एसडीजी हासिल करने में युवाओं की भूमिका है अहम

भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (UNIC), टिकाऊ विकास लक्ष्य (SDG) प्राप्ति की दिशा में युवाओं की अहम भूमिका को देखते हुए, युवाओं में नवाचार बढ़ाने व एसडीजी लक्ष्य हासिल करने हेतु जागरूकता व उत्साहवर्धन के लिये सक्रिय अभियान चला रहा है. इन प्रयासों का असर अब सामने नज़र आने लगा है और युवजन सुरक्षित भविष्य के समाधानों के प्रति सचेत हो रहे हैं. 

भारत में दिल्ली के एक युवा उदित सिंघल ने, जब 2018 में अपनी Glass2Sand पहल शुरू की, तो उनका उद्देश्य था – काँच की ख़ाली बोतलों को काँच के रेत में परिवर्तित करके शहर में काँच के कचरे के लिये एक व्यवहार्य समाधान प्रदान करना - जिसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिये किया जा सके. 

दो साल बाद, उदित सिंघल, न केवल लगभग 18 हज़ार काँच की बोतलों को री-सायकिल करने में सफल हुए, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिये युवा नेताओं के संयुक्त राष्ट्र 2020 दस्ते में भी चुने गए, जो एसडीजी लक्ष्यों की दिशा में काम कर रहे युवाओं के लिये सर्वोच्च सम्मानों में से एक है.

उदित सिंघल की कहानी कहानी जहाँ, बहुत से लोगों के लिये प्रेरणा का काम कर सकती है, वहीं 2030 तक एसडीजी एजेण्डा को हासिल करने में अपनी युवा आबादी को शामिल करने के लिये, भारत जैसे विविधता वाले देश की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा के भी रास्ते खोलती है.

युवजन अब ला रहे हैं बदलाव

भारत और भूटान के लिये संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (यूएनआईसी) के सहयोग से, नई दिल्ली के एएसएन स्कूल ने 'टिकाऊ भारत' पर, दो दिवसीय वर्चुअल राष्ट्रीय युवा-शिखर सम्मेलन आयोजित किया.
ASN School, New Delhi
भारत और भूटान के लिये संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (यूएनआईसी) के सहयोग से, नई दिल्ली के एएसएन स्कूल ने 'टिकाऊ भारत' पर, दो दिवसीय वर्चुअल राष्ट्रीय युवा-शिखर सम्मेलन आयोजित किया.

भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (यूएनआईसी) के प्रभारी अधिकारी, राजीव चन्द्रन के अनुसार, ‘युवा नेतृत्व पहल’ ने भारत में टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के अभियान को बढ़ावा दिया है. भारत के युवा अब 'बदलाव' ला रहे हैं और स्थिरता का सिद्धान्त अपना रहे हैं.

भारत में, दिल्ली का ASN हाई स्कूल ने, वर्ष 2015 से, UNIC के सहयोग से एसडीजी प्रोत्साहन हेतु कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है.

राजीव चन्द्रन बताते हैं, इसके तहत, "हर साल, स्कूल के सभी छात्र - किन्डरगार्टन से हाई स्कूल तक - कक्षा में अपने एसडीजी अन्वेषणों का प्रदर्शन करते हैं. उनकी एसडीजी ऊर्जा अकल्पनीय है.” 

यूएनआईसी ने इस अनूठे प्रयास को मान्यता देते हुए, 2016 में एएसएन स्कूल को भारत में पहली एसडीजी स्कूल प्रयोगशाला का दर्जा दिया. हर साल यह स्कूल, एसडीजी और स्थिरता सम्बन्धित मूल्यों को बढ़ावा देने के लिये, कम से कम एक दर्जन कार्यक्रमों की मेज़बानी करता है.

इस वर्ष, भारत और भूटान के लिये संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (यूएनआईसी) के सहयोग से, नई दिल्ली के एएसएन स्कूल ने 'टिकाऊ भारत' पर, दो दिवसीय वर्चुअल राष्ट्रीय युवा-शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से 80 स्कूलों के दो हज़ार छात्रों ने भाग लिया.

सभी छात्रों में ये सहमति बनी कि एक आदर्श भविष्य के लिये समावेशी समाज होना ज़रूरी है; एक ऐसा समाज जहाँ सभी के लिये समान अवसर और संसाधनों तक पहुँच हो. 

छात्रों ने महसूस किया कि केवल युवा आबादी के समर्थन से ही 17 टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की दिशा में सख़्ती से काम किया जा सकता है. 

स्थाई कविता लेखन, ई-कॉमिक पीढ़ी, माइम, क्ले डिज़ाइनिंग, जिंगल मेकिंग और पेंटिंग सहित रचनात्मक घटनाओं की एक श्रृंखला के ज़रिये, छात्रों ने एसडीजी हासिल करने की आवश्यकता पर बल दिया और एसडीजी लक्ष्यों को क्रियान्वित करने के लिये युवाओं के नवीन विचारों के उदाहरण दिये.

स्कूली छात्रों ने प्रदेशों के स्तर पर, एसडीजी की प्रगति का विश्लेषण और मूल्यांकन करके व  कोविड-19 महामारी से हुई तबाही को ध्यान में रखते हुए, टिकाऊ भारत के लिये ज़रूरी कुछ संकल्प भी विकसित किये.

इन प्रस्तावों में - स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने, जैविक खेती पर ध्यान केन्द्रित करने, महिलाओं की सुरक्षा के उपाय बढ़ाने और जलवायु-सम्वेदनशील परियोजनाओं पर अधिक ज़ोर देने की आवश्यकता शामिल थी. 

यूएनआईसी के प्रभारी अधिकारी, राजीव चंद्रन ने युवाओं के उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना करते हुए, छात्रों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुझाए गए 10 ‘ACT NOW’ कार्रवाई लक्ष्यों का पालन करने के लिये प्रोत्साहित किया.

इनमें वनस्पति आधारित भोजन का ज़्यादा प्रयोग, बिजली की बचत व कम हवाई सफ़र करना और पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं का चयन करना शामिल है. 

एसडीजी प्राप्ति में सरकार की भूमिका

इस कार्यक्रम में उपस्थित, भारत सरकार के नीति आयोग में शिक्षा निदेशक और उप सलाहकार, हर्षित मिश्रा ने युवाओं को आश्वासन दिया कि भारत सरकार एसडीजी हासिल करने के लिये “कोई क़सर बाक़ी नहीं छोड़ेगी.

भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र (UNIC) के अनुसार पिछले एक दशक में युवा नेतृत्व वाले आन्दोलनों, गतिविधियों, सामूहिक प्रयासों और संगठनों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो अहम मुद्दों से निपटने में अग्रणी रहे हैं.

अनेक व्यक्तिगत और सामूहिक आन्दोलनों के अलावा, भारत सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाकर देश को अपने एसडीजी लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करने के लिये, ‘मेक इन इण्डिया’ योजना, ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ और ‘स्किल इण्डिया’ जैसी कई योजनाएँ भी शुरू की हैं.

फिर भी, कोविड-19 महामारी के कारण, भारत में एसडीजी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रगति धीमी ज़रूर हुई है.

इसलिये, देश के शासन में, विविध आवाज़ों को शामिल करना अधिक आवश्यक हो गया है. एक ऐसे देश में, जहाँ कुल आबादी के 42 करोड़ 20 लाख लोग युवा हैं (2011 की जनगणना के अनुसार), युवाओं को एसडीजी परियोजनाओं में शामिल करना समय की आवश्यकता है.

युवाओं के पास, वर्चुअल और व्यक्तिगत माध्यमों के ज़रिये, लोगों को जोड़ने के लिये साझेदारी व गठबन्धन बनाने और लोगों को एकजुट करने की दिशा में कार्रवाई करने की पर्याप्त क्षमता है.

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