कॉप26 के नाकाम होने का गम्भीर जोखिम, ज़्यादा जलवायु कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में रविवार को शुरू हो रहे यूएन जलवायु सम्मेलन – कॉप26 के बारे में कहा है कि इस सम्मेलन के नाकाम हो जाने का गम्भीर जोखिम नज़र आ रहा है. उन्होंने शुक्रवार को, रोम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ये आशंका व्यक्त की है.

यूएन महासचिव ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि देशों के राष्ट्रीय स्तर निर्धारित योगदान (एनडीसी), महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाइयों के लिये सरकारों के औपचारिक संकल्प, अब भी दुनिया को, 2.7 डिग्री सेल्सियस की वैश्विक तापमान वृद्धि के घातक रास्ते पर ले जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “अगर हाल के समय में व्यक्त किये गए संकल्प व प्रतिबद्धताएँ स्पष्ट और भरोसेमन्द भी होते, जबकि इनमें से कुछ के बारे में गम्भीर सवाल अब भी क़ायम हैं, तो भी हम एक जलवायु त्रासदी की तरफ़ बढ़ रहे हैं.”

ज़्यादा महत्वाकांक्षा और कार्रवाई की दरकार

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि बहुत आदर्श स्थिति वाले परिदृश्य की आशा भी की जाए, तो भी मौजूदा रफ़्तार को देखते हुए तापमान वृद्धि दो डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा रहेगी.

“अगर हम वास्तविक सफलता चाहते हैं...तो हमें और ज़्यादा महत्वाकांक्षा दिखानी होगी और ज़्यादा कार्रवाई करनी होगी.”

उन्होंने कहा कि ऐसा, एक राजनैतिक इच्छाशक्ति को बहुत बड़े पैमाने पर सक्रिय करने से ही सम्भव होगा, और इसके लिये भरोसे की ज़रूरत है, जबकि साख़ के मामले में अनेक सवाल मौजूद हैं.

यूएन प्रमुख ने कहा कि जी20 समूह के भीतर, और विकसित व विकासशील देशों के दरम्यान, अविश्वास के गम्भीर स्तर नज़र आ रहे हैं, उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों सहित.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा, “इस जी20 सम्मेलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य, भरोसा बहाल करना होना चाहिये – जिसके लिये, अविश्वास के मुख्य स्रोतों से निपटना होगा, जोकि अन्यायों, असमानताओं और भू-राजनैतिक विभाजनों के मूल में हैं.”

अविश्वास की खाई को पाटना

यूएन महासचिव ने जी20 समूह से, विश्वास में कमी की खाई को पाटने के लिये, निर्णायक क़दम उठाने की अपील की है, और शुरुआत वैक्सीन समानता के साथ की जा सकती है.

उन्होंने कहा कि इन विभाजनों के ही कारण, जी20 के नेतृत्व वाला कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम मूर्त रूप नहीं ले सका, क्योंकि वैश्विक समन्वित कार्रवाई पीछे चली गई, जिसके लिये वैक्सीन की जमाख़ोरी और राष्ट्रवाद ज़िम्मेदार हैं.

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इस पुकार को समर्थन व्यक्त किया कि इस वर्ष के अन्त तक, दुनिया भर के सभी देशों में 40 प्रतिशत और 2022 के मध्य तक 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण करने के लिये, वैश्विक कोविड-19 टीकाकरण रणनीति को समर्थन दें.

यूएन प्रमुख ने कहा, “मैं जी20 देशों से इस रणनीति को पूरा समर्थन देने और इसकी कामयाबी के लिये तालमेल बिठाने का आग्रह करता हूँ.”

“हर किसी के लिये, और हर जगह, महामारी का ख़ात्मा करने के वास्ते, यही एक मात्र रास्ता है.”

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