कोविड-19: डेल्टा वैरिएंट ही अब भी सबसे ज़्यादा ख़तरनाक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को कहा है कि कोविड-19 के म्यू नामक एक नए वैरिएंट के उभरने के बावजूद, डेल्टा वैरिएंट ही, दुनिया भर में सबसे ज़्यादा चिन्ता का कारण बना हुआ है जिसने अन्य रूपों या प्रकारों को पीछे छोड़ रखा है.

कोविड-19 के लिये, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की तकनीकी प्रमुख डॉक्टर मारिया वान करख़ोव ने कहा, “मेरा ख़याल है कि संक्रमण के फैलाव व क्षमता को देखते हुए, डेल्टा वैरिएंट सबसे ज़्यादा चिन्ताजनक है.”

“पुराने वैरिएंट की तुलना में, डेल्टा वैरिएंट ज़्यादा संक्रमण फैलाने वाला है जिसका मतलब है कि ये ज़्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है.”

वायरस में बदलाव

डॉक्टर वान करख़ोव ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट में बदलाव या विकास लगातार जारी है और वैज्ञानिक ये देखने में लगे हैं कि ये वायरस किस तरह बदल सकता है क्योंकि इसके नए वैरिएंट लगातार उभरकर सामने आ रहे हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि वो न्यू वैरिएंट पर नज़र रखे हुए है, जिसे B.1621 के नाम से भी जाना जाता है.

इस वैरिएंट की पहचान, सबसे पहले जनवरी 2021 में, कोलम्बिया में हुई थी.

ये वैरिएंट कोरोनावयरस से उन पाँच प्रकारों में से एक है जिनके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की दिलचस्पी है और जिसका सामना वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि म्यू वैरिएंट के अनेक रूप बदल चुके हैं जिससे पता चलता है कि ये वैरिएंट, वैक्सीन का असर कम  करने के लिये अपनी क्षमता बढ़ा सकता है, जिसके लिये और ज़्यादा शोध की ज़रूरत है.

डॉक्टर वान करख़ोव ने बताया है कि दक्षिण अफ़्रीका में, म्यू वैरिएंट के संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ रही है, मगर जिन देशों में डेल्टा के संक्रमण का फैलाव रहा है, वहाँ मामलों की संख्या कम हो रही है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य आपदा कार्यक्रम के मुखिया डॉक्टर माइकल रायन ने कहा है कि वायरस, एक दूसरे के साथ, अनिवार्य रूप में प्रतिस्पर्धा रखते हैं. इस समय ऐसा लगता है कि डेल्टा वैरिएंट ने, वायरस के अन्य रूपों को पीछे छोड़ रखा है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 वायरस के अभी और भी वैरिएंट यानि रूप या प्रकार सामने आने की सम्भावना है, मगर इसका मतलब ये नहीं है कि हर एक वैरिएंट कोई बहुत ख़तरनाक होगा.

हर एक वैरिएंट को उसके चारित्रिक लक्षणों के आधार पर परखा जाएगा, इस नज़र से कि वो कितनी गम्भीर बीमारी का कारण बन सकता है, उसका कितना संक्रमण फैल सकता है और वो, वैक्सीन से किस हद तक बच सकता है.

चिन्ता का दायरा

डॉक्टर वान करख़ोव के अनुसार वैश्विक स्तर पर, कोरोनावायरस के मामलों की कुल संख्या अब भी चिन्ता का कारण बनी हुई है.

हर सप्ताह लगभग 45 लाख मामलों की ख़बरें मिल रही हैं और एक सप्ताह में, लगभग 68 हज़ार लोगों की मौतें भी हो रही हैं, जबकि असल संख्या इससे ज़्यादा हो सकती है.

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन उन लोगों में संक्रमण का फैलाव बहुत ज़्यादा देख रहा है जिन्हें वैक्सीन के टीके नहीं लगे हैं मगर कुछ सकारात्मक घटनाक्रम भी देखे गए हैं.

मसलन, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज़ों की संख्या कम हुई है और इस बीमारी की चपेट में आए लोगों की मौतें होने के मामले भी कम हुए हैं.

डॉक्टर वान करख़ोव ने कहा, “मगर वैश्विक स्तर पर, स्थिति अब भी काफ़ी चिन्ताजनक है. दुनिया भर में हमें इस संख्या की उम्मीद नहीं थी, ख़ासतौर से हमारे पास ऐसे साधन मौजूद हैं जिनके ज़रिये संक्रमण और मौतों की इतनी बड़ी संख्या को रोका जा सकता है.” 

Share this story