कपास है 10 करोड़ से भी ज़्यादा परिवारों की आय का सहारा

कपास (कॉटन) की एक मीट्रिक टन मात्रा, औसतन पाँच लोगों को रोज़गार मुहैया कराती है, अक्सर दुनिया के सबसे ज़्यादा हाशिये वाले क्षेत्रों में; इस तरह कपास से, दुनिया भर में, कुल मिलाकर, लगभग 10 करोड़ परिवारों की आजीविका चलती है.

संयुक्त राष्ट्र ने कपास के इसी और अन्य तरह के योगदान को पहचान देने के लिये, गुरूवार, 7 सितम्बर को विश्व कपास दिवस मनाया है. 

कपास, छोटे पैमाने वाले लाखों-करोड़ों उत्पादकों और कारोबारियों के लिये आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है और कुछ निर्धनतम देशों को कपास का निर्यात करने से राजस्व भी प्राप्त होता है.

इस कारण, कपास की पैदावार और कारोबार, 2030 के टिकाऊ विकास एजेण्डा में योगदान करने वाला एक महत्वपूर्ण सैक्टर है.

संयुक्त राष्ट्र की नज़र में, कपास प्राकृतिक कपड़े व परिधानों के रूप में केवल एक उपभोग की वस्तु से कहीं ज़्यादा अहमियत रखता है, “ये जीवन बदल देने वाला एक उत्पाद है.”

महत्वपूर्ण स्रोत व क्षमता

कपास, महिलाओं सहित, बहुत से ग्रामीण श्रमिकों के लिये आमदनी का प्रमुख स्रोत है.

संयुक्त राष्ट्र, इस विश्व कपास दिवस के ज़रिये, आर्थिक विकास, अन्तरराष्ट्रीय व्यापार और निर्धनता उन्मूलन में, कपास की केन्द्रीय भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहता है.

कपास की खेती व फ़सल को, जलवायु परिवर्तन से अप्रभावित बताया जाता है और कपास की खेती, सूखे व जल रहित क्षेत्रों में की जा सकती है.

कपास की खेती, दुनिया भर में कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 2.1 प्रतिशत हिस्सा घेरती है, जबकि ये, दुनिया भर की कपड़ा ज़रूरतों के 27 प्रतिशत हिस्से को पूरा करती है.

कपास का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा, कपड़ा उद्योग में प्रयोग होता है, 15 प्रतिशत घरों में काम आने वाली या सजाने वाली चीज़ों में और बाक़ी 5 प्रतिशत कपास, अन्य चीज़ों में इस्तेमाल होता है.

कपास का लगभग कोई भी हिस्सा बर्बाद नहीं जाता है. 

कपास से वस्त्र और परिधान व अन्य ज़रूरतें पूरी करने के अलावा, इससे, कुछ खाद्य उत्पाद भी निकाले जा सकते हैं. जैसे कि खाने योग्य तेल और इसके बीजों से पशुओं का चारा.

कपास के कुछ अन्य प्रयोग भी हाल ही में विकसित किये गए हैं जिनमें 3D प्रिण्टरों में कपास आधारित पुर्ज़े वग़ैरा. 

ऐसा इसलिये क्योंकि कपास से बने पुर्ज़े गर्मी को बहुत अच्छी तरह सोखते हैं, गीला होने पर और मज़बूत हो जाते हैं और लकड़ी जैसी सामग्रियों की तुलना में, इनका वज़न आसानी से मापा जा सकता है.

कॉटन-4

विश्व कपास दिवस मनाने का विचार सबसे पहले 2019 में आया, जब सब-सहारा अफ़्रीका क्षेत्र में, चार कपास उत्पादक देशों – बेनिन, बुर्कीना फ़ासो, चाड और माली ने, 7 अक्टूबर को एक जश्न मनाने का प्रस्ताव, विश्व व्यापार संगठन (WTO) को पेश किया.

इन चारों देशों को कॉटन-4 के नाम से भी जाना जाता है.

संयुक्त राष्ट्र ने 7 अक्टूबर की तारीख़ को आधिकारिक रूप से पहचान दे दी, और ये दिन जल्दी ही, कम विकसित देशों की बाज़ार उपलब्धता ज़रूरतों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, टिकाऊ व्यापार नीतियों को आगे बढ़ाने, और विकासशील देशों को, मूल्य श्रृंखला में प्रत्येक चरण से लाभान्वित होने योग्य बनाने के एक अवसर के रूप में तब्दील हो गया.

यूएन एजेंसियाँ, इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये, वर्षों से काम करती रही हैं.

मसलन, वर्ष 2003 से अन्तरराष्ट्रीय व्यापार केन्द्र (ITC) और विश्व व्यापार संगठन (WTO), उत्पादन बेहतर बनाने व स्थानीय प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिये, इन चार कपास उत्पादक देशों की मदद करते आ रहे हैं. 

इनके अलावा ये संगठन, व्यापार में उच्च बाधाओं को दूर करने के लिये ज़रूरी व्यापार सुधारों के बारे में चर्चा में भी मदद करते आए हैं.

एक अन्य यूएन एजेंसी – खाद्य व कृषि संगठन (FAO) ने भी विकासशील देशों को, लम्बे समय से, तकनीकी और नीति सम्बन्धी मदद मुहैया कराई है. 

इसी तरह का एक उदाहरण है - +कपास परियोजना. ये ब्राज़ील के साथ मिलकर चलाई जा रही एक सहकारी पहल है, जिसके तहत लातीनी अमेरिका के कपास उत्पादकों को, नवाचारी कृषि तरीक़े अपनाने के बारे में मदद मुहैया कराई जाती है.

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