कोविड-19 के मामलों में वृद्धि, योरोप व मध्य एशिया नए केन्द्र

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि कोविड-19 महामारी के मामले एक बार फिर उभार पर हैं और वैसे तो ये वृद्धि सभी क्षेत्रों के देशों में देखी गई है, मगर योरोप व मध्य एशिया में ज़्यादा वृद्धि हो रही है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुखिया डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने गुरूवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि महामारी शुरू होने के लगभग 22 महीने बाद, और पहली वैक्सीन को मंज़ूरी मिलने के लगभग एक साल बाद, ये महामारी फिर अपना सिर उठा रही है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण, अभी तक 50 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, हालाँकि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा होने की आशंका है. अब भी, हर सप्ताह, 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौतें हो रही हैं.

पिछले सात दिनों के दौरान, सभी क्षेत्रों के 56 देशों में, कोविड-19 महामारी के कारण होने वाली मौतों में, 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने की ख़बरें मिली हैं.

डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने, सघन चिकित्सा कक्षों में स्थानों के अभाव, चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति के अभाव, स्वास्थ्यकर्मियों पर बहुत ज़्यादा बोझ, और अस्पतालों को अन्य ज़रूरी स्वास्थ्य प्रक्रियाएँ स्थगित करने के लिये मजबूर होने की स्थितियों की तरफ़ ख़ास ध्यान दिलाया.

उन्होंने कहा, “मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ: ऐसा नहीं होते रहना चाहिये. कोविड-19 का संक्रमण रोकने और लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये हमारे पास सभी उपकरण व संसाधन मौजूद हैं, और हम देशों से ये आग्रह करना जारी रखेंगे कि वो ऐसे उपकरणों व संसाधनों का प्रयोग करना जारी रखें.”

और ज़्यादा वैक्सीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, बुधवार को ही, कोविड-19 की एक अन्य वैक्सीन – कोवैक्सीन के आपात प्रयोग को स्वीकृत किया था, जो भारत में निर्मित है. भारत बायोटैक द्वारा निर्मित – कोवैक्सीन, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी से मंज़ूरी पाने वाली 8वीं वैक्सीन है.

डॉक्टर टैड्रॉस ने, इस मामले में वैक्सीन की उपलब्धता में मौजूद असमानता की तरफ़ बार-बार ध्यान दिलाते हुए कहा कि निम्न आय वाले अधिकतर देश, वैक्सीन आपूर्ति के लिये, यूएन समर्थित अन्तरराष्ट्रीय वैक्सीन उपलब्धता कार्यक्रम – कोवैक्स पर निर्भर हैं.

उनके अनुसार, कोवैक्स के पास धन मौजूद है और वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिये सौदे भी हो चुके हैं, मगर वैक्सीन निर्माताओं व उत्पादकों ने अपनी भूमिका अच्छी तरह से नहीं निभाई है.

उन्होंने दलील पेश करते हुए कहा, “ऐसे देशों को और ज़्यादा वैक्सीन नहीं दी जानी चाहिये, जिन्होंने अपनी आबादी के 40 प्रतिशत हिस्से का पहले ही टीकाकरण कर दिया है, ऐसा तब तक हो जब तक कि कोवैक्स के पास अन्य ज़रूरतमन्द देशों में भी इतनी ही आबादी का टीकाकरण कर दिये जाने के लिये, पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध ना हों.”

डॉक्टर टैड्रॉस ने ज़ोर देकर ये भी कहा कि अभी तीसरी ख़ुराक यानि बूस्टर नहीं दिये जाने चाहिये, केवल उन लोगों के अलावा जिनकी रोग प्रतिरोधी क्षमता कमज़ोर है. 

उन्होंने वैक्सीन की अतिरिक्त ख़ुराकों के इस्तेमाल पर, स्वैच्छिक रोक लगाए जाने की पुकार भी दोहराई.

जानी-पहचानी नई लहर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, योरोप व मध्य एशिया में प्रत्येक देश, कोविड-19 के फिर से उभरने के वास्तविक ख़तरे का सामना कर रहा है, या पहले से ही इसका मुक़ाबला कर रहा है.

योरोप के लिये यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हैन्स क्लूग ने गुरूवार को एक वक्तव्य जारी करके कहा कि एजेंसी के योरोपीय क्षेत्र में आने वाले सभी 53 देशों में संक्रमण फैलाव की मौजूदा लहर “बहुत गहरी चिन्ता” की बात है.

डॉक्टर हैन्स क्लूग के अनुसार, कोविड-19 के मामले, एक बार फिर रिकॉर्ड ऊँचाई पर दर्ज किये जा रहे हैं, और संक्रमण के उभार की इस लहर के लिये, कोरोनावायरस का डेल्टा रूप, सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार है.

बीते चार सप्ताहों के दौरान, योरोप क्षेत्र में, नए मामलों में 55 प्रतिशत से ज़्यादा वृद्धि देखी गई है. गत सप्ताह ही, योरोप व मध्य एशिया में, दुनिया भर के तमाम मामलों की 59 प्रतिशत संख्या दर्ज की गई. इसके अलावा, कोविड-19 के कारण दुनिया भर में हुई मौतों में से, 48 प्रतिशत मौतें, योरोपीय क्षेत्र के देशों में दर्ज की गईं.

डॉक्टर क्लूग ने कहा कि योरोपीय क्षेत्र, एक बार फिर कोविड-19 महामारी का मुख्य केन्द्र बनता नज़र आ रहा है. उन्होंने बताया कि बीते एक सप्ताह के दौरान, कोविड-19 के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज़ों की संख्या में, दोगुने से भी ज़्यादा बढ़ोत्तरी हुई है.

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