CTBT की 25वीं वर्षगाँठ – परमाणु हथियार मुक्त दुनिया का आहवान

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि संगठन (CTBTO) के कार्यकारी सचिव रॉबर्ट फ़्लॉयड ने सोमवार को, सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा है कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन. उन्होंने इस सन्धि के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सुरक्षा परिषद में आयोजित एक बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.  

कार्यकारी सचिव रॉबर्ट फ़्लॉयड ने इस सन्धि के लगभग सार्वभौमिक अनुपालन को रेखांकित करते हुए बताया कि 185 सदस्य देशों ने इस पर हस्ताक्षर किये हैं और 170 देश, इसे अनुमोदित (Ratify) कर चुके हैं. 

उन्होंने कहा कि इस सन्धि ने परमाणु परीक्षण के विरुद्ध इतने शक्तिशाली मानक सृजित किये हैं और उन्हें बरक़रार रखा है, कि इसे पारित किये जाने के बाद से अब तक एक दर्जन से भी कम परमाणु परीक्षण किये गए हैं. 

इस सदी में महज़ एक देश ने ही इन सन्धि का उल्लंघन किया है.

उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध सन्धि' वर्ष 1996 में पारित की गई थी. उससे पहले, हर वर्ष किये जाने वाले परमाणु परीक्षण का विस्फोटक उत्पाद, हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम का, औसतन लगभग एक हज़ार गुना था. 

“परमाणु परीक्षण ना केवल भूराजनैतिक अस्थिरता पैदा करते हैं और ज़्यादा शक्तिशाली व घातक परमाणु हथियारों के विकास को बल देते हैं, इनसे इतनी मानवीय पीड़ा और पर्यावरणीय क्षति भी होती है, जिसे बयान नहीं किया जा सकता.”

“CTBT की वजह से, हमने इस दुनिया को बहुत पीछे छोड़ दिया है.”

इस सन्धि में, अपने बुनियादी मिशन के अलावा, एक वैश्विक नैटवर्क के रूप में, सत्यापन के लिये एक तंत्र की भी व्यवस्था की गई है.

इसके तहत नागरिक व वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिये उपयोगी डेटा प्रदान किया जाता है, जिनका इस्तेमाल सुनामी लहरों की चेतावनी और जलवायु परिवर्तन अध्ययनों के लिये किया जाता है.

इसी सन्धि के तहत, 'अन्तरराष्ट्रीय निगरानी प्रणाली' (IMS) की व्यवस्था की गई है, जिसमें निरन्तर, वास्तविक समय में पृथ्वी पर किसी भी विस्फोटक परमाणु गतिविधि पर नज़र रखी जाती है. 

अब तक इस काम को 90 फ़ीसदी पूरा किया जा चुका है और 300 स्टेशनों को प्रमाणिकता प्रदान की गई है. 

नए सिरे से प्रयास

मगर, सन्धि पर अब तक 185 हस्ताक्षरों के बावजूद, इसे अभी लागू नहीं किया जा सका है. इसके लिये निम्न आठ देशों से अनुमोदन की आवश्यकता है: अमेरिका, चीन, ईरान, इसराइल, मिस्र, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया.

संगठन के कार्यकारी सचिव ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि 25वीं वर्षगाँठ, फिर से अपने संकल्पों को पुष्ट करने का अवसर है.

उनके मुताबिक़, नागरिक समाज और युवजन के साथ, इस मुद्दे पर सम्पर्क व सम्वाद बढ़ाने की आवश्यकता है और उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन.

विश्व भर में 13 हज़ार 400 परमाणु हथियार मौजूद हैं, कुछ देश अब भी परमाणु क्षमता हासिल करने का प्रयास जारी रखे हुए हैं, जबकि अन्य देश, अपने परमाणु हथियारों के भण्डार को बढ़ाने में जुटे हैं. 

निरस्त्रीकरण मामलों की यूएन अवर महासचिव इज़ुमी नाकामित्सु ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि परमाणु हथियारों के भण्डार के विस्तार और उसके आधुनिकीकरण की दिशा में कोशिशें एक चिन्ताजनक रुझान है.

उन्होंने सचेत किया कि हथियार नियंत्रण के लिये वैश्विक तंत्र कमज़ोर हुए हैं, बहुपक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण कूटनीति का क्षरण हुआ है. 

उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार सम्पन्न देशों के बीच ख़राब होते रिश्तों के मद्देनज़र, परमाणु परीक्षणों के विरुद्ध मानकों को हमेशा के लिये प्रभाव में मानकर नहीं चला जा सकता.

अवर महासचिव ने नेवाडा के मरुस्थलों से लेकर ऑस्ट्रेलिया के आउटबैक इलाक़े का उल्लेख करते हुए क्षोभ जताया, कि परमाणु परीक्षणों से अनछुए पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और निर्बल समुदायों को गहरी क्षति हुई है. 

चुनौतियों पर पार पाना

यूएन की वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़, सन्धि की 25वीं वर्षगाँठ हर्ष का विषय है, मगर आगे के रास्ते में पेश चुनौतियों पर क़ाबू पाने के लिये भी विचार करना होगा. 

उन्होंने कहा कि ऐसा अनेक मोर्चों पर किया जा सकता है.

पहला, युवजन को और ज़्यादा सशक्त बनाना होगा. दूसरा, यह समझना होगा कि CTBT निर्वात में नहीं, बल्कि अन्य प्रक्रियाओं के साथ तालमेल बनाकर काम करती है.

तीसरा, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को सन्धि संगठन की तकनीकी क्षमताओं को मज़बूती देना करना जारी रखना होगा. 

उच्चस्तरीय सम्मेलन

CTBT को लागू किये जाने के मुद्दे पर पिछले सप्ताह आयोजित एक उच्चस्तरीय सम्मेलन में, इसे बाध्यकारी बनाए जाने की मांग उठी थी, ताकि सभी परमाणु विस्फोटों का पूर्ण रूप से अन्त किये जाने का लक्ष्य साकार किया जा सके. 

सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले 60 से अधिक देशों के मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद भी शामिल हुए. 

महासचिव गुटेरेश ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए, सन्धि पर हस्ताक्षर या उसे अनुमोदित ना करने वाले आठ देशों से, जल्द से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया था. 

उन्होंने क्षोभ ज़ाहिर करते हुए कहा था कि आवश्यकता व तात्कालिकता को देखते हुए यह निराशाजनक है कि सन्धि अभी तक लागू नहीं हो पाई है. 

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