कोविड-19: अफ़्रीका में संक्रमण मामलों व मृतक संख्या में तेज़ उछाल

अफ़्रीकी देशों में कोविड-19 महामारी के संक्रमण मामलों और उससे हो रही मौतों की संख्या में तीव्र गति से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. अफ़्रीका में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक़ सप्ताह-दर-सप्ताह आधार पर 43 प्रतिशत ज़्यादा मौतें हुई हैं और देशों को ऑक्सीजन व गहन देखभाल के लिये बिस्तरों की क़िल्लत से जूझना पड़ रहा है. 

11 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में मृतक संख्या बढ़कर छह हज़ार 273 हो गई, जबकि उससे पिछले सप्ताह यह संख्या चार हज़ार 384 थी.

नामीबिया, दक्षिण अफ़्रीका, ट्यूनीशिया, युगाण्डा और ज़ाम्बिया में पिछले सप्ताह 83 फ़ीसदी मौतें हुई. 

संक्रमण के पुष्ट मामलों और कोविड-19 से होने वाली मौतों के बीच अनुपात (case fatality rate) 2.6 प्रतिशत आँका गया है जबिक वैश्विक औसत 2.2 प्रतिशत है. 

कोविड-19 संक्रमण मामलों में लगातार आठ सप्ताह से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, और 13 जुलाई को ये संख्या बढ़कर 60 लाख तक पहुँच गई.

पिछले एक महीने में, अफ़्रीका में अब तक के सबसे कम समय अन्तराल में, 10 लाख नए मामलों की पुष्टि हुई है.

इसकी तुलना में, संक्रमण के पहले 40 लाख मामलों से, 50 लाख मामलों तक पहुँचने में क़रीब तीन महीने का समय लगा था. 

अफ़्रीका में विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक मातशिदिसो मोयती ने बताया, “पिछले पाँच हफ़्तों से मौतें तेज़ी से हुई हैं. यह एक स्पष्ट संकेत है कि सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में अस्पताल ध्वस्त होने के कगार पर पहुँच रहे हैं.”

अफ़्रीकी देशों में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में यह अब तक का सबसे तेज़ उछाल है. इसकी वजह, आम लोगों में सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के प्रति थकावट का भाव और तेज़ी से फैलने वाले वायरस के प्रकारों को बताया गया है. 

बताया गया है कि डेल्टा वैरिएंट अब तक सबसे ज़्यादा तेज़ी से फैलने वाले कोरोनावायरस का प्रकार है, और इसके मामले 21 अफ़्रीकी देशों में सामने आ चुके हैं. एल्फ़ा वैरिएंट 35 देशों में और बीटा 30 देशों में मौजूद है. 

लगभग 10 देशों में अस्पतालों में भर्ती होने वाले संक्रमितों की संख्या में तेज़ वृद्धि हुई है और कम से कम छह देशों को गहन देखभाल कक्षों में बिस्तरों की क़िल्लत से जूझना पड़ रहा है.

मेडिकल ऑक्सीजन की माँग में इज़ाफ़ा हुआ है और पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में यह 50 फ़ीसदी अधिक है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा छह देशों में कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक़ आवश्यकता की महज़ 27 प्रतिशत ऑक्सीजन का ही उत्पादन हो रहा है. 

महत्वपूर्ण सेवाओं व सामग्री की क़िल्लत

“देशों में संसाधनों की कमी वाली स्वास्थ्य प्रणालियाँ, स्वास्थ्यकर्मियों, आपूर्ति, उपकरण और अन्य बुनियादी ढाँचे की क़िल्लत से जूझ रही हैं, जिनकी गम्भीर रूप से बीमार कोविड-19 मरीज़ों की देखभाल के लिये ज़रूरत है.”

यूएन एजेंसी, कोविड-19 उपचार और महत्वपूर्ण देखभाल क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिये देशों के साथ मिलकर काम कर रही है. 

साथ ही चिकित्सा प्रबन्धन के लिये दिशानिर्देश मुहैया कराए गए हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 

यूएन एजेंसी अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, अति-आवश्यक मेडिकल सामान, जैसेकि ऑक्सीजन सिलेण्डर वितरित कर रही है और ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने व उनकी मरम्मत के काम में भी मदद की जा रही है.

संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी एक ऐसे समय में हो रही है जब अफ़्रीकी देश अपर्याप्त वैक्सीन आपूर्ति से जूझ रहे हैं. 

विश्व भर में कुल साढ़े तीन अरब लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जबकि अफ़्रीका में इस संख्या के महज़ 1.6 प्रतिशत लोगों को ही वैक्सीन मिल पाई है. 

इस वर्ष मार्च महीने में टीकाकरण की शुरुआत से अब तक पाँच करोड़ 20 लाख लोगों को टीके लगाए गए हैं. इनमें से एक करोड़ 80 लाख लोगों का पूर्ण टीकाकरण किया जा चुका है.

आने वाले दिनों व महीनों में, वैक्सीन की अतिरिक्त ख़ुराकों की आपूर्ति की सम्भावना है जिससे टीकाकरण दर के बढ़ने की उम्मीद है. 

सितम्बर 2021 तक अफ़्रीका की 10 फ़ीसदी आबादी के टीकाकरण के लिये 19 करोड़ अतिरिक्त वैक्सीन की ख़ुराकों की ज़रूरत होगी.

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