कोलम्बिया: ऐतिहासिक शान्ति समझौते के पाँच साल, आपसी मेलमिलाप व बेहतर भविष्य के लिये प्रयास

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश इस सप्ताह कोलम्बिया का दौरा कर रहे हैं, जहाँ वह पाँच दशकों तक चले हिंसक संघर्ष का अन्त करने वाले शान्ति समझौते की पाँचवी वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इस क्रम में, यूएन प्रमुख का ल्लानो ग्राण्डे नामक गाँव भी जाने का कार्यक्रम है, जहाँ स्थानीय लोग और पूर्व लड़ाके एक साथ मिलकर, बेहतर भविष्य के लिये प्रयास कर रहे हैं. 

ल्लानो ग्राण्डे नामक यह छोटा सा गाँव, एक उदाहरण है जोकि दर्शाता है कि शान्ति व आपसी मेल-मिलाप के ज़रिये पहले कभी शत्रु के रूप में देखे जाने वाले लोगों को, किस तरह परिवार में शामिल किया जा सकता है.

महासचिव गुटेरेश का दौरा 23 नवम्बर को शुरू होगा, जिससे पहले यूएन न्यूज़ ने क्षेत्र की यात्रा की है. 

ल्लानो ग्राण्डे गाँव में पूर्व लड़ाके, स्थानीय लोग, सैनिक व पुलिसकर्मी एक साथ मिलकर रहते हैं. पाँच वर्ष पहले, यह सोच पाना भी सम्भव नहीं था. 

मगर, कोलम्बिया सरकार और Revolutionary Armed Forces of Colombia (FARC) के बीच हुए शान्ति समझौते के ज़रिये, हिंसा पर विराम लगाने में सफलता मिली है. 

सभी पक्ष स्वयं को, लम्बे समय तक चले हिंसक संघर्ष का पीड़ित मानते हैं. लेकिन अब वे एक तरह से ‘परिवार’ का हिस्सा हैं.

इस यात्रा में उन्हें उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है, और ज़ख़्मों पर मरहम लगाये जाने की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र, आपसी मेल-मिलाप की इस प्रक्रिया में उनकी मदद के लिये प्रयासरत है.

सेना के एक छोटे दस्ते के सदस्य ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि शान्ति से, किसानों, समुदायों और अन्य लोगों को फ़ायदा हुआ है. मुख्य रूप से ल्लानो ग्राण्डे परिवार के लिये. हम एक दूसरे की मदद करते हैं. 

वहीं, 67 वर्षीया लुज़मिला सेगूरा ने बताया कि अब, सभी एक परिवार की तरह हैं, मगर, पहले अक्सर उनका मन में भय और आशंका से घिरा रहता था. 

कोलम्बिया में शान्ति प्रक्रिया के तहत, स्थानीय किसान व पीड़ित लुज़मिला सेगूरा को अपना घर मिला है.
UNMVC/Esteban Vanegas
कोलम्बिया में शान्ति प्रक्रिया के तहत, स्थानीय किसान व पीड़ित लुज़मिला सेगूरा को अपना घर मिला है.

जब वे हथियारबन्द लोगों को वहाँ आते देखती, तो डर जाती थीं, और उन्हें लगता कि वे उन्हें मारने के लिये आ रहे थे. 

उन्होंने याद किया कि पहले कई सशस्त्र गुरिल्ला लड़ाकों ने, पर्वतीय इलाक़े में स्थित इस गाँव पर हमला करके, लूटपाट को अंजाम दिया था. 

शान्ति समझौते के बाद बदले हालात

मगर, शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से, वह ख़ुश हैं, और उन्हें मकान दिया गया है. इलाक़े में शान्ति है, और सभी एक परिवार की तरह मिलकर काम करते हैं, जिससे उनका भय दूर हो गया है. 

लुज़मिला अब एक फ़ैक्ट्री में काम करते हैं, जिसे खाद्य एवं कृषि संगठन की मदद से शुरू किया गया है. 

जायरो पुएर्ता पेन्या एक पूर्व लड़ाके हैं, और वह 14 साल की उम्र में FARC गुट में शामिल हुए थे. यह 45 साल पहले की बात है.

अब वह निर्माण कार्य में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, और स्वयं को ल्लानो ग्राण्डे परिवार का हिस्सा मानते हैं. 

पुएर्ता पेन्या का मानना है कि शान्ति समझौते के बाद से, जीवन शान्त रहा है.

मानसिक शान्ति है...परिवार के साथ रहना, सोना, खाना, काम करना...गोलियाँ, धमाके और सैनिकों को साथ लाने वाले हैलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट अब बीते समय की बात हो चुकी है.

पूर्व लड़ाके जायरो पुएर्ते पेन्या अब एक नए जीवन की शुरुआत करने की कोशिशों के तहत नए काम के लिये प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.
UNMVC/Esteban Vanegas
पूर्व लड़ाके जायरो पुएर्ते पेन्या अब एक नए जीवन की शुरुआत करने की कोशिशों के तहत नए काम के लिये प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.

अतीत से उबरने के प्रयास

जब 117 पूर्व लड़ाकों को, पुनर्एकीकरण प्रक्रिया के तहत ल्लानो ग्राण्डे भेजे जाने की घोषणा की गई, तो स्कूल शिक्षक, मैरिएला लोपेज़ को भय का एहसास हुआ. 

उन्होंने बताया कि पूर्व लड़ाकों से मिलने के बाद, उनकी राय में बदलाव आया.

उनके अलावा, बहुत से लोगों का पहले मानना था कि पूर्व लड़ाकों का बर्ताव आक्रामक होगा. अतीत का अनुभव भी यही था,

मगर उनके गाँव में आने के बाद यह राय बदली और लोगों को महसूस हुआ कि वे उतने बुरे नहीं हैं. मैरिएला लोपेज़ ने माना कि बहुत से पूर्व लड़ाके, स्वयं पीड़ित हैं. 

ल्लानो ग्राण्डे 150 बाशिन्दों का एक गाँव है जोकि प्रशिक्षण व समाज में फिर से समेकित किये जाने का केंद्र भी है, इसके ज़रिये, नागरिक समाज में पूर्व लड़ाकों के पुनर्एकीकरण के प्रयास किये जाते हैं.

यह एण्टीकुइया इलाक़े में स्थित है, जहाँ एक अनुमान के अनुसार 80 फ़ीसदी स्थानीय आबादी, कोलम्बिया के सशस्त्र संघर्ष की आँच में झुलस रही थी. 

अतीत में यह इलाक़ा, अनेक हथियारबन्द गुटों का गढ़ रहा है, जिन्हें ग़ैरक़ानूनी अर्थव्यवस्थाओं की वजह से मज़बूती मिली, जैसेकि अवैध खनन.

यूएन के सक्रिय प्रयास

शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद से, कोलम्बिया में यूएन सत्यापन मिशन, अन्य यूएन एजेंसियों के साथ मिलकर, समझौते में उल्लेखित शब्दों को वास्तविकता में बदलने के लिये प्रयासरत है.

यूएन एजेंसियों की मदद से ल्लानो ग्राण्डे व अन्य इलाक़ों में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं.
UNMVC/Esteban Vanegas
यूएन एजेंसियों की मदद से ल्लानो ग्राण्डे व अन्य इलाक़ों में कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं.

संयुक्त राष्ट्र की मदद से लगभग 15 परियोजनाओं को शुरू किया गय है, जिनमें मछली पालन से लेकर शिक्षा, परिधान-निर्माण, मवेशी पालन और कृषि गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया गया है. 

मगर, ल्लानो ग्राण्डे व दूसरे इलाक़ों में बहुत सी परियोजनाएं, धन की कमी या फिर तकनीकी कारणों से ठहरी हुई हैं. ऐसे भी मामले हैं जहाँ पूर्व लड़ाके अपना योगदान देने के लिये प्रतिबद्ध नहीं हैं. 

ल्लानो ग्राण्डे और स्थानीय समुदाय ने शान्ति समझौते के बाद प्रगति दर्ज की है, मगर अन्य स्थानों पर अभी बहुत कुछ हासिल किया जाना बाक़ी है.

अप्रैल 2021 के बाद से, कुछ इलाक़ों में खाद्य आपूर्ति में निरन्तर व्यवधान नज़र आया है, जिससे अशान्ति पनपी है.

साथ ही, स्थानीय स्तर पर पुनर्एकीकरण व आपसी मेल-मिलाप प्रयासों की दीर्घकालीन सफलता के प्रति शंका बढ़ रही है. 

महासचिव का कार्यक्रम

अपनी यात्रा के दौरान यूएन प्रमुख, कोलम्बिया के राष्ट्रपति आइवन ड्यूके और अन्य सरकारी अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे. साथ ही, उनका FARC गुट के पूर्व नेताओं से मिलने का भी कार्यक्रम है. 

महासचिव गुटेरेश, शान्तिनिर्माण, आपसी मेल-मिलाप प्रयासों पर आधारित कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे, जिसमें पूर्व लड़ाके, समुदाय व प्रशासनिक अधिकारी भी हिस्सा लेंगे.  

यूएन प्रमुख की संक्रमणकालीन न्याय प्रणाली के प्रमुखों, सशस्त्र हिंसा के पीड़ितों और कोलम्बियाई नागरिक समाज के नेताओं के साथ भी बैठक होगी, और वह शान्ति प्रक्रिया की मुख्य उपलब्धियों का जायज़ा लेंगे. 

यह, कोलम्बिया में संयुक्त राष्ट्र सत्यापन मिशन के सहयोग से तैयार लेख का संक्षिप्त रूप है. 

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