नीला आकाश विचार: वायु प्रदूषण के बार में कुछ अहम जानकारी

दुनिया भर में, कुल आबादी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा, अपने दैनिक जीवन में, हर दिन, हानिकारक प्रदूषित हवा में साँस लेता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने, मौजूदा दौर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दा क़रार दिया है. 7 सितम्बर को, ‘नीले आसमानों के  प्रथम अन्तरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ के अवसर पर, यूएन न्यूज़ की प्रस्तुति – कि ये स्थिति कितनी बुरी है और इसका सामना करने के लिये क्या किया जा रहा है.

1) वायु प्रदूषण से लाखों की मौत होती है और पर्यावरण को नुक़सान पहुँचता है

ये मुद्दा, हाल के महीनों में, ख़बरों की सुर्ख़ियों से भले ही हट गया लगता हो, मगर वायु प्रदूषण, अब भी बहुत से लोगों के लिये घातक बना हुआ है; वायु प्रदूषण के कारण, दिल की बीमारियाँ, फेफड़ों के रोग, लंग कैंसर और पक्षाघात जैसी स्थितियाँ बनती हैं, और हर साल समय से पहले होने वाली 9 मौतों में से एक के लिये, वायु प्रदूषण ही ज़िम्मेदार माना जाता है. दुनिया भर में, हर वर्ष लगभग 70 लाख लोगों की मौत, समय से पहले ही हो जाती है.

वायु प्रदूषण, हमारे प्राकृतिक वायावरण को भी नुक़सान पहुँचाता है. ये हमारे समुद्रों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम कर देता है, पेड़-पौधों के विकास को कठिन बनाता है, और जलवायु परिवर्तन में योगदान करता है.

परिवहन क्षेत्र, वायु प्रदूषण की बहुत बड़ी मात्रा के लिये ज़िम्मेदार है
Unsplash/Alexander Popov
परिवहन क्षेत्र, वायु प्रदूषण की बहुत बड़ी मात्रा के लिये ज़िम्मेदार है

वायु प्रदूषण के कारण होने वाले नुक़सानों के बावजूद, ऐसे चिन्ताजनक संकेत हैं कि इस पर अनेक देशो में अब भी गम्भीर ध्यान नहीं दिया जाता है: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP ने पहली बार वायु गुणवत्ता क़ानूनों का आकलन किया है जिसकी रिपोर्ट दो सितम्बर को जारी की गई. इसमें बताया गया है कि 43 प्रतिशत देशों में, वायु प्रदूषण के लिये कोई क़ानूनी परिभाषा निर्धारित ही नहीं है, और दुनिया के लगभग एक तिहाई देशों में अब भी, मुक्त स्थानों पर वायु गुणवत्ता के क़ानूनी मानक लागू किये जाने बाक़ी हैं.

2) प्रमुख कारण

वायु प्रदूषण की ज़्यादातर मात्रा के लिये पाँच प्रमुख मानवीय गतिविधियाँ ज़िम्मेदार हैं: कृषि, परिवहन, उद्योग, अपशिष्ट और पारिवारिक गतिविधियाँ.

खेतीबाड़ी की गतिविधियों और मवेशियों से मीथेन गैस निर्मित होती है, जोकि ग्रीन हाउस समूह की एक बेहद शक्तिशाली गैस है. इसके कारण, अस्थमा और अन्य साँस सम्बन्धी बीमारियाँ होती हैं. कूड़ा-कचरा और अपशिष्ट जलाए जाने के कारण मीथेन गैस बनती है जिससे अन्य प्रदूषक और विषैले तत्व पैदा होते हैं, जो अन्ततः हमारे खाने-पीने की चीज़ों में शामिल हो जाते हैं. इसके अलावा उद्योगों से, कार्बन डाइ ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, बारीक पदार्थ कण और रसायन जारी होते हैं.

परिवहन क्षेत्र, हर साल, समय से पहले ही, लाखों लोगों की मौत के लिये ज़िम्मेदार है, अलबत्ता दुनिया भर में, ख़तरनाक सीसायुक्त ईंधन का प्रयोग, चरणबद्ध तरीक़े से, अगस्त 2021 तक बन्द किया जा चुका है.

नाइजीरिया के एक 54 वर्षीय व्यक्ति को, टाइप-2 डायबटीज़ के कारण, अपना दाहिना पैर गँवाना पड़ा.
WHO / Andrew Esiebo / Panos Pictures
नाइजीरिया के एक 54 वर्षीय व्यक्ति को, टाइप-2 डायबटीज़ के कारण, अपना दाहिना पैर गँवाना पड़ा.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस महत्वपूर्ण पड़ाव की सराहना करते हुए कहा है कि इस क़दम से, हर साल लगभग 10 लाख लोगों की, समय पूर्व मौतें रोकने में मदद मिलेगी.

अब भी वाहन, बारीक पदार्थ कण, ओज़ोन, ब्लैक कार्बन और नाइट्रोजन डाइ ऑक्साइड, वातावरण में भेजते हैं, इन हालात में ऐसा अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य स्थितियों के इलाज में वैश्विक स्तर पर लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का ख़र्च आता है.

3) ये एक तात्कालिक मुद्दा है

संयुक्त इस मुद्दे के बारे में इस समय जो सावधानी की घण्टी बजा रहा है, उसका कारण ऐसे सबूत हैं कि इनसानों पर वायु प्रदूषण के प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहे हैं. हाल के वर्षो में वायु प्रदूषण के कारण, लोगों में डायबटीज़, डिमेन्शिया, मस्तिष्क का बाधित विकास और बुद्धिमत्ता के स्तर में कमी होना शामिल हैं.

इससे भी ज़्यादा, हमें वर्षों से ये मालूम है कि वायु प्रदूषण ही, हृदय रोगों व साँस सम्बन्धी बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है.

इस तरह के प्रदूषण के बारे में चिन्ताएँ, जलवायु संकट का सामना करने के लिये वैश्विक कार्रवाई बढ़ाने के साथ भी जुड़ती हैं: ये एक पर्यावरणीय मुद्दा होने के साथ-साथ, स्वास्थ्य मुद्दा भी है, और वैश्विक तापमान में कमी लाने के लिये, आसमानों को साफ़ करने के क़दम, काफ़ी लम्बे समय तक उठाते रहने होंगे.

अन्य पर्यावरणीय हानिकारक प्रभावों में, भूमि की उर्वरता घटना, जल बहाव में ख़राबी, ताज़ा पानी के स्रोतों के लिये ख़ते पैदा होना और फ़सलो में कम उपज मिलना शामिल हैं.

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