहाड़ों का रुख़ किया, मगर उन्होंने कचरे के ढेर भी पीछे छोड़े हैं. 74 देशों के एक हज़ार 750 पर्वत उत्साही लोगों पर हाल ही में किये गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि उनमें से लगभग 99.7 प्रतिशत ने अपनी पर्वत यात्रा के दौरान कूड़े-कचरे के ढेर देखे. इसमें अधिकांश प्लास्टिक, जैविक कचरा और कागज या कार्डबोर्ड थे, विशेष रूप से पगडण्डियों के किनारे, कारपार्क के पास या विश्राम स्थलों पर.

सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में, 60 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कचरे में वृद्धि देखी, जबकि 75 प्रतिशत से अधिक को, कोविड-19 से सम्बन्धित कूड़े, जैसे कि मास्क या हाथ स्वच्छ करने वाली रसायन (Hand Sanitizer) की बोतलें दिखीं. यह सर्वेक्षण, एक ग़ैर-लाभकारी पर्यावरण समूह - GRID-Arendal, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), बेसल के सचिवालय, रॉटरडैम और स्टॉकहोम प्रदूषण-विरोधी सम्मेलनों और भागीदारों ने किया था.

निचले इलाक़े में ख़तरा

निर्मल पुरजा और उनकी टीम, अब माउण्ट एवरेस्ट, K2 और अमा डबलम जैसी पर्वत चोटियों  पर सफ़ाई अभियान चलाने की तैयारी में है.
Nimsdai / Sandro
निर्मल पुरजा और उनकी टीम, अब माउण्ट एवरेस्ट, K2 और अमा डबलम जैसी पर्वत चोटियों पर सफ़ाई अभियान चलाने की तैयारी में है.

विशेषज्ञों का कहना है कि विशालकाय दिखाई देने वाले पर्वतों का पारिस्थितिकी तंत्र अत्यन्त नाज़ुक होता है. कचरा वन्यजीवों के लिये ख़तरा है और पानी को प्रदूषित करता है, जिससे निचले इलाक़ों में रहने वाले समुदायों के लिये स्वास्थ्य जोखिम पैदा होता है. 

अधिकांश प्लास्टिक और अन्य कचरा, हवा, हिमनदों और बारिश के पिघलने से बहकर, आख़िर में नदियों और महासागरों में गिरता है. यह विशेष रूप से चिन्ताजनक है क्योंकि पर्वत श्रृँखलाएँ अपने हिमनदों, झीलों और नदियों के ज़रिये, दुनिया को जल प्रदान करती हैं, जिससे एक अरब 90 करोड़ लोगों को ताज़ा पानी उपलब्ध होता है.

यूनेप के पर्वत पारिस्थितिकी तंत्र विशेषज्ञ, मथायस जुरेक कहते हैं, "कोविड-19 संकट, पर्वतीय पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों पर इसके प्रभावों पर पुनर्विचार करने का एक अवसर है. हमें पर्वतीय क्षेत्रों का क्षरण रोकने, उसे ख़त्म करने और उलटने के लिये, अधिक टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है. अगर पर्वतीय पर्यटन सही ढंग से किया जाए, तो इससे पर्वतीय समुदायों को अधिक टिकाऊ जीवन जीने में मदद मिल सकती है."

यूनेप, बेसल, रॉटरडैम और स्टॉकहोम सम्मेलनों एवं GRID-Arendal द्वारा एक संयुक्त विश्लेषण में, पर्वतीय क्षेत्रों में आगन्तुक गतिविधि की जाँच की गई. इसमें पाया गया कि महत्वपूर्ण मात्रा में ठोस कूड़ा और अपशिष्ट जल के लिये पर्यटक ज़िम्मेदार हैं, जो भूजल, नदियों, झीलों और मिट्टी को प्रदूषित कर सकता है. 

विश्लेषण में कहा गया है कि फ़ार्मास्यूटिकल्स, बैटरी और स्वच्छता उत्पादों सहित कुछ प्रकार के कचरे में ख़तरनाक रसायन भी हो सकते हैं. यह सारांश, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) द्वारा हाल ही में जारी प्रकाशन का हिस्सा है, जिसका शीर्षक है - पर्वतीय पर्यटन का सतत विकास.

मथायस जुरेक कहते हैं, "पर्वतारोहण से अलबत्ता, स्थानीय समुदायों को निस्सन्देह आर्थिक लाभ मिलता है, लेकिन सही सन्तुलन बनाकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बड़े पैमाने पर पर्वतीय पर्यटन के असर का उचित प्रबन्धन किया जाए.

समाधान

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर में ढलानों की सफ़ाई के लिये पर्वतीय प्रदूषण के नतीजों को लेकर जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है. इसके लिये, यूनेप और पर्वतीय खेल संघों के साथ काम कर रही अन्तरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति ने ‘माउण्टेन हीरो बनने के 10 क़दम’ नामक एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका प्रकाशित की है, जिसमें बताया गया है कि पहाड़ों पर आने वाले पर्यटक किस प्रकार अपने पर्यावरण पदचिन्ह कम कर सकते हैं.

यूनेप के नेतृत्व वाले - बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन, क्लीन सीज़, एडॉप्ट ए रिवर और द टाइड टर्नर चैलेंज जैसे कई अभियानों के ज़रिये, पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे को कम करने और पारिस्थितिक तंत्र के लिये प्लास्टिक प्रदूषण के ख़तरों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. विश्व स्तर पर, ऐसे अनेक अभियान हैं, साथ ही कई देशों में प्लास्टिक थैलों समेत एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लगाने जैसे कई क़ानून भी बने हैं.

हालाँकि इन क़दमों से स्थानीय स्तर पर भले ही थोड़ी-बहुत सफलता मिली हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यूनेप के आँकड़ों को देखते हुए, 2030 तक प्लास्टिक प्रदूषण के दोगुना होने की आशंका है, जो सम्वेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के लिये ख़तरनाक साबित हो सकता है.

मथायस जुरेक कहते हैं, "समाधान  हैं - एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध, प्लास्टिक उत्पादों का कम इस्तेमाल, प्लास्टिक की जगह इस्तेमाल हो सकने वाले नवीन उत्पादों का वित्तपोषण और विकास, री-सायकलिंग और अन्ततः, एक परिपत्र अर्थव्यवस्था, जिसमें सभी कुछ या तो पुन: उपयोग या री-सायकिल हो सके."

पहाड़ों पर ही, स्थानीय प्रथाओं और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों के रास्तों के साथ-साथ, झोपड़ियों और आश्रयों के आस-पास संरक्षित क्षेत्र बनाकर, जंगल को संरक्षित करना भी समाधान का एक हिस्सा हो सकता है.

UIAA माउण्टेन प्रोटेक्शन कमीशन की अध्यक्ष, कैरोलिना एडलर कहती हैं, "पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा करना, उस विस्मयपूर्ण भावना को जीने और महसूस करने का एक शानदार तरीक़ा है, जो ये भव्य परिदृश्य देखकर निस्सन्देह उजागर होती है. पहाड़ों के रक्षकों के रूप में, पर्वतारोही समुदाय से भी यह भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है कि हम अपने पीछे न केवल कोई निशान छोड़ें बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करके, वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिये, अन्य लोगों को इस वातावरण की रक्षा करने के लिये प्रेरित करें."

2020 के बाद के नए वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के पहले विस्तृत मसौदे में, प्रदूषण को उस स्तर तक कम करने के लिये तत्काल कार्रवाई का आहवान किया गया है, जो जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यों और मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नहीं हों. 

मथायस जुरेक के मुताबिक़, "प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुक़सान से, अलग-अलग नहीं निपटा जा सकता है. हमें पहाड़ के कचरे के बेहतर प्रबन्धन के लिये, नवीन और कल्पनाशील प्रोत्साहन तरीक़ों और समाधानों की ज़रूरत है."

11 दिसम्बर को मनाया जाने वाला, अन्तरराष्ट्रीय पर्वत दिवस, इस बार टिकाऊ पर्वतीय पर्यटन पर केन्द्रित रहा. इसका लक्ष्य था, मानवता के लिये पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र के मूल्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना, ताकि प्रदूषण से बचाव के लिये जागरूकता फैल सके और ज़रूरी कार्रवाई हो सके.

निर्मल पुरजा का कहना है कि ऐसा करना, प्राचीन पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित करने की कुंजी है. उन्होंने, वर्ष 2019 में माउण्ट एवरेस्ट के ऊपर यातायात जाम की एक तस्वीर खींचकर दिखाया था कि वहाँ फैला कूड़ा-करकट किस तरह पहाड़ को घेरता जा रहा है. यह उन वजहों में से एक है, जिनके कारण पुरजा ने ‘बिग माउण्टेन क्लीनअप’ अभियान शुरू करने के बारे में सोचा था. 

2021 की गर्मियों की शुरुआत में, उन्होंने और उनकी टीम ने, मानसलू से कचरा हटाना शुरू किया. इसके बाद वो एवरेस्ट, K2 और अमा डबलम का रुख़ करेंगे. 
निर्मल पुरजा का कहना है कि औसत पर्वतारोही तम्बू, ऑक्सीजन टैंक, रस्सियों और मानव अपशिष्ट सहित, लगभग 8 किलो कचरा अपने पीछे छोड़ जाते हैं. उन्हें उम्मीद है कि वह अस्थाई पर्यटन से

दुनिया की पर्वत चोटियों को होने वाले नुक़सान के बारे में जागरूकता बढ़ाने में सफल होंगे. उनका कहना है, "हम सभी को व्यवहार परिवर्तन व बदलाव लाने, और इन ख़ूबसूरत पहाड़ों की रक्षा करने के लिये, मिलकर कार्रवाई करने की ज़रूरत है." 

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.

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