ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों का अपराधीकरण रोकने का आग्रह

एड्स/एचआईवी मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र संस्था (UNAIDS) ने ड्रग्स का सेवन करने वाले लोगों का अपराधीकरण किये जाने की रोकथाम करने और मादक पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाले नुक़सान को कम करने वाले कार्यक्रमों को ज़्यादा वित्तीय समर्थन देने का आग्रह किया है.    

‘मादक पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों का अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ (International Drug Users’ Day) हर साल, 1 नवम्बर को मनाया जाता है, जिसके तहत इस आबादी के अधिकारों के लिये समर्थन को पुष्ट किया जाता है. 

यूएनएड्स ने सोमवार को जारी अपने एक सन्देश में, एचआईवी, वायरल हेपेटाइटिस और अन्य स्वास्थ्य मुद्दों पर, आपराधीकरण किये जाने के नकारात्मक असर को दूर करने के लिये कार्रवाई किये जाने का आग्रह किया है. 

यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयिमा ने, अपराधीकरण को रोकने पर केन्द्रित क़ानूनी सुधारों को हासिल करने की प्रक्रिया में, ड्रग्स का सेवन करने वाले समुदायों की पूर्ण भागीदारी का आहवान किया है.  

उन्होंने कहा कि इससे विषमताओं और एड्स का ख़ात्मा करने में मदद मिलेगी. 

यूएन एजेंसी ने मानवाधिकारों और उन देशों को समर्थन देने के अपने संकल्प को रेखांकित किया है, जो ड्रग्स रखने को अपराध सूची से हटाने के लिये प्रयासरत हैं. 

ड्रग्स सेवन के कारण, एचआईवी संक्रमण सहित व्यक्तियों, समुदायों और समाजों को होने वाले नुक़सान में, नीतियों, कार्यक्रमों व सेवाओं के ज़रिये कमी लाने का प्रयास किया जाता है. 

मादक पदार्थों और ड्रग्स इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाले समूहों पर एचआईवी से संक्रमित होने का जोखिम सबसे अधिक होता है.   
इसके बावजूद वे हाशियेकरण का शिकार होते हैं, और उन्हें अक्सर स्वास्थ्य व सामाजिक सेवाएँ भी सुलभ नहीं हो पाती. 

वर्ष 2020 में, सभी नए एचआईवी संक्रमणों में नौ फ़ीसदी मामले, ड्रग्स इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में थे. सब-सहारा अफ़्रीका क्षेत्र के बाहर, यह आँकड़ा बढ़कर 20 प्रतिशत तक है. 

ड्रग्स का सेवन करने वालों में महिलाओं का अनुपात 30 फ़ीसदी से भी कम है, मगर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में, उनके एचआईवी संक्रमण के साथ रहने की सम्भावना कहीं अधिक होती है. 

स्वास्थ्य लाभ

यूएनएड्स ने बताया कि यूएन प्रणाली के तहत, स्वास्थ्य हानि में कमी लाने वाली सेवाओं और निजी रूप से ड्रग्स रखने को अपराध ना क़रार दिये जाने को बढ़ावा दिया जाता है. 

इन नीतियों से ड्रग्स पर निर्भर पर लोगों की संख्या नहीं बढ़ती, मगर इससे सार्वजनिक व निजी स्तर पर ठोस स्वास्थ्य लाभ प्रदान किये जा सकते हैं. 

स्वास्थ्य हानि मे कमी लाने वाले कार्यक्रमों को सुलभ बना कर और उन्हें सामयिक व पूर्ण रूप से लागू करके, एचआईवी संक्रमणों और वायरल हेपेटाइटिस बी व सी, टीबी और ड्रग्स के अत्यधिक सेवन के मामलों की रोकथाम की जा सकती है. 

लेकिन, ड्रग्स इंजेक्शन लेने वाले एक प्रतिशत से भी कम लोग उन देशों में रहते हैं, जहाँ यूएन की सिफ़ारिशों के स्तर पर सुइयों, सिरींज और दर्दनिवारण के वैकल्पिक उपायों की व्यवस्था है. 

आँकड़ों के अनुसार, निम्न और मध्य आय वाले देशों में, नुक़सान में कमी लाने वाले कार्यक्रमों के लिये धनराशि की कमी, 95 फ़ीसदी तक है. 

कार्रवाई की दरकार

यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि नुक़सान में कमी लाने वाले कार्यक्रमों की उपलब्धता के बावजूद, वे अक्सर सुलभ नहीं होते हैं. 

ड्रग्स सेवन का आपराधीकरण और कठोर दण्ड, जैसेकि कारावास की सज़ा, बड़े जुर्माने या अभिभावकों को उनके बच्चों से दूर रखा जाना, कुछ ऐसी ही रुकावटें हैं. 

बताया गया है कि निजी इस्तेमाल के लिये ड्रग्स रखने और सेवन के आपराधीकरण से, स्वास्थ्य के अधिकार को साकार करने पर नकारात्मक असर होता है. 

यूएन के सदस्य देशों ने इस वर्ष, आपराधीकरण, और ड्रग्स का सेवन करने वाली आबादियों को कथित रूप से कलंकित किये जाने व उनके साथ होने वाले भेदभाव का अन्त करने के लिये लक्ष्य निर्धारित किये हैं.

इस क्रम में वर्ष 2025 तक इन लक्ष्यों की प्राप्ति की समय सीमा रखी गई है, और यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि ड्रग्स इंजेक्शन लेने वाले 90 प्रतिशत लोगों की स्वास्थ्य हानि में कमी लाने वाले कार्यक्रमों तक पहुँच हो. 

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