चार अरब लोग सामाजिक संरक्षा दायरे से बाहर – यूएन श्रम एजेंसी की चेतावनी

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि कोविड-19 संकट काल में सामाजिक संरक्षा के दायरे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, मगर इसके बावजूद, चार अरब से अधिक लोगों को अब भी ये उपाय उपलब्ध नहीं हैं. 

यूएन श्रम एजेंसी की ताज़ा रिपोर्ट ‘World Social Protection Report 2020-22: Social protection at the crossroads – in pursuit of a better future ‘ में हाल के समय में सामाजिक संरक्षा प्रणालियों में हुई प्रगति की वैश्विक स्तर पर समीक्षा और कोविड-19 महामारी के असर का आकलन किया गया है.

रिपोर्ट में वैश्विक महामारी के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई को असमान और अपर्याप्त पाया गया है. 

रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि इससे उच्च और निम्न आय वाले देशों के बीच खाई गहरी हुई है और सभी हक़दार व्यक्तियो की अति-आवश्यक संरक्षा उपायों तक पहुँच नहीं है.

सामाजिक संरक्षण उपायों में स्वास्थ्य देखभाल सेवा की सुलभता, और वृद्धावस्था, बेरोज़गारी, बीमारी, विकलांगता, कार्यस्थल पर चोटिल होने जैसी परिस्थितियों में आय सुरक्षा की उपलब्धता है. 

यूएन एजेंसी के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि देश इस समय एक दोराहे पर हैं. 

“वैश्विक महामारी पर कार्रवाई को निखारते हुए अधिकार-आधारित सामाजिक संरक्षा प्रणालियों की एक नई पीढ़ी के निर्माण के लिये यह एक बेहद निर्णायक क्षण है.” 

उन्होंने बताया कि सामाजिक संरक्षा उपायों के ज़रिये लोगों को भावी संकटों से निपटने में राहत प्रदान की जा सकती है, और कामगारों व व्यवसायों के लिये बदलाव के दौर से गुज़रते समय आत्मविश्वास व आशा का संचार होता है. 

“हमें यह समझना होगा कि असरदार व व्यापक सामाजिक संरक्षण ना सिर्फ़ सामाजिक न्याय और शिष्ट व उपयुक्त कामकाज के लिये आवश्यक है बल्कि इससे एक टिकाऊ व सुदृढ़ भविष्य का भी सृजन होता है.” 

रिपोर्ट में सामाजिक संरक्षा उपायों में पसरी कमियों की शिनाख़्त की गई है और टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण नीतिगत सिफ़ारिशों को पेश किया गया है.

क्षेत्रीय विषमताएँ

बताया गया है कि वैश्विक आबादी के महज़ 47 फ़ीसदी हिस्सा को ही कम से कम एक सामाजिक संरक्षा लाभ उपलब्ध है.

चार अरब 10 करोड़ लोगों (53 प्रतिशत) को उनकी राष्ट्रीय सामाजिक संरक्षा प्रणाली से किसी भी प्रकार की आय सुरक्षा प्राप्त नहीं है. 
सामाजिक संरक्षा के विषय में क्षेत्रीय स्तर पर अहम विषमताएँ भी दिखाई देती हैं. 

योरोप और मध्य एशिया में संरक्षा उपायों की कवरेज सबसे अधिक है और वहाँ 84 प्रतिशत आबादी को कम से कम एक लाभ हासिल है. अमेरिकी क्षेत्र में भी यह कवरेज वैश्विक औसत से अधिक है, जहाँ 64 फ़ीसदी को कम से कम एक लाभ प्राप्त है.  

एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के लिये यह आँकड़ा 44 प्रतिशत, अरब देशों के लिये 40 फ़ीसदी, और अफ़्रीका के लिये 17 प्रतिशत है.

विश्व भर में, अधिकाँश बच्चों के पास अब भी कोई कारगर सामाजिक संरक्षा कवरेज नहीं है. 

कवरेज का अभाव

हर चार में से महज़ एक बच्चे (26 फ़ीसदी) को ही सामाजिक संरक्षा लाभ मिलता है. नवजात शिशुओं वाली 45 प्रतिशत महिलाओं को मातृत्व लाभ के रूप में कुछ नक़दी प्राप्त होती है. 

गम्भीर विकलांगता का शिकार हर तीन में से एक (33 प्रतिशत) व्यक्ति को विकलांगता भत्ता ही मिल पाता है.

बेरोज़गारी भत्ते की कवरेज इससे भी कम बताई गई है और दुनिया भर में महज़ 18 प्रतिशत बेरोज़गारों को भी कारगर उपाय हासिल हैं.   

सेवानिवृत्ति से अधिक उम्र वाले 77 प्रतिशत लोगों को किसी ना किसी प्रकार की वृद्धावस्था पेंशन उपलब्ध है, मगर क्षेत्रों में विषमताएँ देखने को मिलती हैं. विशेष रूप से ग्रामीम व शहरी इलाक़ों में और पुरुषों व महिलाओं के बीच. 

सामाजिक संरक्षा उपायों पर सरकारों द्वारा किये जाने वाले व्यय में भी अन्तर दिखाई देता है. 

औसतन, देश अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 12.8 प्रतिशत सामाजिक संरक्षा (स्वास्थ्य से इतर) उपायों पर ख़र्च करते हैं. मगर, उच्च आय वाले देशों में यह आँकड़ा 16.4 प्रतिशत और निम्न आय वाले देशों के लिये 1.1 फ़ीसदी है.

Share this story