कोविड-19 से निपटने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में डेटा की अहम भूमिका 

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवँ सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) के अनुसार कोविड-19 महामारी ने दर्शाया है कि गुणवत्तापरक डेटा की उपलब्धता से ज़िन्दगियों की रक्षा की जा सकती है. यूएन विभाग ने स्विट्ज़रलैण्ड की राजधानी बर्न में रविवार को ‘यूएन विश्व डेटा फ़ोरम’ की शुरुआत से पहले डेटा की अहमियत को रेखांकित किया है. 

संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी विभाग के निदेशक स्तेफ़ान श्वाइनफ़ेस्ट ने बताया कि यह फ़ोरम एक महत्वपूर्ण समय मे हो रही है – ऐसे समय जब दुनिया अब भी वैश्विक महामारी का सामना कर रही है.  

उन्होंने कहा कि बीमारी को क़ाबू में करने, नागरिकों के लिये उनके इर्दगिर्द दुनिया को समझने और उसके अनुरूप कार्रवाई को निर्देशित करने के लिये अलग-अलग डेटा की आवश्यकता है.

मगर, फ़िलहाल दुनिया को डेटा की कमी का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरणस्वरूप, यूएन अधिकारी ने बताया कि 40 फ़ीसदी देशों में जन्म या मृत्यु की जानकारी रखने के लिये पंजीकरण प्रणाली नहीं है.

अपनी आबादी की रक्षा करने के लिये यह सरकारों के लिये एक बुनियादी स्रोत है.

कोविड-19 महामारी की शुरुआत के लगभग डेढ़ वर्ष बाद, महज़ 60 देशों में ही कोरोनावायरस संक्रमणों और मृत्यु दर के ऐसे आँकड़े उपलब्ध हैं जिन्हें लिंग के आधार पर अलग-अलग रखा जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि यह समय हालात को बेहतर करने के लिये अपने संकल्प को मज़बूत करने का है.

इसके तहत डेटा को स्मार्ट बनाने, उभरते नवाचार समाधानों का इस्तेमाल करने पर बल दिया गया है ताकि डेटा की मात्रा और उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके. 

बेहतर भविष्य के लिये बेहतर डेटा

यूएन विश्व डेटा फ़ोरम में सैकड़ों डेटा विशेषज्ञ, उसका इस्तेमाल करने वाले लोगों सहित अन्य पक्षकार एकत्र होंगे, और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिये नए डेटा समाधानों के ज़रिये समर्थन सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे. 

बताय गया है कि इस फ़ोरम में टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर कार्रवाई के दशक के तहत ‘Bern Data Compact’ को पारित किया जाएगा. 

इस कॉम्पैक्ट में समुदायों से डेटा तैयार करने का आग्रह किया गया है ताकि किसी को भी पीछे ना छूटने दिया जाए. साथ ही निष्पक्ष डेटा के सामयिक, खुले इस्तेमाल को सुनिश्चित करने और डेटा संरक्षण में भरोसे का निर्माण किये जाने का आहवान किया जाएगा. 

इस कॉम्पैक्ट का लक्ष्य, स्थानीय व वैश्विक स्तर पर विभिन्न डेटा समुदायों के बीच सहयोग को मज़बूती प्रदान करना है, जिससे डेटा के ज़रिये टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी.

हर दूसरे वर्ष आयोजित होने वाली इस फ़ोरम के ज़रिये नवाचार और डेटा क्षेत्र में कमियों पर चर्चा की जाती है और टिकाऊ विकास के लिये केप टाउन वैश्विक कार्रवाई योजना को लागू किये जाने में हो रही प्रगति का आकलन किया जाता है.

यूएन अधिकारी के मुताबिक़ यह फ़ोरम मुख्य रूप से छह क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जिनमें किसी को भी पीछे ना छूटने देना, दुनिया को डेटा के ज़रिये समझना, डेटा व सांख्यिकी में भरोसे का निर्माण करना, डेटा संग्रहण को मज़बूत बनाने के लिये निवेश बढ़ाना और फ़िलहाल मौजूद कमियों को दूर करना है. 

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