ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिये समझौता

अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी - IAEA ने ईरान के साथ, रविवार को एक समझौता किया है जिसके तहत, ईरान, अपने परमाणु ठिकानों के भीतर, कैमरा उपकरणों के ज़रिये निगरानी कराने के लिये सहमत हो गया है. 

अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुखिया रफ़ाएल मैरियानो ग्रॉसी की हाल की तेहरान यात्रा के दौरान ये समझौता हुआ है.

एजेंसी ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के उपाध्यक्ष मोहम्मद इस्लामी के साथ रचनात्मक बातचीत हुई, जिसमें ये सहमति बनी कि देश के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी कर रहे कैमरा उपकरणों में नए मैमोरी कार्ड स्थापित किये जाएंगे.

दोनों पक्षों के बीच, निगरानी कैमरा उपकरणों के सुचारू रूप से काम करने के लिये उनकी सर्विस और मरम्मत वग़ैरा किये जाने पर भी सहमति बनी है.

अलबत्ता, इसके अलावा और ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है कि दोनों पक्षों के बीच इस बारे में सहमति बनी है कि नए मैमोरी कार्ड कैसे स्थापित किये जाएंगे.

वक्तव्य में कहा गया है कि सम्बद्ध पक्षों के बीच, सहयोग और आपसी विश्वास के एक प्रतीक के रूप में, मौजूदा कार्डों को सील बन्द करके ईरान में ही रखा जाएगा. इन कार्डों में, ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों में ईरानी गतिविधियाँ नज़र आती हैं.

औपचारिक निन्दा

इस समझौते की बदौलत, परमाणु एजेंसी के 35 सदस्य देशों वाले बोर्ड ऑफ़ गवर्नर द्वारा औपचारिक निन्दा को टाला जा सकता है, जिसकी बैठक इसी सप्ताह वियेना में हो रही है.

ईरान के किसी अघोषित परमाणु ठिकाने पर यूरेनिमय के कुछ अवशेषों की जाँच में सहयोग नहीं करने के लिये, ये औपचारिक निन्दा सम्भावित थी.

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर के उस प्रस्ताव में, वर्ष 2015 के ईरान परमाणु समझौते को फिर से जीवित करने के लिये, अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होने वाली बातचीत को खटाई डाल देने का जोखिम नज़र आ रहा था.

वर्ष 2018 में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने, ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को हटा लिया था. उस समझौते का औपचारिक नाम – संयुक्त व्यापक कार्रवाई योजना (JCPOA) है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के नियम निर्धारित किये जाने के साथ-साथ, ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबन्ध हटाने का रास्ता भी सुझाया गया है.

जुलाई 2019 में, ईरान ने अपनी यूरेनियम भण्डार की सीमा का कथित रूप से उल्लंघन किया था, और यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का अपना इरादा घोषित किया था. इससे परमाणु प्रसार का गम्भीर जोखिम उत्पन्न हो गया था.

ईरान ने, 15 फ़रवरी 2021 को, ये घोषणा भी की थी कि वो परमाणु समझौते में, पारदर्शिता के लिये अपनाए जाने वाले स्वैच्छिक उपाय भी रोक देगा. साथ ही, ईरान के सुरक्षा समझौते में निर्धारित कुछ अन्य प्रबन्ध भी रोकने की घोषणा की गई थी.

अनुपालन के मुद्दे

परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुखिया रफ़ाएल मैरियानो ग्रॉसी ने सोमवार को, वियेना में, बोर्ड ऑफ़ गवर्नर की बैठक शुरू करते हुए याद दिलाया कि, एजेंसी ने 23 फ़रवरी 2021 तक, परमाणु समझौते के तहत ईरान की ज़िम्मेदारियों व संकल्पों की निगरानी और क्रियान्वयन की पुष्टि की थी.

अलबत्ता उस दिन के बाद से, ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम सम्बन्धी संकल्पों पर अमल रोक देने के कारण, निगरानी गतिविधियाँ गम्भीर रूप से प्रभावित हुई हैं. 

उन्होंने कहा, “एजेंसी का ये भरोसा कि वो जानकारी हासिल करना जारी रख सकती है, समय के साथ कमज़ोर पड़ा है, हाल के समय में तो बहुत ज़्यादा. अगर ईरान इस स्थिति को तुरन्त बदलने के लिये सहमत नहीं होता तो ये भरोसा और भी ज़्यादा दरकता रहता.”

एजेंसी प्रमुख ने कहा कि ताज़ा समझौते के बावजूद, वो इस बारे में चिन्तित हैं कि ईरान में, कुछ अघोषित स्थलों पर परमाणु सामग्री मौजूद रही है, और देश की परमाणु सामग्री के मौजूदा ठिकानों के बारे में, एजेंसी को जानकारी नहीं है.

सम्वाद जारी है

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के उपाध्यक्ष मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि उनका देश, परमाणु ऊर्जी एजेंसी की इस सप्ताह वियेना में होने वाली बैठक के साथ-साथ अनौपचारिक स्तर पर सम्वाद जारी रखेगा. 

उन्होंने ये भी बताया कि एजेंसी के मुखिया रफ़ाएल मैरियानो ग्रॉसी, निगरानी कैमरा उपकरणों के मैमोरी कार्ड बदलने का बारे में, तकनीकि विवरण पर चर्चा के लिये, फिर से निकट भविष्य में तेहरान की यात्रा करेंगे.

उन्होंने कहा कि ईरान के लिये, आपसी विश्वास बनाना और उसे क़ायम रखना, बहुत अहम मुद्दा है. 

उत्तर कोरिया का मुद्दा

इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, मुक्त सूचना प्रवाह और सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की भी निगरानी जारी रखे हुए है.

मीडिया ख़बरों के अनुसार, सोमवार को उत्तर कोरिया ने, लम्बी दूर तक मार करने वाली एक नई क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण करने की घोषणा की थी. पिछले छह महीनों के दौरान, ये पहला इस तरह का मिसाइल परीक्षण था.

यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार, क्रूज़ मिसाइलें प्रतिबन्धित नहीं हैं. इन प्रसातों में, विशेष रूप से, बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने और उनका परीक्षण किये जाने पर प्रतिबन्ध लगे हैं.

रफ़ाएल मैरियानो ग्रॉसी के लिये, उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियाँ, अब भी गम्भीर चिन्ता का कारण बनी हुई हैं.

Share this story