कोविड-19: मानसिक स्वास्थ्य व मज़बूती में शतरंज की अहम भूमिका

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण खेलकूद आयोजनों पर असर पड़ा है. मगर शारीरिक मज़बूती के बजाय, गहरी समझ और बुद्धि के प्राचीन खेल, शतरंज (Chess) ने महीनों की तालाबन्दी के दौरान असाधारण सुदृढ़ता और समायोजन शीलता का परिचय दिया है.

मंगलवार, 20 जुलाई, को ‘विश्व शतरंज दिवस’ के अवसर ने, कोरोनावायरस संकट के दौरान, मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में शतरंज की भूमिका को रेखांकित किया है.   

सभी प्रकार के खेलकूदों से बेचैनियों को कम करने, मानसिक स्वास्थ्य में बेहतरी लाने और संकट काल से निपटने में मदद मिलती रही है.

बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में, शतरंज में दिलचस्पी दोगुनी हो जाने की ख़बरें हैं, और पहले से कहीं अधिक संख्या में खिलाड़ी ऑनलाइन आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ शतरंज, रणनैतिक व वैज्ञानिक सोच-विचार, निपट कला के तत्वों का मिश्रण माना गया है और यह खेल की एक ऐसी संस्कृति है, जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आई है. 

मितव्ययी और समावेशी खेल - शतरंज को कहीं भी और कोई भी लोग खेल सकते हैं. 

यह खेल भाषा, आयु, लिंग, शारीरिक क्षमता और सामाजिक दर्जे की सीमाओं से परे है. 

यूएन का मानना है कि निष्पक्षता और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने वाले इस वैश्विक खेल के ज़रिये, लोगों व राष्ट्रों के बीच सहिष्णुता और समझ के माहौल के सृजन में योगदान सम्भव है.

अवरोधों को पार करना

शतरंज के माध्यम से टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा को लागू करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहायता मिल सकती है. 

इसके ज़रिये शिक्षा को मज़बूती प्रदान की जा सकती है, लैंगिक समानता को साकार किया जा सकता है और महिलाओं व लड़कियों का सशक्तिकरण सम्भव है.

जापान की राजधानी टोक्यो में ओलम्पिक खेल 23 जुलाई से शुरू हो रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि खेलकूद, कला और शारीरिक गतिविधियों में, धारणाओं व पूर्वाग्रहों को बदल देने की ताक़त है. 

इनके ज़रिये लोगों व समुदायों में प्रेरणा का संचार सम्भव है, नस्लीय व राजनैतिक अवरोधों तोड़े जा सकते हैं, भेदभाव से लड़ा जा सकता है और हिंसक संघर्ष पर विराम लगाया जा सकता है. 

इसके मद्देनज़र, संगठन के मुताबिक़ स्थानीय, क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तरों पर शान्ति, सहयोग, एकजुटता और स्वास्थ्य में योगदान देने में उनकी महती भूमिका है. 

अन्तरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE), पेरिस में वर्ष 1924 में स्थापित किया गया था, और उसी दिन को ध्यान में रखते हुए, यूएन महासभा ने 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस को मनाए जाने की घोषणा की थी.

महत्वपूर्ण तथ्य

60 करोड़ से अधिक वयस्क लोग नियमित रूप से शतरंज खेलते हैं.  

जर्मनी, भारत, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका में लगभग 70 फ़ीसदी वयस्कों ने अपने जीवन में कभी ना कभी शतरंज खेला है. 

खेल की तमाम जटिलताओं के बावजूद, अपने विरोधी खिलाड़ी को महज़ दो चालों में चेकमेट (परास्त) कर पाना सम्भव है. 

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