दस करोड़ से अधिक जबरन विस्थापन का शिकार – UNHCR

शरणार्थी मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने गुरूवार को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए बताया है कि विश्व भर में क़रीब दस करोड़ लोग अपना घर छोड़कर भागने के लिये मजबूर हुए हैं. बड़े पैमाने पर विस्थापन के लिये खाद्य असुरक्षा, जलवायु संकट, यूक्रेन में युद्ध और अफ़्रीका से अफ़ग़ानिस्तान तक अन्य आपात परिस्थितियों को मुख्य वजह बताया गया है.

यूएन एजेंसी प्रमुख फ़िलिपो ग्रैण्डी ने कहा, पिछले दशक के हर एक साल में यह संख्या बढ़ी है.

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को एक साथ आकर मानव त्रासदी से निपटने, हिंसक टकरावों को सुलझाने और स्थाई समाधान ढूँढने के लिये कार्रवाई करनी होगी, या फिर ये भयावह रुझान जारी रहेगा.

शरणार्थी संगठन के अनुसार, विश्व में हर 78 में एक व्यक्ति विस्थापित है, और इसे एक ऐसा नाटकीय पड़ाव बताया गया है, एक दशक पहले जिसके बारे में सोच पाना कठिन था.

यूएन एजेंसी की वार्षिक ‘Global Trends’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 के अन्त तक, युद्ध, हिंसा, उत्पीड़न, और मानवाधिकार हनन के कारण विस्थापितों की संख्या आठ करोड़ 93 लाख आंकी गई.

वर्ष 2020 की संख्या से यह आठ फ़ीसदी की वृद्धि को दर्शाता है और दस साल पहले के आँकड़े के दोगुने से भी अधिक है.

2021 में इस संख्या में वृद्धि की वजह अनेकानेक हिंसक संघर्षों में आई तेज़ी और नए टकरावों का भड़कना है.

इस वर्ष मई महीने में विस्थापितों की संख्या ने 10 करोड़ के आँकड़े को छू लिया – यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के 10 सप्ताह बाद ऐसा हुआ है.

खाद्य असुरक्षा एक बड़ा कारण

यूक्रेन संकट के कारण वैश्विक स्तर पर अनाज और उर्वरक की क़िल्लत की आशंका प्रबल हुई है, और संयुक्त राष्ट्र राहतकर्मियों ने गम्भीर चिन्ता व्यक्त की है.

यूएन एजेंसी प्रमुख फ़िलिपो ग्रैण्डी से जिनीवा में एक प्रैस वार्ता के दौरान वैश्विक खाद्य असुरक्षा संकट और उसके कारण विस्थापितों की संख्या बढ़ने की आशंका पर एक प्रश्न पूछा गया.

उच्चायुक्त ग्रैण्डी के अनुसार यह सोचना कठिन है कि इससे अलग भी कोई स्थिति हो सकती है.

अगर आपके सामने युद्ध, मानवाधिकार [हनन], जलवायु, आप नाम लीजिये, से इतर खाद्य संकट भी हो...तो इससे रिपोर्ट में प्रस्तुत किये गए रुझानों में तेज़ी आएगी और हमने इस वर्ष के शुरुआती कुछ महीनों में यह तेज़ होते देखा है.

इसका अर्थ यह है अनाज और ईंधन की क़ीमतों में आए उछाल से निपटने के लिये उपाय बेहद अहम हो जाते हैं, जिससे बड़ी संख्या में विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या को भी रोका जा सकता है.

हिंसक टकराव के कारण विस्थापन

यूएन एजेंसी ने विश्व बैन्क के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कुल मिलाकर, 23 देशों में 85 करोड़ की आबादी को मध्यम- या उच्च-गहनता वाले हिंसक संघर्षो का सामना करना पड़ रहा है.

वर्ष 2021 में आठ करोड़ 93 लाख वैश्विक विस्थापितों में दो करोड़ 71 लाख शरणार्थी थे, जिनमें से दो करोड़ 13 लाख, यूएन एजेंसी के मैण्डेट के तहत हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) पर 58 लाख फ़लस्तीनियों की देखभाल का दायित्व है.

पाँच करोड़ 32 लाख लोग आन्तरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, 46 लाख शरण की तलाश में हैं और 44 लाख वेनेज़्वेला के नागरिक हैं, जिनके पास आर्थिक व राजनैतिक संकट के कारण देश छोड़कर जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.

मेज़बान देशों की उदारता

यूएन एजेंसी के आँकड़ों में विस्थापितों को शरण देने में विकासशील देशों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया है. विश्व में हर पाँच में चार शरणार्थी, निम्न- और मध्य-आय वाले देशों में रह रहे हैं.

तुर्की सबसे बड़ी संख्या में शरणार्थियों का मेज़बान देश है, जिसकी सीमाओं के भीतर 38 लाख शरणार्थियों ने शरण ली है.

इसके बाद, कोलम्बिया (18 लाख), युगाण्डा और पाकिस्तान (15-15 लाख) और जर्मनी (13 लाख) का स्थान है.

यूएन एजेंसी ने वर्ष 2021 में उपजे नए मानवीय संकटों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि इथियोपिया के टीगरे क्षेत्र में टकराव के कारण 25 लाख अतिरिक्त लोग देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हो गए. लगभग 15 लाख इस वर्ष के दौरान अपने घर वापिस लौटे हैं.

अगस्त 2021 में, अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालेबान का वर्चस्व स्थापित होने के बाद देश के भीतर और पड़ोसी देशों की ओर विस्थापन हुआ है.

आन्तरिक रूप से विस्थापितों की संख्या लगातार 15वें वर्ष बढ़ी है, जबकि सात लाख 90 हज़ार अफ़ग़ान नागरिक साल के दौरान वापिस आए हैं.  

2021 के दौरान, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन, इन सभी देशों में एक लाख से लेकर पाँच लाख तक के बीच, घरे विस्थापितों की संख्या बढ़ी है.

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