कोविड-19: बीते सप्ताह डेढ़ करोड़ संक्रमण मामलों की पुष्टि, अब तक की सर्वाधिक संख्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि पिछले सप्ताह, विश्व भर में कोरोनावायरस संक्रमण के डेढ़ करोड़ से अधिक मामले दर्ज किये गए, जोकि किसी एक हफ़्ते में संक्रमण मामलों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यूएन एजेंसी के अनुसार, डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन वैरीएण्ट से संक्रमण कम गम्भीर होता है, मगर यह उन लोगों के लिये ख़तरनाक है, जिनका अभी टीकाकरण नहीं हुआ है. 

यूएन स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बुधवार को जिनीवा में पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि यह किसी एक सप्ताह में दर्ज किये गए सबसे अधिक मामले हैं, और हम जानते हैं कि वास्तविक मामलों की संख्या इससे कहीं अधिक हैं.

उन्होंने कहा, “संक्रमण में तेज़ उछाल, ओमिक्रॉन वैरीएण्ट की वजह से हो रहा है, जोकि हर देश में डेल्टा का स्थान लेता जा रहा है.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि अक्टूबर 2021 के बाद से, एक सप्ताह में होने वाली मौतों का आँकड़ा स्थिर रहा है और हर सप्ताह औसतन 48 हज़ार मौतें हो रही हैं. 

सभी देशों में अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो रही है, मगर ये आँकड़ा कोरोनावायरस की पिछली लहरों के स्तर पर नहीं है. 

“सम्भवत:, इसकी वजह ओमिक्रॉन का कम गम्भीर होना है और टीकाकरण या फिर अतीत के संक्रमण से व्यापक प्रतिरोधक क्षमता है.”

“मगर, एक बात स्पष्ट मानिये: डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन से कम गम्भीर बीमारी होती है, लेकिन यह एक ख़तरनाक वायरस है, विशेष रूप से उनके लिये, जिन्हें वैक्सीन के टीके नहीं लगे हैं.”

उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में औसतन 50 हज़ार मौतें एक बड़ी संख्या है, और कि इस वायरस के साथ जीना सीखने का अर्थ यह नहीं है कि इतनी बड़ी मृतक संख्या को स्वीकार किया जाए.

महानिदेशक घेबरेयेसस ने ज़ोर देकर कहा कि इस वायरस को खुली छूट देने, या हार मानने से बचा जाना होगा, विशेष रूप से जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है.

“अफ़्रीका में, 85 फ़ीसदी से अधिक लोगों को अब तक वैक्सीन का एक भी टीका नहीं लग पाया है.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के शीर्ष अधिकारी ने दोहराया कि वैश्विक महामारी के इस चरण पर पार पाने के लिये, वैक्सीन विषमता को दूर किया जाना होगा. 

“हम प्रगति दर्ज कर रहे हैं. दिसम्बर में, कोवैक्स ने नवम्बर की तुलना में दोगुनी संख्या में ख़ुराकें रवाना कीं, और आगामी दिनों में हमें आशा है कि कोवैक्स कार्यक्रम की एक अरब वीं ख़ुराक रवाना की जाएगी.”

टीकाकरण है ज़रूरी

उन्होंने ध्यान दिलाया कि टीकों की आपूर्ति में उपजे अवरोधों में कुछ कमी आई है, मगर इस वर्ष के मध्य तक विश्व आबादी के 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण सुनिश्चित किये जाने के लिये अभी एक लम्बा रास्ता तय किया जाना है.

“90 देश अभी 40 फ़ीसदी के लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाए हैं, और इनमें से 36 देशों ने अपनी आबादी का केवल 10 प्रतिशत टीकाकरण ही किया है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में अस्पतालों में भर्ती होने वाले अधिकतर संक्रमित लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है.

“गम्भीर बीमारी और मौत की रोकथाम में वैक्सीन बेहद कारगर हैं, मगर वे पूरी तरह से संक्रमण की रोकथाम नहीं करती हैं.”

फ़िलिपीन्स में कोविड-19 से बचाव के लिये टीका लगाया जा रहा है.
© WHO/Blink Media/Hannah Reyes
फ़िलिपीन्स में कोविड-19 से बचाव के लिये टीका लगाया जा रहा है.

“ज़्यादा संचारण का अर्थ है, ज़्यादा लोगों का अस्पतालों में भर्ती होना, ज़्यादा मौतें, ज़्यादा लोगों का कामकाज से दूर होना, जिनमें शिक्षक व स्वास्थ्यकर्मी भी हैं.”

“साथ ही, ओमिक्रॉन से ज़्यादा घातक और ज़्यादा संक्रामक एक और वैरीएण्ट के उभरने का जोखिम भी है.”

स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख ने आगाह किया है कि ज़्यादा संख्या में संक्रमण मामलों के कारण, पहले से ही विकट हालात में काम कर रहे और थक चुके स्वास्थ्यकर्मियों पर असर पड़ता है.

ओमिक्रॉन के तेज़ फैलाव और संक्रमितों की संख्या में भीषण वृद्धि से स्वास्थ्य प्रणालियों और स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव बढ़ रहा है और उनकी रक्षा की जानी होगी.

पिछले वर्ष प्रकाशिक एक अध्ययन के मुताबिक़, दुनिया भर में हर चार में से एक स्वास्थ्यकर्मी ने वैश्विक महामारी के दौरान, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया है.

अनेक देशों में स्वास्थ्यकर्मियों ने कामकाज की ख़राब परिस्थितियों, साथी कर्मचारियों की कमी, हर दिन भारी दबाव के कारण अपने रोज़गार छोड़ने पर विचार किया है.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों ने पिछले दो वर्षों में सभी की रक्षा के लिये, अपने सर्वोत्तम प्रयास किये हैं और उनकी रक्षा के लिये हरसम्भव उपाय किये जाने होंगे.

गर्भवती महिलाएँ और कोविड-19

महानिदेशक घेबेरेयेसस ने कहा कि अन्य लोगों के मुक़ाबले, गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 से संक्रमित होने का जोखिम अधिक नहीं है.

लेकिन, अगर वे संक्रमित होती हैं तो उनके लिये गम्भीर रूप से बीमार होने का जोखिम बढ़ जाता है.

“इसलिये ये ज़रूरी है कि सभी देशों में गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के जीवन की रक्षा करने के लिये, वैक्सीन की सुलभता हो.”

योरोप और मध्य एशिया के देशों में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वैरीएण्ट के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
Unsplash/Fusion Medical Animation
योरोप और मध्य एशिया के देशों में कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वैरीएण्ट के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

साथ ही, नए उपचारों और वैक्सीन के लिये परीक्षणों में गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किये जाने का आग्रह किया गया है.

यूएन एजेंसी का मानना है कि माताओं से उनके नवजात शिशुओं को होने वाला संक्रमण दुर्लभ है और स्तनपान से मिलने वाले दूध में भी सक्रिय वायरस की पुष्टि नहीं हुई है. 

संगठन ने ऐसी ख़बरों पर चिन्ता जताई है जिनमें कुछ देशों में महिलाओं को उनके नवजात शिशुओं से अलग किया गया है.

स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे अनावश्यक बताते हुए कहा है कि जन्म के बाद, शिशुओं के शुरुआती दिनों में इससे उनके स्वास्थ्य व कल्याण पर असर पड़ सकता है.

Share this story