जलवायु त्रासदी टालने के लिये, बिल्कुल अभी निर्णायक कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को विश्व नेताओं का आहवान करते हुए, जलवायु त्रासदी को टालने की ख़ातिर, बिल्कुल अभी निर्णायक कार्रवाई करने की पुकार लगाई है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 31 अक्टूबर से स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में शुरू होने वाले अगले जलवायु सम्मेलन कॉप26 से पहले, आयोजित एक आपदा सम्मेलन में शिरकत करते हुए ये आहवान किया है.

न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित इस अनौपचारिक गोलमेज़ सम्मेलन का आयोजन ब्रिटेन ने किया था जिसमें देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी हिस्सा लिया.

इस आपदा सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिये वित्तीय संसाधन जुटाने व अन्य उपायों के लिये और ज़्यादा कार्रवाई किये जाने पर ज़ोर दिया गया.

विश्व नेताओं ने, देशों की सरकारों द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों की रफ़्तार में धीमेपन व लक्ष्य से पीछे रहने पर ख़ास ध्यान दिया, ख़ासतौर से जी20 संगठन के औद्योगिक देशों से. इनमें जलवायु परिवर्तन के जोखिमों का असर कम करने, वित्तीय संसाधन जुटाने और अनुकूलन सम्बन्धी क़दम शामिल हैं.

यूएन प्रमुख ने इस सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, “इस पीढ़ी और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करना, हम सबकी एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है.”

उनकी नज़र में, ये गोलमेज़ सम्मेलन, कॉप26 से पहले, जलवायु प्रक्रिया की भीषण स्थिति के प्रति आपदा की भावना उत्पन्न करने के लिये, बेख़याली से जगाने वाली एक घण्टी था.

ध्यान रहे कि संयुक्त राष्ट्र का अगला जलवायु सम्मेलन, ब्रिटेन में स्कॉलैण्ड के ग्लासगो शहर में, 31 अक्टूबर से 12 नवम्बर 2021 के बीच होना प्रस्तावित है.

एक विनाशकारी चेतावनी

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के ढाँचागत समझौते (UNFCCC) ने गत शुक्रवार को, पेरिस समझौते के सभी पक्षों के, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) के बारे में एक रिपोर्ट जारी की थी.

उस रिपोर्ट में रकहा गया था कि दुनिया 2.7 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि के रास्ते पर है जोकि एक विनाशकारी मार्ग है.

उस रिपोर्ट के अनुसार, अगर तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है तो, वर्ष 2030 तक, कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कटौती करने की ज़रूरत है, और वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता का लक्ष्य हासिल करने की.

दुनिया भर में, चरम मौसम की घटनाओं की संख्या बढ़ रही है.
WMO/Daniel Pavlinovic
दुनिया भर में, चरम मौसम की घटनाओं की संख्या बढ़ रही है.

इसके उलट, देशों ने अभी तक जो संकल्प व्यक्त किये हैं, उनमें, वर्ष 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में, वर्ष 2010 के स्तरों की तुलना में, 16 प्रतिशत की वृद्धि नज़र आती है.

अब जबकि कॉप26 में कुछ ही सप्ताह बचे हैं, यूएन प्रमुख ने, सदस्य देशों से तीन मुख्य मोर्चों पर ठोस नतीजे दिखाने का आहवान किया है.

जलवायु परिवर्तन पर अन्तर-सरकारी पैनल (IPCC) के अनुसार, तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना, अब भी पहुँच में नज़र आता है, मगर उसके लिये, ज़्यादातर देशों द्वारा, राष्ट्रीय निर्धारित योगदानों (NDCs) में, बहुत ज़्यादा सुधारों की ज़रूरत है.

एंतोनियो गुटेरेश के अनुसार, इसके लिये प्रभावशाली नेतृत्व, जी20 देशों की तरफ़ से दिखाए जाने की ज़रूरत है, क्योंकि ग्रीनहाउस गैसों के 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिये, वो देश ही ज़िम्मेदार हैं.

कोयला चुनौती

यूएन प्रमुख ने एक ख़ास ऊर्जा चुनौती की तरफ़ भी ध्यान दिलाया है; कार्बन उगलने वाले कोयले का अब भी लगातार प्रयोग.

अगर सभी, प्रस्तावित कोयला संयंत्र चालू हो जाते हैं तो दुनिया, तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा की वृद्धि का सामना करेगी.

इसके उलट, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के देशों को वर्ष 2030 तक, कोयले का प्रयोग बन्द करना होगा, और विकासशील देशों को, यही लक्ष्य वर्ष 2040 तक हासिल करना होगा.

कोयला चालित बिजली संयंत्रों से निकलने वाले ख़तरनाक धुएँ से वैश्विक तापमान वृ्द्धि के अलावा, पर्यावरण व लोगों के स्वास्थ्य के लिये अनेक तरह के जोखिम पैदा होते हैं.
Unsplash/Kouji Tsuru
कोयला चालित बिजली संयंत्रों से निकलने वाले ख़तरनाक धुएँ से वैश्विक तापमान वृ्द्धि के अलावा, पर्यावरण व लोगों के स्वास्थ्य के लिये अनेक तरह के जोखिम पैदा होते हैं.

वित्तीय संसाधनों के मुद्दे पर, विकसित देशों को, विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के वास्ते, वर्ष 2021 से लेकर 2025 तक, हर साल, 100 अरब डॉलर की रक़म मुहैया कराने का अपना वादा पूरा करने पर अमल करना होगा.

उन देशों ने वर्ष 2019 और 2020 के दौरान तो ये वादा पूरा नहीं किया है, और आर्थिक सहयोग व विकास संगठन (OECD) के अनुसार, इस वर्ष लगभग 20 अरब डॉलर की रक़म का घाटा है.

इतिहास की नज़र

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, विश्व के सर्वाधिक धनी देश अगर कॉप26 से पहले, वार्षिक जलवायु सहायता के रूप में 100 अरब डॉलर की रक़म मुहैया कराने में नाकाम रहते हैं, तो “इतिहास इसे याद रखेगा.”

उन्होंने नवम्बर से पहले यह धनराशि इकट्ठा होने की सम्भावना का स्तर “10 में से 6” रखा.

बोरिस जॉनसन ने इस आपदा सम्मेलन में कहा, “हम जलवायु कार्रवाई को, कोरोनावायरस की एक अन्य पीड़ित नहीं बनने दे सकते. आइये, हम ऐसे नेतृत्वकर्ता बनकर दिखाएँ जो, अपने बच्चों, उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों की ख़ातिर, पृथ्वी ग्रह के अहम स्वास्थ्य की हिफ़ाज़त करें,”

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने ये भरोसा भी दिलाया कि उनका देश, पर्यावरण मुद्दे को वैश्विक एजेण्डा पर रखते हुए, और वैश्विक हरित औद्योगिक क्रान्ति की एक आधारशिला के रूप में काम करते हुए, मिसाल पर आधारित नेतृत्व मुहैया कराएगा.

मगर उन्होंने साथ ही आगाह भी किया कि कोई भी देश, अकेले अपने दम पर, हवा का रुख़ नहीं पलट सकता, ये उसी तरह होगा जैसेकि केवल एक बाल्टी के ज़रिये, एक बड़ा समुद्र ख़ाली करना.

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