नाइजीरिया: ‘भयावह’ हमलों में अनेक आम नागरिकों की मौत, घटना की कठोर निन्दा  

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सप्ताहांत के दौरान, नाइजीरिया के ज़ामफारा प्रान्त में स्तब्धकारी हमलों में बड़ी संख्या में आम लोगों के मारे जाने की कड़ी निन्दा की है. 

मीडिया ख़बरों के अनुसार, हथियाबन्द दस्यु गुट द्वारा किये गए इन हमलों में 200 लोगों की मौत होने की आशंका है और क़रीब 10 हज़ार विस्थापित हुए हैं. 

बताया गया है कि पिछले सप्ताह इस गुट के छिपने के ठिकानों पर सैन्य हवाई कार्रवाई के बाद, इन हमलों को अंजाम दिया गया है. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सोमवार को जारी अपने वक्तव्य में पीड़ितों के परिवारजनों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना व्यक्त की है.

महासचिव गुटेरेश ने नाइजीरियाई प्रशासन से, इस जघन्य घटना के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिये, कोई कसर ना छोड़ने का आग्रह किया है.

उन्होंने भरोसा दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र, आतंकवाद, हिंसक चरमपंथ और संगठित अपराध के विरुद्ध लड़ाई में नाइजीरियाई सरकार और स्थानीय जनता के साथ एकजुट है.  

अप्रैल 2021 में, यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने चेतावनी जारी की थी कि वर्षों की असुरक्षा के कारण लेक चाड बेसिन में मानवीय आपात हालात पैदा हो गए हैं.

क़रीब 33 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं. अक्टूबर में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने आगाह किया था कि देश के इस हिस्से में रह रहे विस्थापित परिवार, भुखमरी के कगार पर पहुँच रहे हैं.

हिंसक अपराधों में तेज़ी

नाइजीरिया के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में, 2020 से ही सामूहिक रूप से अगवा किये जाने और अन्य हिंसक अपराधों की घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है. 

हिंसा प्रभावित बोर्नो, एडामाव और योबे में, लगभग 44 लाख लोगों को, हाल के समय में खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है. 

10 लाख से अधिक बच्चे पहले से ही कुपोषण का शिकार हैं.

पिछले वर्ष, स्कूलों पर सिलसिलेवार हमलों और अगवा किये जाने की घटनाओं के बाद, यूएन के अनेक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि सदमे का शिकार हुए किशोरों की मदद के लिये ज़रूरी प्रयास नहीं किये जा रहे हैं. 

नाइजीरिया में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन्स ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ, बड़ी संख्या में लोगों के लिये जीवन का हिस्सा बनती जा रही हैं. 

जल्दी से धन जुटाने की कोशिश करने वाले दस्यु गुट, परिवारों और प्रशासन को फ़िरौती की रक़म देने के लिये मजबूर करते हैं. 

ये गुट ऐसे संस्थानों को अपना निशाना बनाते हैं, जोकि ग्रामीण इलाक़ों में स्थित हैं और प्रशासन की पहुँच से बाहर हैं.

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