क्या हम परिवहन को सुरक्षित व टिकाऊ बना सकते हैं? सड़क सुरक्षा दूत ज्याँ तॉद के साथ एक इण्टरव्यू

बहुत से विकसित देशों ने जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से चलने वाली कारों को, आने वाले दशकों में सड़कों से हटाने की योजनाओं का ऐलान किया है, मगर सड़क सुरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ज्याँ तॉद का ज़ोर है कि विकासशील देशों में, सार्वजनिक परिवहन साधनों की उपलब्धता और दुर्घटनाओं में कमी लाने की चुनौती जैसे तात्कालिक चिन्ता के कारण मौजूद हैं, जिनसे प्राथमिकता के आधार पर निपटे जाने की ज़रूरत है.

ज्याँ तॉद 1960 और 1970 के दशक में, तेज़ रफ़्तार वाली कार दौड़ प्रतियोगिताओं में शिरकत करने के कारण “मिस्टर स्पीड” के नाम से मशहूर थे, मगर अब उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिये विशेष यूएन दूत के रूप में, अपना ध्यान, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में कमी करने पर केद्रित कर रखा है.

यातायात वाहनों और परिवहन साधनों को बिजली से चालित बनाने की दिशा में बदलाव पर बात करने के लिये, ज्याँ तॉद सबसे उपयुक्त हस्ती हैं. 

सड़क सुरक्षा के लिये, यूएन महासचिव के विशेष दूत ज्याँ टॉश्ट, यूएन न्यूज़ के साथ एक इण्टरव्यू के दौरान
UN News/Jérôme Longué
सड़क सुरक्षा के लिये, यूएन महासचिव के विशेष दूत ज्याँ टॉश्ट, यूएन न्यूज़ के साथ एक इण्टरव्यू के दौरान

ज्याँ तॉद, मोटर खेलों की प्रशासनिक संस्था – एफ़आईए के अध्यक्ष के रूप में, फ़ॉरमूला-ई चैम्पियनशिप शुरू कराने में अग्रणी रहे, जिसमें पूर्ण रूप से बिजली से चालित कारें ही शिरकत करती थीं.

ज्याँ तॉद, वैसे तो बिजली चालित वाहनों के प्रबल हिमायती रहे हैं, मगर उन्होंने बार-बार विकासशील देशों की हिमायत भी की है, जहाँ बहुत से लोगों को कारें चलाने के लिये ही मयस्सर नहीं हैं, चाहें वो जीवाश्म ईंधन से चालित हों या बिजली चालित; और विकासशील देशों में ही ज़्यादा घातक सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं.

यूएन न्यूज़ ने 14 से 16 अक्टूबर को, चीन के बेजिंग शहर में और वर्चुअल होने वाले, टिकाऊ परिवहन सम्मेलन के अवसर पर, ज्याँ तॉद के साथ ये बातचीत की है.

सड़क सुरक्षा दूत ज्याँ तॉद इस सम्मेलन में एक वक्ता रहेंगे और इसमें परिवहन के नकारात्मक पर्यावरण, सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने के रास्तों पर विचार किया जाएगा, और सुरक्षित व भरोसेमन्द परिवहन साधनों की उपलब्धता बेहतर बनाने पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा, ख़ासतौर से निर्बल वर्ग के लोगों के लिये. 

अगले 35 वर्षों के दौरान, परिवहन साधनों की मांग तीन गुना बढ़ जाने की सम्भावना है: क्या एक टिकाऊ परिवहन भविष्य वाक़ई सम्भव है? 

इण्डोनेशिया के जकार्ता में दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक बस काफ़िला काम करता है जिसकी बसों को बिजली चालित बनाया जा रहा है.
Unsplash/Rangga Cahya Nugraha
इण्डोनेशिया के जकार्ता में दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक बस काफ़िला काम करता है जिसकी बसों को बिजली चालित बनाया जा रहा है.

ज्याँ तॉद: जब हम यातायात व परिवहन साधनों की बात करते हैं तो विकसित और विकासशील देशों के बीच बहुत बड़ी खाई है. बिजली चालित, या स्वचालित वाहनों जैसी नई टैक्नॉलॉजी के बारे में सुनना और बात करना बहुत लुभावना लगता है, मगर बहुत से विकासशील देशों में तो, बहुत से लोगों को सार्वजनिक परिवहन साधन उपलब्ध ही नहीं हैं.

टिकाऊ विकास लक्ष्य -11 का एक मुख्य उद्देश्य, दुनिया भर में सभी लोगों को, वर्ष 2030 तक, सार्वजनिक यातायात व परिवहन साधन उपलब्ध कराना है, और हम अभी इस लक्ष्य से बहुत दूर हैं.

अगर हम सड़क सुरक्षा की बात करें तो, हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत, सड़क दुर्घटनाओं में हो जाती है, और उनमें से 92 प्रतिशत मौतें विकासशील देशों में होती हैं.

तो इस समस्या से कैसे निपटा जा सकता है, और हम एक सुरक्षित, ज़्यादा टिकाऊ परिवहन भविश्य किस तरह बना सकते हैं? मैं कहूँगा कि वैसे तो ये हर एक इनसान की चिन्ता वाला मुद्दा है, मगर अन्ततः समस्या का सामना, सरकारों को करना होगा.

सरकारों को, यातायात b परिवहन को एक प्राथमिकता बनाना होगा. मैं फ्रेंच पृष्ठभूमि का व्यक्ति हूँ और वर्ष 1973 में, वहाँ सड़क दुर्घटनाओं में क़रीब 18 हज़ार लोगों की मौत हुई थी. आज के समय, वहाँ लगभग तीन गुना ज़्यादा वाहन हैं, मगर, सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या लगभग तीन हज़ार है. मेरा ख़याल है कि सड़क सुरक्षा के मामले में, विकासशील दुनिया, अभी विकसित दुनिया से आधी सदी पीछे है.

अगर धनी देश, पूरी तरह बिजली चालित वाहनों का प्रयोग करने लगें तो क्या विकासशील देशों में, दहन इंजिन (Combustion) वाली कारों की बाढ़ आ जाएगी? आपके ख़याल में, सड़क सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के लिये, उस स्थिति के क्या मायने होंगे?

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में, एक यातायात चौराहे का दृश्य
Unsplash/Yoel J Gonzalez
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में, एक यातायात चौराहे का दृश्य

ज्याँ तॉद: हमें, ये सुनिश्चित करने के लिये, सरकारों, कार निर्माताओं, मोटरबाइक कम्पनियों के साथ मिलकर काम करना होगा कि इन देशों के पास, न्यूनतम मानकों वाले वाहन उपलब्ध हों.

और हम ये जानते हैं कि ये कैसे किया जा सकता है: इसके लिये जागरूकता बढ़ानी होगी, क़ानून सख़्ती से लागू करना होगा, गुणवत्ता वाले ढाँचे की दरकार, और दुर्घटना के बाद सटीक देखभाल व त्वरित प्रणाली की ज़रूरत होगी.

जहाँ तक जलवायु परिवर्तन का मुद्दा है तो, हरित ईंधन, पूरी तस्वीर बदल देने वाला कारक साबित होगा. हमें पूरी पृथ्वी पर बिजली चालित कारों की मौजूदगी तक प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं है, हम हरित ईंधन की उपलब्धता बहुत तेज़ी से बढ़ा सकते हैं और ऐसा किये जाने की सख़्त ज़रूरत है.

आपने वर्ष 2030 तक, सार्वजनिक परिवहन साधनों की जन उपलब्धता के लक्ष्य की बात की है. यह कैसे हासिल किया जा सकता है?

ज्याँ तॉद: यह कोई आसान सवाल नहीं है. ये एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था, मगर सवाल ये है कि हम वहाँ कैसे पहँचें, और वो परिणाम हासिल करने के लिये, कोई स्पष्ट रोडमैप कठिन नज़र आता है. मगर अहम बात है – स्थिति से निपटने की कोशिश करना, और महत्वाकांक्षा रखना भी बहुत ज़रूरी है.

यह इण्टरव्यू, स्पष्टता और संक्षिप्तता के लिये, सम्पादित किया गया है.

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